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एफडीए की कार्रवाई : फार्मेसी और नर्सिंग होम में एकसाथ मारे छापे
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पंचकूला। खाद्य औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) की टीमों ने शुक्रवार को पंचकूला में बिना लाइसेंस के चलाई जा रही विभिन्न फार्मेसी की दुकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। टीम ने कई जगह सैंपल भी भरे हैं। टीमों ने विभिन्न नर्सिंग होम में एक साथ छापा मारा। इसके तहत सेक्टर -10 के प्लॉट नंबर 209 में दृष्टि आई अस्पताल, सेक्टर-10 में मकान नंबर 859 में स्किना केयर, सेक्टर- 12 में चल रहे नशा मुक्ति केंद्र और पीस माइंड क्लीनिक एससीओ-137 सेक्टर -14 पंचकूला शामिल हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनिल विज ने बताया कि स्किना केयर और दृष्टि आई अस्पताल में काउंटर से दवाइयां बेची जा रही थीं। इन दोनों दुकानों के पास कोई लाइसेंस नहीं पाया गया। दृष्टि अस्पताल में चलाई जा रही विजन फार्मेसी को लाइसेंस सेक्टर -11 मार्केट में एससीओ-26 में दिया हुआ है, परंतु वहां पर कोई दवाई रखी नहीं मिली। इसके स्थान पर दवाइयां बिना लाइसेंस के पहले स्थान पर दृष्टि आई अस्पताल में रखी मिली जिन्हें विभाग ने अपने कब्जे में लेकर नमूने भरे हैं।
इसी प्रकार, स्किना केयर को डॉ. राजन गुप्ता चलाते हैं। वहां मौजूद दवाइयों में से 12 तरह की दवाइयों के नमूने जांच के लिए भरे गए। दोनों जगह से टीमों ने रिकॉर्ड खंगाला और जांच के लिए कब्जे में लिया। पीस माइंड क्लीनिक से पांच नमूने जांच के लिए भरे गए और यहां पर डॉक्टर अपने चेंबर में डिस्पेंसरिंग करता मिला, जबकि यह कामर्शियल साइट है।
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इन टीमों ने की कार्रवाई
इस अभियान के लिए विभाग के आयुक्त ने चार टीमों का गठन किया था। इसमें खाद्य औषधि प्रशासन विभाग के मुख्यालय से डिप्टी ड्रग कंट्रोलर पदम सिंह राठी, सहायक ड्रग कंट्रोलर ललित गोयल, रिपन मेहता और परविंदर सिंह के अलावा एसडीपीओ अंबाला सुनील दहिया, एसडीपीओ कुरुक्षेत्र सारिका, अंबाला के डीसीओ रजनीश, कुरुक्षेत्र की डीसीओ विजय राजे और पंचकूला के डीसीओ प्रवीण कुमार को शामिल किया गया।
यह है नियम
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम व क्लीनिकों की अनापत्ति (एनओसी) जारी कर यह शर्त लगाता है कि इन नर्सिंग होम या क्लीनिक में केमिस्ट शॉप नहीं खोली जा सकती। एचएसवीपी के नियमों के अनुसार यदि एनओसी की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है तो प्लॉट को रिज्यूम किया जा सकता है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन हरियाणा अपनी रिपोर्ट एचएसवीपी के उच्चाधिकारियों को भेजेगा।
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनिल विज ने बताया कि स्किना केयर और दृष्टि आई अस्पताल में काउंटर से दवाइयां बेची जा रही थीं। इन दोनों दुकानों के पास कोई लाइसेंस नहीं पाया गया। दृष्टि अस्पताल में चलाई जा रही विजन फार्मेसी को लाइसेंस सेक्टर -11 मार्केट में एससीओ-26 में दिया हुआ है, परंतु वहां पर कोई दवाई रखी नहीं मिली। इसके स्थान पर दवाइयां बिना लाइसेंस के पहले स्थान पर दृष्टि आई अस्पताल में रखी मिली जिन्हें विभाग ने अपने कब्जे में लेकर नमूने भरे हैं।
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इसी प्रकार, स्किना केयर को डॉ. राजन गुप्ता चलाते हैं। वहां मौजूद दवाइयों में से 12 तरह की दवाइयों के नमूने जांच के लिए भरे गए। दोनों जगह से टीमों ने रिकॉर्ड खंगाला और जांच के लिए कब्जे में लिया। पीस माइंड क्लीनिक से पांच नमूने जांच के लिए भरे गए और यहां पर डॉक्टर अपने चेंबर में डिस्पेंसरिंग करता मिला, जबकि यह कामर्शियल साइट है।
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इन टीमों ने की कार्रवाई
इस अभियान के लिए विभाग के आयुक्त ने चार टीमों का गठन किया था। इसमें खाद्य औषधि प्रशासन विभाग के मुख्यालय से डिप्टी ड्रग कंट्रोलर पदम सिंह राठी, सहायक ड्रग कंट्रोलर ललित गोयल, रिपन मेहता और परविंदर सिंह के अलावा एसडीपीओ अंबाला सुनील दहिया, एसडीपीओ कुरुक्षेत्र सारिका, अंबाला के डीसीओ रजनीश, कुरुक्षेत्र की डीसीओ विजय राजे और पंचकूला के डीसीओ प्रवीण कुमार को शामिल किया गया।
यह है नियम
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के रिहायशी इलाकों में नर्सिंग होम व क्लीनिकों की अनापत्ति (एनओसी) जारी कर यह शर्त लगाता है कि इन नर्सिंग होम या क्लीनिक में केमिस्ट शॉप नहीं खोली जा सकती। एचएसवीपी के नियमों के अनुसार यदि एनओसी की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है तो प्लॉट को रिज्यूम किया जा सकता है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन हरियाणा अपनी रिपोर्ट एचएसवीपी के उच्चाधिकारियों को भेजेगा।