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Panchkula News: भगवान राम को वनवास होता देख भावुक हुए भक्त
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पंचकूला। यवनिका ओपन थिएटर, सेक्टर 5 में आयोजित युवा मंच की हाईटेक रामलीला अपने छठे दिन में पहुंच गई। प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनाओं के गहरे सागर में डुबो दिया। कलाकारों ने भगवान राम के वनगमन से लेकर दशरथ के स्वर्गवास तक के मार्मिक दृश्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
मंचन की शुरुआत पारंपरिक माता की आरती से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पहला दृश्य राम माता कौशल्या और सीता से वन जाने की आज्ञा लेने और लक्ष्मण के प्रवेश का था। मोहित शर्मा (राम), आंचल (सीता) और लक्ष्मी (कौशल्या) के अभिनय ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। लक्ष्मण के रूप में लक्ष्य और सन्नी शर्मा ने बड़े भाई के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई।
अगले दृश्य में माता केकई द्वारा राम, लक्ष्मण और सीता को वनवास वस्त्र दिए गए। काजल (केकई) ने भूमिका इतनी प्रभावशाली निभाई कि दर्शकों में क्रोध और करुणा दोनों भाव उमड़ पड़े। इसके बाद नगरवासियों का राम के साथ वन में प्रस्थान और चलते-चलते गीत का दृश्य दर्शकों के दिल को छू गया।
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मंचन का अगला चरण राम और केवट की भेंट तथा सुमंत की वापसी था। मनिल ग्रोवर ने केवट की भूमिका में श्रद्धा और भक्ति से सबका मन मोह लिया।
सबसे मार्मिक दृश्य दशरथ का स्वर्गवास था। पवन शर्मा ने पिता-पुत्र वियोग की पीड़ा इतनी गहराई से दिखाई कि दर्शक भावविभोर हो गए। इस प्रस्तुति ने त्याग, भक्ति और कर्तव्यपरायणता के मूल्यों को याद दिलाया।
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मंचन की शुरुआत पारंपरिक माता की आरती से हुई, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पहला दृश्य राम माता कौशल्या और सीता से वन जाने की आज्ञा लेने और लक्ष्मण के प्रवेश का था। मोहित शर्मा (राम), आंचल (सीता) और लक्ष्मी (कौशल्या) के अभिनय ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। लक्ष्मण के रूप में लक्ष्य और सन्नी शर्मा ने बड़े भाई के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई।
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अगले दृश्य में माता केकई द्वारा राम, लक्ष्मण और सीता को वनवास वस्त्र दिए गए। काजल (केकई) ने भूमिका इतनी प्रभावशाली निभाई कि दर्शकों में क्रोध और करुणा दोनों भाव उमड़ पड़े। इसके बाद नगरवासियों का राम के साथ वन में प्रस्थान और चलते-चलते गीत का दृश्य दर्शकों के दिल को छू गया।
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मंचन का अगला चरण राम और केवट की भेंट तथा सुमंत की वापसी था। मनिल ग्रोवर ने केवट की भूमिका में श्रद्धा और भक्ति से सबका मन मोह लिया।
सबसे मार्मिक दृश्य दशरथ का स्वर्गवास था। पवन शर्मा ने पिता-पुत्र वियोग की पीड़ा इतनी गहराई से दिखाई कि दर्शक भावविभोर हो गए। इस प्रस्तुति ने त्याग, भक्ति और कर्तव्यपरायणता के मूल्यों को याद दिलाया।