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रोजगार धोखाधड़ी से जनता के लिए पनप रहा गंभीर खतरा: हाईकोर्ट

Fri, 26 Sep 2025 04:05 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Sep 2025 04:05 AM IST
सार

चंडीगढ़ में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कमजोर युवाओं को सरकारी नौकरी का झूठा वादा कर ठगने के मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए कड़ी न्यायिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता बताई।

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Employment fraud poses grave threat to public: High Court

विस्तार

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्यों में ऐसे मामलों को गंभीर अपराध माना है जिनमें कमजोर व्यक्तियों को सरकारी नौकरियों का झूठा वादा करके और आर्थिक लाभ के लिए उनका शोषण करके ठगा जाता है। व्यापक सामाजिक हितों का उल्लेख करते हुए जस्टिस सुमीत गोयल ने स्पष्ट किया कि मुकदमे से पहले की गई उदारता ऐसी आपराधिक योजनाओं को बढ़ावा नहीं दे सकती।
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ऐसे मामले जिनमें कमजोर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने के झूठे वादे करके बहकाया जाता है और बाद में उनका शोषण किया जाता है, प्रलोभन और धोखाधड़ी के दायरे में आते हैं और सख्त न्यायिक जांच और रोकथाम के पात्र हैं। पीठ ने कहा कि अदालतों को सतर्क रहना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुकदमे से पहले की नरमी से ऐसे गिरोह को बढ़ावा न मिले।
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जस्टिस गोयल ने कहा कि अदालत रोजगार हासिल करने और इसके लिए भारी-भरकम रकम देने के लिए प्रेरित किए जाने के मामलों में व्यापक जनहित को नजरअंदाज नहीं कर सकती। ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक मजबूत और सैद्धांतिक न्यायिक प्रतिक्रिया जरूरी है। अमृतसर में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता ने अन्य लोगों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता को उसके बेटे की नौकरी दिलाने के लिए मोटी रकम देने के लिए उकसाया।
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जांच से पता चला कि याचिकाकर्ता ने एक मेडिकल जांच की व्यवस्था की, एक वर्दी और एक पहचान पत्र जारी किया। ये सभी कार्य प्रथम दृष्टया तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और धोखाधड़ी करने के जानबूझकर किए गए प्रयास की ओर इशारा करते हैं।

अग्रिम जमानत की सुनवाई के सीमित दायरे की ओर इशारा करते हुए जस्टिस गोयल ने जोर देकर कहा कि अग्रिम जमानत की याचिका पर विचार करते समय, अदालत को सबूतों की गहन जांच करने की जरूरत नहीं है, बल्कि केवल यह आकलन करना होता है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने फैसला सुनाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह माना जा सके कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। रिकॉर्ड में मौजूद सबूत और प्रारंभिक जांच, आरोपों का उचित आधार स्थापित करते प्रतीत हुए। इसलिए याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं है क्योंकि इससे प्रभावी जांच में बाधा उत्पन्न होगी।
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