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दलबदलू अयोग्य विधायकों की पेंशन से जु?ी फाइल सरकारी रिकॉर्ड से गायब
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चंडीगढ़। हरियाणा के दलबदलू अयोग्य विधायकों की पेंशन से जुड़ी फाइल सरकारी रिकॉर्ड से गायब है। रिकॉर्ड में इसके न मिलने पर अभी तक वैकल्पिक फाइल भी तैयार नहीं की गई है। दो वर्ष में दो बार आरटीआई के जरिये इस बारे में जानकारी मांगी गई, लेकिन दोनों बार जवाब में बताया गया कि फाइल नहीं मिल रही।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता व आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत कुमार ने दो वर्ष पूर्व सितंबर 2019 में दलबदलू विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बावजूद पेंशन मिलने के लिए योग्य बनाने संबंधी कानूनी संशोधन की जानकारी मांगी थी। मुख्य सचिव कार्यालय की राजनीतिक शाखा में दायर आरटीआई का अक्तूबर 2019 में शाखा के उप सचिव ने जवाब दिया कि बहुत प्रयासों के बावजूद संबंधित फाइल नहीं मिल पाई। यह भी लिखा गया कि इस संबंध में सचिवालय की सभी शाखाओं से उक्त फाइल को अपने अपने स्तर पर ढूंढने और रिपोर्ट करने को भी लिखा जाएगा। जल्द ही आवेदनकर्ता को आगामी जानकारी दे दी जाएगी।
बहरहाल, इस वर्ष अगस्त माह में दोबारा आरटीआई दायर की गई थी, जिसके जवाब में बताया गया है कि फाइल नहीं मिल पा रही। इस मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने के लिए अपील दायर की गई है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
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अयोग्य विधायकों को कानून के अनुसार ही पेंशन दी जा रही है, यह बात स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता साफ कर चुके हैं। हरियाणा विधानसभा सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी वर्ष 1975 के कानून के प्रावधान में संशोधन कर यह संभव बनाया जा चुका है। मार्च 2007 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने विधानसभा से इस कानून की धारा 7भन (1भन) में संशोधन कर यह प्रावधान किया है। केवल लोक प्रतिनिधित्व कानून,1951 की उपयुक्त धाराओं के अंतर्गत अयोग्य होने पर ही विधायक पेंशन लेने का हकदार नहीं होगा। इस संशोधन से दलबदल कानून में अयोग्य होने पर भी विधायकों को पेंशन नहीं मिलती थी। हुड्डा सरकार ने कानून में संशोधन को अधिसूचना जारी कर 1 मार्च 1991 से लागू कर दिया था।
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हाईकोर्ट के अधिवक्ता व आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत कुमार ने दो वर्ष पूर्व सितंबर 2019 में दलबदलू विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बावजूद पेंशन मिलने के लिए योग्य बनाने संबंधी कानूनी संशोधन की जानकारी मांगी थी। मुख्य सचिव कार्यालय की राजनीतिक शाखा में दायर आरटीआई का अक्तूबर 2019 में शाखा के उप सचिव ने जवाब दिया कि बहुत प्रयासों के बावजूद संबंधित फाइल नहीं मिल पाई। यह भी लिखा गया कि इस संबंध में सचिवालय की सभी शाखाओं से उक्त फाइल को अपने अपने स्तर पर ढूंढने और रिपोर्ट करने को भी लिखा जाएगा। जल्द ही आवेदनकर्ता को आगामी जानकारी दे दी जाएगी।
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बहरहाल, इस वर्ष अगस्त माह में दोबारा आरटीआई दायर की गई थी, जिसके जवाब में बताया गया है कि फाइल नहीं मिल पा रही। इस मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने के लिए अपील दायर की गई है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
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अयोग्य विधायकों को कानून के अनुसार ही पेंशन दी जा रही है, यह बात स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता साफ कर चुके हैं। हरियाणा विधानसभा सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी वर्ष 1975 के कानून के प्रावधान में संशोधन कर यह संभव बनाया जा चुका है। मार्च 2007 में तत्कालीन हुड्डा सरकार ने विधानसभा से इस कानून की धारा 7भन (1भन) में संशोधन कर यह प्रावधान किया है। केवल लोक प्रतिनिधित्व कानून,1951 की उपयुक्त धाराओं के अंतर्गत अयोग्य होने पर ही विधायक पेंशन लेने का हकदार नहीं होगा। इस संशोधन से दलबदल कानून में अयोग्य होने पर भी विधायकों को पेंशन नहीं मिलती थी। हुड्डा सरकार ने कानून में संशोधन को अधिसूचना जारी कर 1 मार्च 1991 से लागू कर दिया था।