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Panchkula News: किसान जत्थेबंदियों ने लगाई अपनी मॉक विधानसभा, सात प्रस्ताव किए पास
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चंडीगढ़। आजाद किसान मोर्चा पंजाब ने सोमवार को सेक्टर-44 में अपनी मॉक विधानसभा आयोजित की। यह विधानसभा पंजाब विधानसभा से आठ किलोमीटर दूर लगाई गई थी। इसमें किसानों ने अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और पक्ष व विपक्ष के नेताओं की भूमिका निभाई।
इस दौरान किसानों ने सात महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें एमएसपी की कानूनी गारंटी और फसल के नुकसान पर मुआवजा देना शामिल था। किसानों पर लाठीचार्ज बंद करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। राज्य सरकार से इन प्रस्तावों पर कार्य योजना जारी करने की मांग की गई।
किसान विधानसभा में 16 किसान संगठनों ने भाग लिया। नेताओं ने कहा कि पंजाब के किसान राज्य की अर्थव्यवस्था और देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। हालांकि, उनसे जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों का अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। भारतीय किसान यूनियन तोतेवाल के सुख गिल मोगा और भारतीय किसान-मजदूर यूनियन मझैल के सतनाम सिंह संधू हरिके जैसे नेता उपस्थित थे।
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प्रमुख मांगें :
किसान विधानसभा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार से एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने की मांग की। उन्होंने संघर्षरत किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और गिरफ्तारियों की निंदा की। इन कार्रवाइयों को तुरंत बंद करने की मांग भी की गई। खन्ना में मनरेगा श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की भी निंदा हुई। किसानों ने ई20 नीति के कृषि, फसलों की मांग और किसानों की आय पर पड़ने वाले प्रभावों का गंभीरता से अध्ययन करने को कहा।
अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव :
बाढ़, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान पर समय पर मुआवजा मांगा गया। किसान संगठनों के साथ नियमित संवाद के लिए एक स्थायी तंत्र बनाने की मांग हुई। नशे की आपूर्ति, तस्करी और अवैध कारोबार रोकने के लिए प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की बात कही गई। बेअदबी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी प्रबंध मांगे गए। इस विधानसभा में आजाद किसान मोर्चा पंजाब मंच से संबंधित नौ प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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इस दौरान किसानों ने सात महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें एमएसपी की कानूनी गारंटी और फसल के नुकसान पर मुआवजा देना शामिल था। किसानों पर लाठीचार्ज बंद करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। राज्य सरकार से इन प्रस्तावों पर कार्य योजना जारी करने की मांग की गई।
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किसान विधानसभा में 16 किसान संगठनों ने भाग लिया। नेताओं ने कहा कि पंजाब के किसान राज्य की अर्थव्यवस्था और देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। हालांकि, उनसे जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों का अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। भारतीय किसान यूनियन तोतेवाल के सुख गिल मोगा और भारतीय किसान-मजदूर यूनियन मझैल के सतनाम सिंह संधू हरिके जैसे नेता उपस्थित थे।
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प्रमुख मांगें :
किसान विधानसभा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार से एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने की मांग की। उन्होंने संघर्षरत किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और गिरफ्तारियों की निंदा की। इन कार्रवाइयों को तुरंत बंद करने की मांग भी की गई। खन्ना में मनरेगा श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की भी निंदा हुई। किसानों ने ई20 नीति के कृषि, फसलों की मांग और किसानों की आय पर पड़ने वाले प्रभावों का गंभीरता से अध्ययन करने को कहा।
अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव :
बाढ़, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान पर समय पर मुआवजा मांगा गया। किसान संगठनों के साथ नियमित संवाद के लिए एक स्थायी तंत्र बनाने की मांग हुई। नशे की आपूर्ति, तस्करी और अवैध कारोबार रोकने के लिए प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की बात कही गई। बेअदबी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी प्रबंध मांगे गए। इस विधानसभा में आजाद किसान मोर्चा पंजाब मंच से संबंधित नौ प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।