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हरियाणाः सरकारी अस्पतालों में डेंगू मरीजों को निशुल्क मिलेगी प्लेटलेट्स
Sun, 13 Sep 2020 02:50 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 02:50 AM IST
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डेंगू
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हरियाणा में डेंगू के मरीजों का उपचार करने व डेंगू बुखार से मौत की संभावनाओं को कम करने के उद्देश्य से सरकारी अस्पतालों में डेंगू मरीजों को अब निशुल्क प्लेटलेट्स उपलब्ध करवाई जाएगी। बिना आर्थिक दबाव डेंगू मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले, इस दिशा में सरकार ने यह फैसला लिया है। अभी गुरुग्राम, पंचकूला, करनाल, रोहतक, सोनीपत में एसडीपी सुविधा (प्लेटलेट्स एफ़ेरेसिस मशीन) उपलब्ध है।
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इसके अलावा, राज्यभर की सरकारी प्रयोगशालाओं में डेंगू का परीक्षण मुफ्त किया जा रहा है। विभाग जहां एक ओर विभाग कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। वहीं दूसरी ओर यह डेंगू जैसी अन्य बीमारियों के प्रसार की निगरानी भी कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि राज्य में 2017 से डेंगू के मामलों में कमी आई है।
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सितंबर, 2020 में अब तक डेंगू के केवल 33 पुष्ट मामले सामने आए हैं। मुख्य रूप से दो जिलों, गुरुग्राम (20) और भिवानी (10) से डेंगू के मामलों की रिपोर्ट मिली है। उन्होंने बताया कि डेंगू के कारण होने वाली मृत्यु को रोकने के उद्देश्य से नई पहल के तहत सरकारी अस्पतालों में डेंगू के रोगियों के लिए निशुल्क सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) का प्रावधान शुरू किया गया है, क्योंकि गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया वाले कुछ डेंगू मरीजों को तुरंत एसडीपी की आवश्यकता होती है।
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गत वर्षों के दौरान सरकारी अस्पतालों में 8,500 रुपये प्रति यूनिट एसडीपी की वसूली की जा रही थी। हालांकि, उत्तरी क्षेत्र में हरियाणा डेंगू रोगियों के लिए मुफ्त सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) सुविधा शुरू करने वाला पहला राज्य है। वर्तमान में राज्य में कुल 27 एसएसएच (डेंगू परीक्षण प्रयोगशालाएं) संचालित हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, जिला भिवानी और रोहतक में संदिग्ध डेंगू मामलों के लिए फ्लू कॉर्नर में डेंगू के नमूने लेना भी शुरू किया गया है, क्योंकि अधिकतर मामले इन्हीं जिलों से सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त, डेंगू रोगियों के लिए समर्पित बैड्स की पहचान करने के अलावा सितंबर 2020 के पहले सप्ताह तक लगभग 1,158 परीक्षण किए गए हैं। इसी दौरान, सिविल अस्पतालों में वार्ड और बेड की मच्छर प्रूफिंग की जा रही है।
एंटोमोलॉजिकल निगरानी और वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए, जिला नूंह और यमुनानगर में दो एंटोमोलॉजिकल ज़ोन स्थापित किए गए हैं। जिला रोहतक और हिसार में दो और एंटोमोलॉजिकल जोन स्थापित किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में एंटोमोलॉजिस्ट का एक पद और कीट कलेक्टर के दो पद उपलब्ध करवाए गए हैं।
अरोड़ा ने कहा कि ये कर्मचारी एंटोमोलॉजिकल अध्ययन करेंगे और यह अध्ययन उचित वेक्टर नियंत्रण उपायों को तय करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 गतिविधियों के साथ ही राज्य में वेक्टर जनित रोग (वीबीडी) नियंत्रण उपायों को जारी रखा गया है।