{"_id":"6013264e8ebc3e08ba6b8742","slug":"demand-to-include-punjabi-in-j-and-k-language-list-bureau-news-pkl402138348","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाबी को जेएंडके की भाषा सूची में शामिल करने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाबी को जेएंडके की भाषा सूची में शामिल करने की मांग
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाबी भाषा के जम्मू-कश्मीर के साथ महाराजा रणजीत सिंह के समय से ऐतिहासिक संबंधों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वीरवार को पंजाबी को केंद्र शासित प्रदेश की अधिकारिक भाषाओं की सूची में दर्ज करवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कैप्टन ने अपील की है कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय को सलाह दें कि यूटी जेएंडके की अधिकारिक भाषाओं की सूची पर पुनर्विचार करते हुए इसकी समीक्षा की जाए और पंजाबी भाषा को इस सूची में शामिल किया जाए।
अधिकारिक भाषाओं की सूची में पंजाबी भाषा को बाहर करने के मामले पर पंजाबी समुदाय की नाराजगी का हवाला देते हुए कैप्टन ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के समय से जम्मू-कश्मीर, पंजाब का हिस्सा रहा है और इस क्षेत्र की पंजाबी एक क्षेत्रीय भाषा रही है। उन्होंने पत्र में लिखा कि जब जम्मू-कश्मीर आजाद राज्य के तौर पर अस्तित्व में आया तो इस राज्य में पंजाबी बोली बड़े स्तर पर बोली जाती थी।
विज्ञापन
सितंबर में पारित हुआ जम्मू-कश्मीर भाषाएं बिल 2020
मुख्यमंत्री ने कहा कि सितंबर, 2020 में ध्वनि मतों से संसद के दोनों सदनों द्वारा पास किए जम्मू-कश्मीर भाषाएं बिल, 2020 के अंतर्गत यूटी जम्मू-कश्मीर में मौजूदा समय में दर्ज उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं के अलावा कश्मीरी, डोगरी और हिंदी को अधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया गया। दुख की बात है कि पंजाबी को अधिकारिक भाषाओं की सूची में दर्ज नहीं किया गया जोकि अब यूटी की अधिकारिक भाषाएं ही नहीं बन गई बल्कि स्कूलों में भी इनको लाजिमी विषय के तौर पर पढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कैप्टन ने अपील की है कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय को सलाह दें कि यूटी जेएंडके की अधिकारिक भाषाओं की सूची पर पुनर्विचार करते हुए इसकी समीक्षा की जाए और पंजाबी भाषा को इस सूची में शामिल किया जाए।
विज्ञापन
अधिकारिक भाषाओं की सूची में पंजाबी भाषा को बाहर करने के मामले पर पंजाबी समुदाय की नाराजगी का हवाला देते हुए कैप्टन ने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के समय से जम्मू-कश्मीर, पंजाब का हिस्सा रहा है और इस क्षेत्र की पंजाबी एक क्षेत्रीय भाषा रही है। उन्होंने पत्र में लिखा कि जब जम्मू-कश्मीर आजाद राज्य के तौर पर अस्तित्व में आया तो इस राज्य में पंजाबी बोली बड़े स्तर पर बोली जाती थी।
विज्ञापन
सितंबर में पारित हुआ जम्मू-कश्मीर भाषाएं बिल 2020
मुख्यमंत्री ने कहा कि सितंबर, 2020 में ध्वनि मतों से संसद के दोनों सदनों द्वारा पास किए जम्मू-कश्मीर भाषाएं बिल, 2020 के अंतर्गत यूटी जम्मू-कश्मीर में मौजूदा समय में दर्ज उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं के अलावा कश्मीरी, डोगरी और हिंदी को अधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल किया गया। दुख की बात है कि पंजाबी को अधिकारिक भाषाओं की सूची में दर्ज नहीं किया गया जोकि अब यूटी की अधिकारिक भाषाएं ही नहीं बन गई बल्कि स्कूलों में भी इनको लाजिमी विषय के तौर पर पढ़ाया जाएगा।