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इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट में फुल बाडी ट्रक स्कैनर की हो गई है शुरुआत
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अमृतसर। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बिगड़े हालात के बीच इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) में फुल बॉडी ट्रक स्कैनर (एफबीटीएस) की शुरुआत होने पर भारत-पाक सीमा पर एक नए आधुनिक युग की शुरुआत हो गई है। यह शुरुआत मुंबई के भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर की मंजूरी दिए जाने के बाद एफबीटीएस को कमीशंड किया जा सका है। एफबीटीएस के एक्टीवेट होने पर जहां इसे रेडिएशन डिटेक्शवन इक्विपमेंट (आरडीई) के रूप में प्रयोग किया जाएगा, वहीं इसकी मदद से पाकिस्तान से होने वाली हेरोइन, हथियारों व अन्य मादक पदार्थों की तस्करी पर भी लगाम लगेगी।
पाकिस्तान सीमा से कुछ ही मीटर की दूरी पर इस एफबीटीएस की स्थापना का कार्य 15 मार्च 2018 को शुरू हुआ था। करीब 23 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट का काम अक्तूबर 2018 में पूरा करने की अवधि निर्धारित की गई थी। बाद में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की तारीख दिसंबर 2018 निर्धारित कर दी गई। अमेरिका की कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2019 के अंत तक पूरा कर दिया। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के ट्रायल में फेल हो गया तो अमेरिका की इंस्टालेशन कंपनी ने इसके कुछ पार्ट में बदलाव किया और मामला भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के पाले में लंबित है।
एक तरफ जहां लैंडपोर्ट अथार्टी आफि इंडिया के चेयरमैन आदित्य मिश्रा ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी, वहीं दूसरी तरफ आईसीपी अटारी पर तैनात लैंडपोर्ट अथार्टी आफ इंडिया के स्टेशन मैनेजर सुखदेव कुमार ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। वहीं दूसरी आईसीपी पर तैनात अन्य एजेंसियों के अधिकारियों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की बात माने तो अभी भी यह फुल बाडी ट्रक स्कैनर पूरी तरह से कमीशंड नहीं किया जा सका।
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स्कैनर से निकलने वाले रेडिएशन के कारण जरूरी थी एटामिक सेंटर की मंजूरी
स्कैनर जब चलता है तो उससे रेडिएशन होता है और इसकी चपेट में आसपास के लोग आते हैं। यह ऐसी जगह पर भी लगना है जहां लोगों की उपस्थिति बनी रहेगी। ऐसे में उनकी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। देश में इस तरह के प्रोजेक्ट के कहीं भी लगना होता है तो उसकी भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर से मंजूरी लेना जरूरी होता है। इसके लिए सेंटर पहले लगाए जाने वाली जगह की वस्तु स्थिति जानता है। अनुकूल पाए जाने पर मंजूरी देता है। अगर नहीं है तो उन खामियों को अपने तौर पर दुरुस्त करके फिर आगे जाने की मंजूरी देता है। यह मंजूरी इसलिए जरूरी है कि इससे होने वाले रेडिएशन का असर इसके आसपास काम करने वालों पर पड़ता है। इसकी खतरनाक किरणों की वजह से शरीर के भीतर के पार्ट, जैसे किडनी, हार्ड, लिवर ही नहीं, बल्कि आंखें भी प्रभावित होती हैं। इसी पहलू को लेकर इस स्कैनर को एटामिक सेंटर भेजा गया है। फिलहाल इसे लगाने के लिए कस्टम कई बार सरकार को लिख चुकी है।
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पाकिस्तान सीमा से कुछ ही मीटर की दूरी पर इस एफबीटीएस की स्थापना का कार्य 15 मार्च 2018 को शुरू हुआ था। करीब 23 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट का काम अक्तूबर 2018 में पूरा करने की अवधि निर्धारित की गई थी। बाद में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की तारीख दिसंबर 2018 निर्धारित कर दी गई। अमेरिका की कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2019 के अंत तक पूरा कर दिया। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के ट्रायल में फेल हो गया तो अमेरिका की इंस्टालेशन कंपनी ने इसके कुछ पार्ट में बदलाव किया और मामला भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के पाले में लंबित है।
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एक तरफ जहां लैंडपोर्ट अथार्टी आफि इंडिया के चेयरमैन आदित्य मिश्रा ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी, वहीं दूसरी तरफ आईसीपी अटारी पर तैनात लैंडपोर्ट अथार्टी आफ इंडिया के स्टेशन मैनेजर सुखदेव कुमार ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। वहीं दूसरी आईसीपी पर तैनात अन्य एजेंसियों के अधिकारियों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की बात माने तो अभी भी यह फुल बाडी ट्रक स्कैनर पूरी तरह से कमीशंड नहीं किया जा सका।
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स्कैनर से निकलने वाले रेडिएशन के कारण जरूरी थी एटामिक सेंटर की मंजूरी
स्कैनर जब चलता है तो उससे रेडिएशन होता है और इसकी चपेट में आसपास के लोग आते हैं। यह ऐसी जगह पर भी लगना है जहां लोगों की उपस्थिति बनी रहेगी। ऐसे में उनकी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। देश में इस तरह के प्रोजेक्ट के कहीं भी लगना होता है तो उसकी भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर से मंजूरी लेना जरूरी होता है। इसके लिए सेंटर पहले लगाए जाने वाली जगह की वस्तु स्थिति जानता है। अनुकूल पाए जाने पर मंजूरी देता है। अगर नहीं है तो उन खामियों को अपने तौर पर दुरुस्त करके फिर आगे जाने की मंजूरी देता है। यह मंजूरी इसलिए जरूरी है कि इससे होने वाले रेडिएशन का असर इसके आसपास काम करने वालों पर पड़ता है। इसकी खतरनाक किरणों की वजह से शरीर के भीतर के पार्ट, जैसे किडनी, हार्ड, लिवर ही नहीं, बल्कि आंखें भी प्रभावित होती हैं। इसी पहलू को लेकर इस स्कैनर को एटामिक सेंटर भेजा गया है। फिलहाल इसे लगाने के लिए कस्टम कई बार सरकार को लिख चुकी है।