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नियमों की अवहेलना कर बनाया जा रहा झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड, शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष ने जताई आपत्ति, मुख्यमंत्री ने नियमों को ताक पर रखकर दिए आदेश

Tue, 08 Jun 2021 01:54 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 08 Jun 2021 01:54 AM IST
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Dumping ground in Jhuriwala being built in disregard to the rules, the president of Shivalik Vikas Manch raised objection, the Chief Minister gave orders by ignoring the rules
पंचकूला। आबादी से पांच सौ मीटर की दूरी पर झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड बनाना नियमों की अवहेलना और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नियमों को ताक पर रखकर झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने का आदेश दिया है। इस पर शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस फैसले को जनहित के विपरीत करार दिया है।
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झूरीवाला में डंपिंग ग्राउंड के बनने से स्थानीय लोगों को परेशानी होगी और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचेगा। शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष विजय बंसल का कहना है कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो वे हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे। क्योंकि वह 2011 में भी हाईकोर्ट में पंचकूला के सेक्टर-23 स्थित डंपिंग ग्राउंड को शहर से बाहर पंजाब बॉर्डर के नजदीक गांव भानू में शिफ्ट करने के लिए जनहित याचिका (16951/2011) दायर की थी। 2010 में इस डंपिंग ग्राउंड को पंजाब बॉर्डर पर शिफ्ट करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा था। इसमें कहा था कि सेक्टर-23 में बने डंपिंग ग्राउंड से सेक्टर-23, 24, 25, 26, 27, 28 के निवासियों को बदबू का सामना करना होगा। एचएसवीपी की पंचकूला एक्सटेंशन के अंतर्गत बरवाला तक सेक्टर विकसित करने की योजना है।
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झूरीवाला के आसपास भी आबादी है। इसी के साथ झूरीवाला वन क्षेत्र में आता है, यहां भारतीय वन अधिनियम 1927, पीएलपीए 1900, वन संरक्षण एक्ट 1980 लागू है। झूरीवाला खोल ही रायतन वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी के अंतर्गत है। यह इको सेंसिटिव जोन में है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर 12 मार्च 2013 को आदेश पारित कर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) नई दिल्ली को स्थानांतरित कर कार्यवाही करने के आदेश दिए थे। अस्थाई डंपिंग ग्राउंड का 2 जज सहित कई सदस्यों ने निरीक्षण भी किया था। एनजीटी की टीम ने याचिकाकर्ता समेत सभी सदस्यों को सलाह देने के लिए बुलाया था।
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बंसल ने सुझाव देकर कहा था कि इस अस्थाई डंपिंग ग्राउंड से स्थानीय निवासियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बदबू व पर्यावरण प्रदूषण से बीमारियों का खतरा रहता है। इसे झूरीवाला में शिफ्ट किया जाएगा तो उसके आसपास भी आबादी है। टीम ने सुझावों पर सहमति जताई थी, लेकिन 2014 में भाजपा की सरकार आने के बाद शहरी स्थानीय निकाय विभाग व निगम के अफसरों ने डंपिंग ग्राउंड को झूरीवाला में लगाने का निर्णय लिया, जोकि जनहित में नहीं है।
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