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शिक्षा का हाल : दो कमरों में लगती हैं पांच कक्षाएं

Fri, 15 Apr 2022 01:09 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 15 Apr 2022 01:09 AM IST
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Education status: Five classes are held in two rooms
पंचकूला। जिले में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली देखनी है तो माजरी स्कूल में चले आइए। यहां देश की आजादी से पहले बना प्राथमिक सरकारी स्कूल मात्र दो कमरों में चल रहा है, जिसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के 250 विद्यार्थी बैठते हैं। यहां शिक्षण व्यवस्था का हाल बदहाल है। दो कमरों में पांच-पांच कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर शिक्षण कार्य करवाया जा रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चे कैसे पढ़ाई कर रहे हैं। जब बच्चों की संख्या ज्यादा हो जाती है तो दो कक्षाएं पास की धर्मशाला में लगाई जाती हैं।
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1945 में बना था, स्कूल
माजरी का प्राथमिक स्कूल देश की आजादी के पहले 1945 में बनाया गया था। यह पंचकूला का सबसे पुराना स्कूूल है। अगर स्कूल में कमरों की संख्या बढ़ाई जाए तो यहां 300 से 400 विद्यार्थियों की संख्या हो सकती है, लेकिन स्कूल में कमरों की कमी के चलते मजबूरन माजरी के लोगों को दूसरे स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने के लिए हाईवे पार भेजना पड़ता है। इससे यहां कई बार सड़क हादसा भी हो चुका है। इस स्कूल के हालात ऐसे बन गए हैं कि एक साथ पंजीकृत पूरे विद्यार्थियों के स्कूल पहुंचे पर एक दो कक्षाएं पास के धर्मशाला में लगानी पड़ती हैं। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि यहां की स्थिति के बारे में बड़े अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है, जिससे कि व्यवस्थाओं में सुधार हो सके।
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फर्श में बैठते हैं बच्चे
स्कूल के दोनों कमरे इतने छोटे हैं कि अगर बच्चों के बैठने के लिए यहां सात से दस टेबल और कुर्सियों को रखवा दिया जाए तो कमरे में पैर रखने की भी जगह नहीं बचेगी। ऐसे में स्कूल की एक कक्षा में महज 15-20 विद्यार्थी ही बैठ पाएंगे। दोनों कमरों में टेबल और कुर्सियों के साथ महज 30 से 40 बच्चों को ही बैठाया जा सकता है। विद्यालय में कोई फर्नीचर नहीं लगवाया गया है, बच्चे अभी दरी पर ही बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। सर्दी और बरसात में स्थिति बदतर हो जाती है।
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माजरी गांव स्थित स्कूल की बिल्डिंग में दो कमरे हैं। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यहां कमरों की संख्या बढ़ाने के लिए डीईईओ से बात कर शिक्षा विभाग को पत्र लिखा जाएगा, ताकि यहां के स्थानीय बच्चों को शिक्षा हासिल करने में कोई परेशानी न हो। वहीं कमरों के साथ-साथ बच्चों को बैठने के लिए उचित व्यवस्था भी करवाई जाएगी। - उर्मिला देवी, जिला शिक्षा अधिकारी पंचकूला।
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