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बद्दी की फैक्टरी में तैयार नशे की पंचकूला से पंजाब में सप्लाई, सीबीआई करे जांच: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। सात महीने में 20 करोड़ नशे की गोलियां तैयार करने, इन्हें पंचकूला के गोदाम में स्टोर करने के बाद पंजाब में वितरित करने के मामले को बेहद गंभीर मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्राथमिक जांच का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि सीबीआई को जांच के लिए मांगी गई मैनपावर व संसाधन उपलब्ध करवाए जाएं। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मोहाली के डीएसपी वीरेंद्र महाजन ने बताया कि वह पंजाब में नशे की सबसे अधिक मात्रा पकड़ने वाले पुलिस अधिकारी हैं। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने एक केस दर्ज किया था। इसके अनुसार बद्दी में मौजूद दो कंपनियों ने 7 माह में 20 करोड़ नशे की गोलियों का निर्माण किया था। फर्जी कागजातों के आधार पर इनकी सप्लाई महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में की गई थी।
याची ने बताया कि यह सप्लाई केवल कागजों में थी और असल में यह पंचकूला के गोदाम में भेजी गई थी। यहां से इसे पंजाब सप्लाई किया गया। हिमाचल के ड्रग कंट्रोलर को इसकी जानकारी दी गई, इसके बाद इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई है। याची ने बताया कि इस नशे की सप्लाई की चेन से एक व्यक्ति जुड़ा है जो सत्ता पक्ष के राजनीतिक मंचों पर दिखाई देता है। याची ने उसका नाम लिया तो उसका तबादला कर दिया गया और मोहाली में रिश्वत के झूठे केस में फंसा दिया गया। ड्रग के उस अहम केस की जांच किसी और अधिकारी को सौंपी दी गई है। हाईकोर्ट ने याची की दलीलें सुनने के बाद उसके खिलाफ जांच पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है और इसके तार कई राज्यों से जुड़े हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब पहले ही नशा करने वालों की बड़ी संख्या के लिए बहुत बदनाम है। इस मामले में बड़े स्तर पर अधिकारियों की संलिप्तता होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया ह।
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याची ने बताया कि यह सप्लाई केवल कागजों में थी और असल में यह पंचकूला के गोदाम में भेजी गई थी। यहां से इसे पंजाब सप्लाई किया गया। हिमाचल के ड्रग कंट्रोलर को इसकी जानकारी दी गई, इसके बाद इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई है। याची ने बताया कि इस नशे की सप्लाई की चेन से एक व्यक्ति जुड़ा है जो सत्ता पक्ष के राजनीतिक मंचों पर दिखाई देता है। याची ने उसका नाम लिया तो उसका तबादला कर दिया गया और मोहाली में रिश्वत के झूठे केस में फंसा दिया गया। ड्रग के उस अहम केस की जांच किसी और अधिकारी को सौंपी दी गई है। हाईकोर्ट ने याची की दलीलें सुनने के बाद उसके खिलाफ जांच पर रोक लगा दी है।
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कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है और इसके तार कई राज्यों से जुड़े हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब पहले ही नशा करने वालों की बड़ी संख्या के लिए बहुत बदनाम है। इस मामले में बड़े स्तर पर अधिकारियों की संलिप्तता होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया ह।
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