Doctors Day: कोरोना में खुद बीमार और संक्रमित रहकर भी निभाया अपना फर्ज, ये हैं धरती के भगवान
शुगर, अस्थमा व थायराइड बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी डॉ. शालिनी शर्मा ने लगातार दो सालों तक कोविड वार्ड और फ्लू ओपीडी में संक्रमित मरीजों का उपचार किया।
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सफेद कोट पहने और गले में आला डाले डॉक्टरों को यू हीं धरती का भगवान नहीं कहा जाता है। कोरोना काल में चिकित्सकों ने खुद संक्रमित होने के बावजूद अपना फर्ज निभाया। कुछ ने संक्रमण काल में फोन से तो किसी ने बीमार होने के बाद भी कोविड वार्ड और फ्लू ओपीडी में मरीजों का उपचार किया। चिकित्सकों के अपना फर्ज बेहतर ढंग से निभाने के चलते कोरोना से जंग जीत ली। ऐसे ही डॉक्टरों की कहानी उनकी जुबानी...
संक्रमित होने के बाद भी वीडियो कॉल से मरीजों का उपचार किया
डॉ. एमपी शर्मा ने बताया कि वह जनवरी 2021 में संक्रमित हुए थे। इस दौरान उन्होंने 50 से ज्यादा मरीजों का वीडियो कॉल से उपचार किया, और टेलीफोनिक मरीजों को दवाओं की जानकारी दी। एमपी शर्मा ने बताया कि एक समय तो ऐसा आ गया था, जब कोविड वार्ड में एक दिन रात में चार से पांच मरीजों की कोरोना से मौत हो गई। उस समय वार्ड में तैनात सभी स्वास्थ्य कर्मचारी घबरा गए थे। उस समय वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों और डॉक्टरों को जागरूक करने के साथ-साथ उनका हौसला बढ़ाया। वहीं कोरोना काल के दौरान संक्रमित मरीजों के घर जाकर उन्हें जागरूक किया और दवाएं भी दीं। इसके अलावा झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले प्रवासी मजदूरों को कोरोना के प्रति जागरूक किया।
बीमार होने के बाद भी लगातार दो साल कोरोना मरीजों का किया उपचार
शुगर, अस्थमा व थायराइड बीमारी से पीड़ित होने के बाद भी डॉ. शालिनी शर्मा ने लगातार दो सालों तक कोविड वार्ड और फ्लू ओपीडी में संक्रमित मरीजों का उपचार किया। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में मरीजों की मौत अपनी आंखों से लगातार देखने के बाद स्थिति बहुत भयावह हो जाती थी। उस समय कई बार हिम्मत जवाब दे गई, लेकिन भगवान का नाम लिया और अपनी जिम्मेदारियों को निभाती चली गईं। खुद बीमार होने के बाद भी परिवार को संभालने के साथ मरीजों का उपचार संभव नहीं था, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में मेरे पति ने साथ दिया। सब कुछ अच्छे तरीके से होता चला गया।
वैक्सीनेशन कर कोरोना को कंट्रोल करने के लिए काम किया
पंचकूला की तत्कालीन पीएमओ का पद संभाल चुकी डॉ. मनकीरत मुरारा कोरोना काल में संक्रमित हुईं। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह स्वस्थ होने के बाद भी लोगों के लिए काम करती रहीं। उन्होंने पंचकूला की विभिन्न एसोसिशन के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने बताया कि जब शेल्टर होम में कोरोना बढ़ने के बाद उनको आइसोलेशन वार्ड में तैनात किया गया तो वहां पर रहने वाले लोगों की देखभाल सही तरीके से की। इसके लिए वह विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही थीं। उन्होंने बताया कि शेल्टर होम में रहने वाले लोगों के लिए कई म्यूजिकल ग्रुप के लोगों के साथ मिलकर मरीजों का उत्साह बढ़ाने के लिए भंगड़ा सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाया। इसके साथ ही उन्हें अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कोरोना काल के दौरान आइसोलेशन इंचार्ज से लेकर नोडल ऑफिसर पद पर काम करते लोगों का जीवन बचाया। वर्तमान में वे बच्चों की ओपीडी में रोजाना 60 से 70 बच्चों को देखती हैं। कोविड के दौरान गायिनी, डेंटल, किडनी और स्किन डिजिज पर कई वेबिनारों का आयोजन भी कराया।
वैक्सीनेशन की बढ़ाई रफ्तार
वैक्सीनेशन इंचार्ज डॉ. मीनू सासन ने बताया कि कोरोना को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने संस्थाओं और लोगों के साथ मिलकर वैक्सीनेशन का काम किया है। अपनी टीम के साथ मिलकर पंचकूला के छह लाख लोगों का वैक्सीनेशन करवाया है। वैक्सीनेशन करवाने के बाद कोरोना की रफ्तार धीमी हो गई है। कोरोना की शुरुआत में उन्होंने लोगों को अस्पताल लाने वाली टीम का उत्साह बढ़ाया। वहीं आइसोलेशन वार्ड के इंचार्ज का जिम्मा भी उन्होंने संभाला है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों को कोरोना से बचाने के साथ ही हमेशा मरीजों की सेवा के लिए कई काम किए हैं। उन्होंने बताया कि वालंटियर के साथ सभी ने मिलकर काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने शहर के सेक्टर-7 सहित विभिन्न डिस्पेंसरी में भी काम किया है। उन्होंने बताया कि कोरोना के दौरान अपनी इम्युनिटी का भी ध्यान रखा। लोग अपनी इम्युनिटी को ठीक रखें तो कोरोना सहित अन्य बीमारियों से दूर रहेंगे।