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जिला परिषद चुनाव: सत्ताधारी दल पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप, सीएपीएफ की तैनाती की मांग
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चंडीगढ़। पटियाला में जिला परिषद चुनाव में विपक्षी दलों और खास तौर पर शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोकने के लिए सत्ताधारी दल पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में निष्पक्ष चुनाव के लिए सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) की तैनाती की मांग की गई है।
हाईकोर्ट ने अब इस मामले में याची पक्ष द्वारा राज्य चुनाव आयोग को सौंपी गई शिकायत की प्रति ऑन रिकॉर्ड लाने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए पूर्व मंत्री व वरिष्ठ अकाली नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पटियाला जिला परिषद चुनाव हॉट स्पॉट है। यहां पर अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सत्ताधारी दल पब्लिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा है।
याची ने बताया कि बीते दिन ही एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि विपक्ष के उम्मीदवारों को नॉमिनेशन दाखिल करने से रोका जाए। उन्हें या तो उनके घर में या रास्ते में रोक दिया जाए। यदि वे किसी प्रकार रिटर्निंग अधिकारी के पास पहुंच भी जाते हैं तो उनका नामांकन रद्द किया जाए। याची ने कहा कि कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ जाकर काम किया जा रहा है।
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हाईकोर्ट ने इस पर पूछा कि क्या राज्य चुनाव आयोग को शिकायत दी गई है, याची पक्ष ने कहा कि याचिका की कॉपी चुनाव आयोग को भेजी गई है। याची ने कहा कि ऑडियो की जांच करवाई जाए कि यह सच है या फर्जी है। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि क्या आपको राज्य चुनाव आयोग में विश्वास है, यदि है तो उनका पक्ष जरूरी है।
पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची पूर्व मंत्री हैं और यह मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। ऐसे में यह पीआईएल मान्य नहीं है। एडवोकेट जनरल की ओर से याचिका की वैधता पर सवाल उठाने पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर अगली सुनवाई पर बहस होगी।
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हाईकोर्ट ने अब इस मामले में याची पक्ष द्वारा राज्य चुनाव आयोग को सौंपी गई शिकायत की प्रति ऑन रिकॉर्ड लाने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए पूर्व मंत्री व वरिष्ठ अकाली नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि पटियाला जिला परिषद चुनाव हॉट स्पॉट है। यहां पर अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए सत्ताधारी दल पब्लिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा है।
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याची ने बताया कि बीते दिन ही एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि विपक्ष के उम्मीदवारों को नॉमिनेशन दाखिल करने से रोका जाए। उन्हें या तो उनके घर में या रास्ते में रोक दिया जाए। यदि वे किसी प्रकार रिटर्निंग अधिकारी के पास पहुंच भी जाते हैं तो उनका नामांकन रद्द किया जाए। याची ने कहा कि कोड ऑफ कंडक्ट के खिलाफ जाकर काम किया जा रहा है।
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हाईकोर्ट ने इस पर पूछा कि क्या राज्य चुनाव आयोग को शिकायत दी गई है, याची पक्ष ने कहा कि याचिका की कॉपी चुनाव आयोग को भेजी गई है। याची ने कहा कि ऑडियो की जांच करवाई जाए कि यह सच है या फर्जी है। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि क्या आपको राज्य चुनाव आयोग में विश्वास है, यदि है तो उनका पक्ष जरूरी है।
पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची पूर्व मंत्री हैं और यह मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। ऐसे में यह पीआईएल मान्य नहीं है। एडवोकेट जनरल की ओर से याचिका की वैधता पर सवाल उठाने पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर अगली सुनवाई पर बहस होगी।