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कोटकपूरा गोलीकांड में पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी से 4 घंटे पूछताछ
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चंडीगढ़। 2015 के कोटकपूरा पुलिस फायरिंग की घटना की जांच कर रहे पंजाब पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। एसआईटी ने कई सवाल पूछे। कुछ सवालों पर सैनी मौन साधे रहे। 25 दिन पहले एसआईटी ने पूछताछ के लिए सैनी को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने 3 हफ्ते का समय मांगा था।
एसआईटी प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एलके यादव ने सुमेध सैनी को पंजाब पुलिस मुख्यालय में तलब किया था। सैनी सुबह करीब 11.30 बजे वहां पहुंचे। उनसे 3.30 बजे तक पूछताछ हुई। हालांकि पंजाब पुलिस ने अभी औपचारिक तौर पर पूरी पूछताछ के बारे में कुछ नहीं कहा है। सूत्र बताते हैं कि जांच दल द्वारा सैनी से पूछा गया प्रमुख सवाल था कि घटना के दिन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने का आदेश किसने दिया था?
सैनी को 2015 में कोटकपूरा और बहिबल कलां पुलिस फायरिंग की घटनाओं में एसआईटी ने आरोपी बनाया है। पिछले महीने पंजाब - हरियाणा हाईकोर्ट ने 2015 के बहिबल कलां फायरिंग मामले में पंजाब पुलिस की जांच के खिलाफ सैनी और अन्य आरोपी पुलिस अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सैनी और अन्य ने एसआईटी द्वारा दायर प्राथमिकी और आरोपपत्र को रद्द करने और मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग की थी।
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इन सवालों के जवाब खोज रही एसआईटी
एसआईटी जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि अक्तूबर 2015 में बेअदबी की घटनाओं की श्रृंखला का विरोध कर रही भीड़ पर गोली चलाने में पुलिस गलत तो नहीं थी। यह भी जानना चाहती है कि फायरिंग का आदेश किसने दिया था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर ही फैसला लिया या डीजीपी सैनी या तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के आदेश आए थे।
ये था मामला
2015 में फरीदकोट में गुरु गंथ साहिब की प्रतिलिपि की चोरी, हस्तलिखित अपवित्र पोस्टर और पवित्र ग्रंथ के फटे पन्ने बरगाड़ी में बिखरे पाए जाने से संबंधित घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं के कारण फरीदकोट में विरोध प्रदर्शन हुआ था। अक्तूबर 2015 में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में बहिबल कलां में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि फरीदकोट के कोटकपूरा में कुछ लोग घायल हो गए थे।
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एसआईटी प्रमुख अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एलके यादव ने सुमेध सैनी को पंजाब पुलिस मुख्यालय में तलब किया था। सैनी सुबह करीब 11.30 बजे वहां पहुंचे। उनसे 3.30 बजे तक पूछताछ हुई। हालांकि पंजाब पुलिस ने अभी औपचारिक तौर पर पूरी पूछताछ के बारे में कुछ नहीं कहा है। सूत्र बताते हैं कि जांच दल द्वारा सैनी से पूछा गया प्रमुख सवाल था कि घटना के दिन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने का आदेश किसने दिया था?
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सैनी को 2015 में कोटकपूरा और बहिबल कलां पुलिस फायरिंग की घटनाओं में एसआईटी ने आरोपी बनाया है। पिछले महीने पंजाब - हरियाणा हाईकोर्ट ने 2015 के बहिबल कलां फायरिंग मामले में पंजाब पुलिस की जांच के खिलाफ सैनी और अन्य आरोपी पुलिस अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। सैनी और अन्य ने एसआईटी द्वारा दायर प्राथमिकी और आरोपपत्र को रद्द करने और मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग की थी।
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इन सवालों के जवाब खोज रही एसआईटी
एसआईटी जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि अक्तूबर 2015 में बेअदबी की घटनाओं की श्रृंखला का विरोध कर रही भीड़ पर गोली चलाने में पुलिस गलत तो नहीं थी। यह भी जानना चाहती है कि फायरिंग का आदेश किसने दिया था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर ही फैसला लिया या डीजीपी सैनी या तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के आदेश आए थे।
ये था मामला
2015 में फरीदकोट में गुरु गंथ साहिब की प्रतिलिपि की चोरी, हस्तलिखित अपवित्र पोस्टर और पवित्र ग्रंथ के फटे पन्ने बरगाड़ी में बिखरे पाए जाने से संबंधित घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं के कारण फरीदकोट में विरोध प्रदर्शन हुआ था। अक्तूबर 2015 में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में बहिबल कलां में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि फरीदकोट के कोटकपूरा में कुछ लोग घायल हो गए थे।