{"_id":"6a594281de0d128f4006b10a","slug":"ddro-joginder-sharma-sent-to-judicial-custody-in-1755-acre-land-scam-panchkula-news-c-87-1-pan1011-138772-2026-07-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: 17.55 एकड़ जमीन घोटाले में डीडीआरओ जोगिंदर शर्मा न्यायिक हिरासत में भेजे गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: 17.55 एकड़ जमीन घोटाले में डीडीआरओ जोगिंदर शर्मा न्यायिक हिरासत में भेजे गए
विज्ञापन
पीएसीएल ग्रुप की विवादित जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण मामले में विजिलेंस की कार्रवाई
अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में, रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पीएसीएल ग्रुप से जुड़ी करोड़ों रुपये मूल्य की 17.55 एकड़ विवादित जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने डीडीआरओ एवं एचएसवीपी के पूर्व अधिकारी जोगिंदर शर्मा को अदालत में पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विजिलेंस का दावा है कि पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
विजिलेंस के अनुसार मामला पीएसीएल ग्रुप की उस जमीन से संबंधित है, जिस पर पहले से न्यायालय और संबंधित प्राधिकरणों की ओर से रोक लगी हुई थी। जांच में सामने आया कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सरकारी आदेशों का गलत इस्तेमाल करते हुए प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद विवादित जमीन का इंतकाल कर करीब 4.20 करोड़ रुपये में सौदा कर दिया गया। विजिलेंस के मुताबिक जोगिंदर शर्मा ने तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो, पटवारी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कराया। फर्जी रोजनामचा रिपोर्ट, जीपीए, रजिस्ट्रियों और इंतकाल के माध्यम से जमीन का मालिकाना हक बदलने की कथित साजिश रची गई।
विज्ञापन
विजिलेंस का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से पीएसीएल समूह के निवेशकों को आर्थिक नुकसान पहुंचा। जांच में यह भी सामने आया है कि रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीन की खरीद-फरोख्त को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें शामिल अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी अभी शेष है। विजिलेंस ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर जोगिंदर शर्मा का दोबारा पुलिस रिमांड लेने के लिए अदालत में आवेदन किया जा सकता है, ताकि दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और अन्य आरोपियों की भूमिका का खुलासा किया जा सके।
विज्ञापन
अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में, रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। पीएसीएल ग्रुप से जुड़ी करोड़ों रुपये मूल्य की 17.55 एकड़ विवादित जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने डीडीआरओ एवं एचएसवीपी के पूर्व अधिकारी जोगिंदर शर्मा को अदालत में पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विजिलेंस का दावा है कि पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
विजिलेंस के अनुसार मामला पीएसीएल ग्रुप की उस जमीन से संबंधित है, जिस पर पहले से न्यायालय और संबंधित प्राधिकरणों की ओर से रोक लगी हुई थी। जांच में सामने आया कि जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सरकारी आदेशों का गलत इस्तेमाल करते हुए प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई।
विज्ञापन
जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद विवादित जमीन का इंतकाल कर करीब 4.20 करोड़ रुपये में सौदा कर दिया गया। विजिलेंस के मुताबिक जोगिंदर शर्मा ने तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला, कानूनगो, पटवारी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कराया। फर्जी रोजनामचा रिपोर्ट, जीपीए, रजिस्ट्रियों और इंतकाल के माध्यम से जमीन का मालिकाना हक बदलने की कथित साजिश रची गई।
विज्ञापन
विजिलेंस का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से पीएसीएल समूह के निवेशकों को आर्थिक नुकसान पहुंचा। जांच में यह भी सामने आया है कि रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीन की खरीद-फरोख्त को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें शामिल अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी अभी शेष है। विजिलेंस ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर जोगिंदर शर्मा का दोबारा पुलिस रिमांड लेने के लिए अदालत में आवेदन किया जा सकता है, ताकि दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और अन्य आरोपियों की भूमिका का खुलासा किया जा सके।