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Panchkula News: हरियाली को चाट रहा मलबा, शहर में डालने की जगह नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पुराने को तोड़कर जब नया मकान बनाया जाता है, तो उसमें से काफी मलबा निकलता है। यह मलबा लोगों द्वारा शहर की ग्रीन बेल्ट में डाला जा रहा है। सेक्टर-5 और घग्गर पार यह समस्या सबसे ज्यादा है। इससे ग्रीन बेल्ट में बनी हरियाली खत्म हो जाती है। आने-जाने वाले लोगों को वह जगह भी बदसूरत नजर आती है। नगर निगम की तरफ से अब तक स्थायी इंतजाम नहीं किए जाने के कारण यह समस्या बनी हुई है। शहर में 31 सेक्टर हैं। इनमें कहीं न कहीं कोई न कोई निर्माण कार्य चलता ही रहता है। नया निर्माण करने के लिए पहले से बने भवन को तोड़ा जाता है, जिससे काफी मलबा निकलता है। उस मलबे को लोग अपने घर के सामने रख नहीं सकते हैं। उसे डालने के लिए कोई स्थायी जगह निर्धारित नहीं है। ऐसे में यह मलबा सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है।
ट्रैक्टर वाले लेते हैं ठेका
शहर में कुछ लोग ऐसे हैं जिनके पास ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं। वे निर्माणाधीन मकान मालिकों से मलबा उठाने का ठेका ले लेते हैं। वे मकान मालिक से कहते हैं कि वे इस बात की चिंता न करें कि मलबा कहां डाला जाएगा। इसका बंदोबस्त वे अपने आप कर देंगे। परेशानी से बचने के लिए मकान मालिक भी उन्हें ठेका दे देता है। उसके बाद वे मलबे को ट्रॉली में भरकर किसी भी सेक्टर की ग्रीन बेल्ट में डाल देते हैं।
सेक्टर-5 बना डंपिंग ग्राउंड
घग्गर पार बसे सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट में भी मलबा डाला जा रहा है। मगर सबसे ज्यादा समस्या सेक्टर-5 में है। एक तरफ तो शहर के बीचोबीच बनाए सेक्टर-5 में विश्व स्तरीय हैप्पीनेस फूड मार्केट बनाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इस मलबे का डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। न तो एचएसवीपी और न ही नगर निगम की तरफ से इस मामले में कोई कार्रवाई की जा रही है। नतीजा यह है कि ग्रीन बेल्ट में मलबे के ढेर बढ़ते जा रहे हैं।
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रात को डाला जाता है मलबा
जब शहर में स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवनों का निर्माण चरम पर था, तो हर रोज शहर में कुछ मकानों को स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवन बनाने के लिए तोड़ा जाता था। उनमें से ज्यादातर का मलबा इसी तरह ग्रीन बेल्ट में डाला गया है। यह कार्रवाई अधिकतर रात को ही की जाती है। रिहायशी सेक्टर नहीं होने के कारण सेक्टर-5 इन लोगों के लिए सबसे आसार टारगेट रहता है।
इस समस्या के प्रति नगर निगम गंभीर है। इसके समाधान के लिए प्रोजेक्ट बनाया गया है। अप्रूवल के लिए उसे विभाग में भेजा गया है। उसे मंजूरी मिलने के बाद इस समस्या का समाधान किया जाएगा। -कुलभूषण गोयल, मेयर पंचकूला
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पंचकूला। पुराने को तोड़कर जब नया मकान बनाया जाता है, तो उसमें से काफी मलबा निकलता है। यह मलबा लोगों द्वारा शहर की ग्रीन बेल्ट में डाला जा रहा है। सेक्टर-5 और घग्गर पार यह समस्या सबसे ज्यादा है। इससे ग्रीन बेल्ट में बनी हरियाली खत्म हो जाती है। आने-जाने वाले लोगों को वह जगह भी बदसूरत नजर आती है। नगर निगम की तरफ से अब तक स्थायी इंतजाम नहीं किए जाने के कारण यह समस्या बनी हुई है। शहर में 31 सेक्टर हैं। इनमें कहीं न कहीं कोई न कोई निर्माण कार्य चलता ही रहता है। नया निर्माण करने के लिए पहले से बने भवन को तोड़ा जाता है, जिससे काफी मलबा निकलता है। उस मलबे को लोग अपने घर के सामने रख नहीं सकते हैं। उसे डालने के लिए कोई स्थायी जगह निर्धारित नहीं है। ऐसे में यह मलबा सड़कों के किनारे डाल दिया जाता है।
ट्रैक्टर वाले लेते हैं ठेका
शहर में कुछ लोग ऐसे हैं जिनके पास ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं। वे निर्माणाधीन मकान मालिकों से मलबा उठाने का ठेका ले लेते हैं। वे मकान मालिक से कहते हैं कि वे इस बात की चिंता न करें कि मलबा कहां डाला जाएगा। इसका बंदोबस्त वे अपने आप कर देंगे। परेशानी से बचने के लिए मकान मालिक भी उन्हें ठेका दे देता है। उसके बाद वे मलबे को ट्रॉली में भरकर किसी भी सेक्टर की ग्रीन बेल्ट में डाल देते हैं।
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सेक्टर-5 बना डंपिंग ग्राउंड
घग्गर पार बसे सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट में भी मलबा डाला जा रहा है। मगर सबसे ज्यादा समस्या सेक्टर-5 में है। एक तरफ तो शहर के बीचोबीच बनाए सेक्टर-5 में विश्व स्तरीय हैप्पीनेस फूड मार्केट बनाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इस मलबे का डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। न तो एचएसवीपी और न ही नगर निगम की तरफ से इस मामले में कोई कार्रवाई की जा रही है। नतीजा यह है कि ग्रीन बेल्ट में मलबे के ढेर बढ़ते जा रहे हैं।
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रात को डाला जाता है मलबा
जब शहर में स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवनों का निर्माण चरम पर था, तो हर रोज शहर में कुछ मकानों को स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला भवन बनाने के लिए तोड़ा जाता था। उनमें से ज्यादातर का मलबा इसी तरह ग्रीन बेल्ट में डाला गया है। यह कार्रवाई अधिकतर रात को ही की जाती है। रिहायशी सेक्टर नहीं होने के कारण सेक्टर-5 इन लोगों के लिए सबसे आसार टारगेट रहता है।
इस समस्या के प्रति नगर निगम गंभीर है। इसके समाधान के लिए प्रोजेक्ट बनाया गया है। अप्रूवल के लिए उसे विभाग में भेजा गया है। उसे मंजूरी मिलने के बाद इस समस्या का समाधान किया जाएगा। -कुलभूषण गोयल, मेयर पंचकूला