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Panchkula News: भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य परंपरा का महत्व पर चर्चा
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चंडीगढ़। सेक्टर-45 के देव समाज कॉलेज फॉर विमेन में वीरवार को भारतीय संस्कृति में गुरु शिष्य परंपरा का महत्व विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ। यह आयोजन चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से हुआ। बांसुरी वादक और मशहूर संगीतज्ञ और राष्ट्रपति अवार्ड उस्ताद डॉ. मुज्तबा हुसैन ने इसमें अपनी प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम की शुरुआत में उस्ताद डॉ. हुसैन ने गुरु वंदना पेश की। इसमें बाद उन्होंने राग शुद्ध सारंग में विलंबित झपताल, मध्य तथा द्रुत तीन ताल की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं। सिद्धार्थ चटर्जी ने तबले पर उत्कृष्ट संगत की। पंडित विनोद पवार ने मंच संचालन किया।
डॉ. मुज्तबा हुसैन ने बताया कि हर प्रकार का संगीत, चाहे वह फिल्मी हो या आधुनिक, मूल रूप से शास्त्रीय संगीत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को कहा कि जो विद्यार्थी शास्त्रीय संगीत को गहराई से सीखता है, वह विश्व का कोई भी संगीत सहजता से पेश कर सकता है।
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कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. नीरू मलिक, संगीत विभाग से डॉ. सौरव सूद, डॉ. कमलेश इंदर सिंह, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से कार्यवाहक अध्यक्ष विक्रांत सेठ, कार्यक्रम के संयोजक पंडित विनोद पवार के साथ साथ डॉ. सुधीर बातिश, सरदार नौनिहाल सिंह सूद, गुरबचन बैंस, भूपेंद्र सिंह वालिया, हरसिमरन सिंह के अलावा कई प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं और संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत में उस्ताद डॉ. हुसैन ने गुरु वंदना पेश की। इसमें बाद उन्होंने राग शुद्ध सारंग में विलंबित झपताल, मध्य तथा द्रुत तीन ताल की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं। सिद्धार्थ चटर्जी ने तबले पर उत्कृष्ट संगत की। पंडित विनोद पवार ने मंच संचालन किया।
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डॉ. मुज्तबा हुसैन ने बताया कि हर प्रकार का संगीत, चाहे वह फिल्मी हो या आधुनिक, मूल रूप से शास्त्रीय संगीत से जुड़ा हुआ है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को कहा कि जो विद्यार्थी शास्त्रीय संगीत को गहराई से सीखता है, वह विश्व का कोई भी संगीत सहजता से पेश कर सकता है।
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कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. नीरू मलिक, संगीत विभाग से डॉ. सौरव सूद, डॉ. कमलेश इंदर सिंह, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से कार्यवाहक अध्यक्ष विक्रांत सेठ, कार्यक्रम के संयोजक पंडित विनोद पवार के साथ साथ डॉ. सुधीर बातिश, सरदार नौनिहाल सिंह सूद, गुरबचन बैंस, भूपेंद्र सिंह वालिया, हरसिमरन सिंह के अलावा कई प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं और संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।