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Panchkula News: जिला उपभोक्ता निवारण आयोग ने दिया खराब दरवाजे बदलने के आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। ग्राहक के घर खराब दरवाजे लगाने पर उपभोक्ता आयोग ने टाटा स्टील्स कंपनी को दरवाजे बदलने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कंपनी पर 15 हजार रुपये हर्जाना भी लगाया है। ग्राहक को मानसिक और अदालती खर्चे के रूप में साढ़े सात हजार रुपये देने का आदेश भी दिया है। सेक्टर-28 में रहने वाले राजेश शर्मा ने उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया था कि उन्होंने अपने घर के लिए नए दरवाजे लेने थे।
औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित अमर स्टील्स ने उनको सलाह दी कि लकड़ी के दरवाजों की जगह लोहे के दरवाजे लगाएं। उन्होंने टाटा स्टील्स कंपनी का ब्रॉशर देख चार लाख रुपये के दरवाजे पसंद किए। कंपनी की तरफ से टेक्निकल टीम उनके घर आई और दरवाजों की पैमाइश की। ग्राहक ने 29 नवंबर 2016 को 14 दरवाजों की 25 प्रतिशत पेमेंट एक लाख रुपये एडवांस में कंपनी को चेक के जरिए कर दी। 14 दरवाजों में से पांच दरवाजे कंपनी के पास नहीं थे। अमर स्टील्स ने उन्हें ब्रॉशर दिखाकर अलग दरवाजे पसंद करने के लिए कहा। ग्राहक ने ब्रॉशर में पांच अलग दरवाजे पसंद किए।
ग्राहक को छह महीने बाद 24 मई 2017 को दरवाजे डिलीवर हो गए। दरवाजों की डिलीवरी से पहले ग्राहक ने अमर स्टील्स को दो लाख रुपये ऑनलाइन पेमेंट की थी। तीन लाख रुपये देने के बाद भी ग्राहक के घर दरवाजे लगाने के लिए कंपनी की तरफ से कोई नहीं आया। ग्राहक ने इसकी शिकायत कंपनी से की। कंपनी की तरफ से दरवाजे इंस्टॉल करने के लिए मैकेनिक उनके घर आया। ग्राहक ने देखा कि दरवाजों में बाहर से लॉक नहीं दिया गया था। दरवाजों की फ्रेम में गेप था।
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बाथरूम के दरवाजे में स्क्रैच थे। ग्राहक ने इसकी शिकायत उपभोक्ता आयोग को दी थी। आयोग ने उपभोक्ता की शिकायत को सही मानकर दरवाजे बदलने का आदेश दिया है। ग्राहक ने शिकायत में औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित अमर स्टील्स और टाटा स्टील्स लिमिटेड को पार्टी बनाया था।
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पंचकूला। ग्राहक के घर खराब दरवाजे लगाने पर उपभोक्ता आयोग ने टाटा स्टील्स कंपनी को दरवाजे बदलने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कंपनी पर 15 हजार रुपये हर्जाना भी लगाया है। ग्राहक को मानसिक और अदालती खर्चे के रूप में साढ़े सात हजार रुपये देने का आदेश भी दिया है। सेक्टर-28 में रहने वाले राजेश शर्मा ने उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया था कि उन्होंने अपने घर के लिए नए दरवाजे लेने थे।
औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित अमर स्टील्स ने उनको सलाह दी कि लकड़ी के दरवाजों की जगह लोहे के दरवाजे लगाएं। उन्होंने टाटा स्टील्स कंपनी का ब्रॉशर देख चार लाख रुपये के दरवाजे पसंद किए। कंपनी की तरफ से टेक्निकल टीम उनके घर आई और दरवाजों की पैमाइश की। ग्राहक ने 29 नवंबर 2016 को 14 दरवाजों की 25 प्रतिशत पेमेंट एक लाख रुपये एडवांस में कंपनी को चेक के जरिए कर दी। 14 दरवाजों में से पांच दरवाजे कंपनी के पास नहीं थे। अमर स्टील्स ने उन्हें ब्रॉशर दिखाकर अलग दरवाजे पसंद करने के लिए कहा। ग्राहक ने ब्रॉशर में पांच अलग दरवाजे पसंद किए।
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ग्राहक को छह महीने बाद 24 मई 2017 को दरवाजे डिलीवर हो गए। दरवाजों की डिलीवरी से पहले ग्राहक ने अमर स्टील्स को दो लाख रुपये ऑनलाइन पेमेंट की थी। तीन लाख रुपये देने के बाद भी ग्राहक के घर दरवाजे लगाने के लिए कंपनी की तरफ से कोई नहीं आया। ग्राहक ने इसकी शिकायत कंपनी से की। कंपनी की तरफ से दरवाजे इंस्टॉल करने के लिए मैकेनिक उनके घर आया। ग्राहक ने देखा कि दरवाजों में बाहर से लॉक नहीं दिया गया था। दरवाजों की फ्रेम में गेप था।
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बाथरूम के दरवाजे में स्क्रैच थे। ग्राहक ने इसकी शिकायत उपभोक्ता आयोग को दी थी। आयोग ने उपभोक्ता की शिकायत को सही मानकर दरवाजे बदलने का आदेश दिया है। ग्राहक ने शिकायत में औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित अमर स्टील्स और टाटा स्टील्स लिमिटेड को पार्टी बनाया था।