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बातें 5जी की, हकीकत उपभोक्ता 2जी पर बातें करने को तरस रहे।

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 30 Jul 2022 01:09 AM IST
Far from running internet, waiting for rural mobile network in two panchayats of the block
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मोरनी। एक और देश में 5जी को लेकर तैयारियां जोरों शोरों से चल रही हैं और देश के लोगों को कैशलेस योजना के बारे में बताकर आधुनिकीकरण के सपने दिखाए जा रहे हैं। वहीं, हरियाणा की राजधानी का हिस्सा कहे जाने वाले जिले में हालात इन दावों से कोसों दूर हैं। जिले के अंतर्गत पड़ने वाले पहाड़ी क्षेत्र की दुर्गम और पिछड़ी दो पंचायतों बालदवाला और ठाठर के हजारों ग्रामीण इन दावों से दूर आज भी अपने क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क को तरस रहे हैं। इन दोनों पंचायतों में ग्रामीण इंटरनेट चलाना तो दूर फोन पर बात भी नहीं कर पाते हैं। इस कारण कहीं दूर जाकर जहां किसी टावर की रैंज आती है वहां से अपनों से संपर्क साधना पड़ता है। ऐसे में अगर आपातकालीन स्थिति में किसी सहायता की जरूरत पड़ जाए तो मोबाइल सहायता नहीं मांगी जा सकती। राज्य की सरकारों में अपने क्षेत्र की अनदेखी के कारण ग्रामीणों में भारी रोष है, क्योंकि बच्चों को पढ़ाई के दौरान इंटरनेट भी उपलब्ध नहीं हो पाता है। उन्होंने आरोप लगाया है कि हर सरकार में उनके इलाके के विकास को लेकर दावे तो विकास के किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत पर उतना कुछ दिखाई नहीं देता।

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान मोबाइल नेटवर्क की कमी उस समय बहुत ज्यादा खलती है, जब उनको किसी डॉक्टर से बात करनी हो या इमरजेंसी में अस्पताल जाने के लिए किसी एंबुलेंस को बुलाना हो। ऐसे में उनके पारिवारिक सदस्यों को दूर टावर की रैंज में जाकर बात करनी पड़ती है। सरकार ने गर्भवती महिलाओें को इलाज के लिए एक कॉल पर एंबुलेंस की सुविधा तो मुहैया करवा दी लेकिन जब यहां मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है तो वह इस सुविधा का लाभ कैसे ले पाएंगे।

जल्द करना चाहिए समस्या का समाधान
मोबाइल नेटवर्क की इस समस्या पर इलाके का कोई नेता या प्रशासनिक अधिकारी कभी कोई चर्चा नहीं करता। इस समस्या का हल करने के लिए सरकार को गंभीरता से कदम उठाना चाहिए और ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द करना चाहिए, जिससे आम लोगों को और पढ़ाई करने वाले बच्चों को इसका लाभ मिले। -रणबीर सिंह, गांव जोली।
नहीं मिल रहा सोशल मीडिया का लाभ
आईटी सिटी चंडीगढ़ से केवल 35 से 40 किलोमीटर दूरी पर मोरनी और आसपास के गांव के लोग मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। हिमाचल राज्य की सीमा में लगे मोबाइल टावरों की मामूली सी रैंज से यहां के लोगों को काम चलाना पड़ रहा है। अन्य जगह लोग सोशल मीडिया पर अपना बिजनेस बढ़ाकर लाभ ले रहे हैं, जबकि यहां फोन पर बात करने से पहले सोचना पड़ता है। -चमन सिंह, भौज राजपुरा
बच्चों के कंप्यूटर बने शोपीस
गांव में इंटरनेट नहीं होने के कारण अपने कामों को ऑनलाइन पूरा नहीं कर पाते हैं। नेट से संबंधित छोटे-छोटे कामों को पूरा करने के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बच्चों के लिए घरों में रखे गए कंप्यूटर शोपीस बनकर रह गए हैं। जिससे वह स्कूल और नौकरियों को लेकर होने वाले कंपीटिशनों में पिछड़ रहे हैं। राजनेताओं और दूर संचार विभाग को इस समस्या को गंभीरता से लेकर हल करवाना चाहिए। -बिट्टू शर्मा, गांव कुदाना
समय तय कर दूर जाकर करते हैं बात
दोनों पंचायतों बालदवाला और ठाठर में 30 गांव आते हैं। इन गांवों में करीब 3000 की आबादी है। मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति नेटवर्क की समस्या के कारण बाहरी व्यक्ति को फोन करने का समय देता है, ताकि वह दिए गए समय पर मोबाइल नेटवर्क की रैंज खोजकर बात कर सके। सरकार जल्द इस समस्या का समाधान करवाए और टावर लगवाकर ग्रामीणों की परेशानी का हल करे। -जय सिंह बाडीवाला, सदस्य, पूर्व जिला परिषद।

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