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Panchkula News: सीबीआई के पूर्व जज सुधीर परमार समेत पांच आरोप मुक्त
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विशेष सीबीआई कोर्ट का फैसला, कहा-आरोप तय करने लायक साक्ष्य नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज चर्चित मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने पूर्व सीबीआई जज सुधीर परमार सहित पांच लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामले में आरोप तय करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
अदालत ने पूर्व जज सुधीर परमार, उनके भतीजे अजय परमार और रियल एस्टेट कंपनियों के प्रतिनिधि रूप बंसल, अनिल भल्ला व ललित गोयल को डिस्चार्ज कर दिया। आरोपियों की ओर से दाखिल अर्जी में साक्ष्यों के अभाव की दलील दी गई थी, जिसे सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता। ऐसे में सभी आरोपियों को डिस्चार्ज किया जाता है और उनके जमानती बॉन्ड भी समाप्त किए जाते हैं। सुनवाई के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप सहित अन्य सामानों की जांच के बाद उन्हें सील कर न्यायिक मालखाना, पंचकूला में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए।
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सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पब्लिक प्रॉसीक्यूटर मौजूद रहे जबकि सुधीर परमार की ओर से अधिवक्ता ने पैरवी की। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में दर्ज इस मामले में रिश्वत लेने, पद का दुरुपयोग और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि पंचकूला में विशेष न्यायाधीश रहते हुए सुधीर परमार ने कुछ रियल एस्टेट डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने के लिए पक्षपात किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज चर्चित मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने पूर्व सीबीआई जज सुधीर परमार सहित पांच लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामले में आरोप तय करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
अदालत ने पूर्व जज सुधीर परमार, उनके भतीजे अजय परमार और रियल एस्टेट कंपनियों के प्रतिनिधि रूप बंसल, अनिल भल्ला व ललित गोयल को डिस्चार्ज कर दिया। आरोपियों की ओर से दाखिल अर्जी में साक्ष्यों के अभाव की दलील दी गई थी, जिसे सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनता। ऐसे में सभी आरोपियों को डिस्चार्ज किया जाता है और उनके जमानती बॉन्ड भी समाप्त किए जाते हैं। सुनवाई के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप सहित अन्य सामानों की जांच के बाद उन्हें सील कर न्यायिक मालखाना, पंचकूला में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए।
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सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पब्लिक प्रॉसीक्यूटर मौजूद रहे जबकि सुधीर परमार की ओर से अधिवक्ता ने पैरवी की। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में दर्ज इस मामले में रिश्वत लेने, पद का दुरुपयोग और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि पंचकूला में विशेष न्यायाधीश रहते हुए सुधीर परमार ने कुछ रियल एस्टेट डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने के लिए पक्षपात किया।