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डीएपी के बाद यूरिया की किल्लत झेल रहे किसान, सरकार जिम्मेदार : हुड्डा
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चंडीगढ़। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है डीएपी के बाद अब किसानों को यूरिया के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यूरिया के लिए लंबी-लंबी कतारों में लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं। पहले डीएपी के लिए परेशान हुए, अब यूरिया के लिए कतारों में खड़ा कर दिया गया। खाद की किल्लत से कालाबाजारी को बढ़ावा मिलने पर किसानों को महंगे रेट पर खाद खरीदनी पड़ती है।
हुड्डा ने कहा कि पिछले 4-5 दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण सरसों, गोभी, आलू और अन्य सब्जियों को काफी नुकसान पहुंचा है। सरकार को फौरन गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। पिछले साल अक्तूबर-नवंबर में भी बारिश की वजह से 5.50 लाख एकड़ से ज्यादा भूमि पर खड़ी फसल बर्बाद हो गई थी। एक लाख से ज्यादा किसानों ने नुकसान के मुआवजे को लेकर सरकार के सामने गुहार लगाई, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला है। इसलिए सरकार को इस बार के खराबे और पिछली बार के नुकसान की भरपाई जल्द करनी चाहिए।
सरकार की तरफ से अनाज मंडियों में काम करने वाले मजदूरों की खरीफ सीजन की मजदूरी भी अब तक नहीं दी गई। आढ़तियों के कमीशन और मजदूरों की मजदूरी की यह बकाया धनराशि लगभग एक हजार करोड़ बनती है। सरकार इसका फौरन भुगतान करे।
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हुड्डा ने कहा कि पिछले 4-5 दिन से लगातार हो रही बारिश के कारण सरसों, गोभी, आलू और अन्य सब्जियों को काफी नुकसान पहुंचा है। सरकार को फौरन गिरदावरी करवाकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। पिछले साल अक्तूबर-नवंबर में भी बारिश की वजह से 5.50 लाख एकड़ से ज्यादा भूमि पर खड़ी फसल बर्बाद हो गई थी। एक लाख से ज्यादा किसानों ने नुकसान के मुआवजे को लेकर सरकार के सामने गुहार लगाई, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला है। इसलिए सरकार को इस बार के खराबे और पिछली बार के नुकसान की भरपाई जल्द करनी चाहिए।
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सरकार की तरफ से अनाज मंडियों में काम करने वाले मजदूरों की खरीफ सीजन की मजदूरी भी अब तक नहीं दी गई। आढ़तियों के कमीशन और मजदूरों की मजदूरी की यह बकाया धनराशि लगभग एक हजार करोड़ बनती है। सरकार इसका फौरन भुगतान करे।
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