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अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की सदन में गूंज

Wed, 16 Mar 2022 10:28 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 10:28 PM IST
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Echoes of corruption allegations against officials in the House
चंडीगढ़। बजट सत्र के दौरान मंगलवार को भ्रष्टाचार का मुद्दा सदन में गूंजा। कांग्रेसी विधायकों ने अधिकारियों के नाम लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने टाउन प्लानिंग विभाग के एक आला अधिकारी और लाडवा के विधायक मेवा सिंह ने कुरुक्षेत्र जिले में तैनात एक एचसीएस पर आरोप लगाए।
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वत्स ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को 56 अधिकारियों की लिस्ट भी सौंपी है। विधायक का आरोप है कि ये अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इनमें प्रदेश के कई जिले के आला अधिकारियों के साथ-साथ डीटीपी, पीडब्ल्यूडी, एक्साइज, नगर निकाय और तहसीलों से संबंधित अधिकारी हैं। विधायक ने दावा किया कि अगर ये अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त न पाए गए तो वह राजनीति छोड़ देंगे। विपक्षी दलों के विधायकों से मामले की सीबीआई से जांच की मांग की, जिसे मुख्यमंत्री ने ठुकरा दिया।
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सुशासन सहयोगियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप
सदन में सभी जिलों में लगाए गए सुशासन सहयोगियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। कांग्रेस विधायक रघुबीर कादियान ने 22 जिलों में तैनात मुख्यमंत्री सुसाशन सहगियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। कादियान ने सीएम से मांग की कि इनकी जांच कराई जाए, सब कुछ सामने आ जाएगा। वहीं, गीता भुक्कल ने मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगियों के रखने पर सवाल उठाए। गीता भुक्कल ने कहा कि यूपीएससी पास अधिकारियों पर निगरानी के लिए ये कौन से नियम के तहत लगाए गए हैं। भुक्कल ने आरोप लगाया कि सुशासन सहयोगियों के नाम पर संघ के लोगों को इसमें सेट किया गया है।
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मुख्यमंत्री किसी को भी रख सकता है सलाहकार : मनोहर
सदन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया। मनोहर लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री किसी को भी अपना सलाहकार रख सकता है। दूसरा व्यक्ति तय नहीं कर सकता कि किसको सलाहकार लगाया जाए और किसको नहीं। सुशासन सहयोगियों के नाम के आगे मुख्यमंत्री लिखा है। वह किसी सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है और न ही राज्य सरकार के मद से उनको वेतन दिया जाता है।
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