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हवाई अड्डे का नामकरण शहीद भगत सिंह कराने को दिल्ली से चंडीगढ़ साइकिल यात्रा

Tue, 23 Mar 2021 10:13 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 23 Mar 2021 10:13 PM IST
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Cycle journey from Delhi to Chandigarh to name the airport Shaheed Bhagat Singh
चंडीगढ़। चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नामकरण शहीद भगत सिंह कराने की मांग को लेकर शहीद सम्मान अभियान के तीन सदस्य दिल्ली से साइकिल पर सवार होकर चंडीगढ़ पहुंचे। करीब 250 किलोमीटर का सफर तय करने वाले सदस्यों का कहना है कि नामकरण होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अगली बार वे पैदल यात्रा कर सरकारों को जगाने की कोशिश करेंगे।
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इससे पहले, चंडीगढ़ प्रेस क्लब पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 90वें शहादत दिवस पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान शहीद सम्मान अभियान के दिल्ली निवासी संयोजक हरपाल सिंह राणा, संदीप मान और सतीश महलावत ने बताया कि उनका उद्देश्य साफ है कि शहीदों को भारत रत्न मिले और उनको शहीदों का दर्जा देते हुए हवाई अड्डे का नाम भगत सिंह के नाम पर हो। इसको लेकर पहले भी वे कई बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन मामला पंजाब और हरियाणा की सरकारों के बीच फंसा हुआ है। पंजाब सरकार चाहती है कि चंडीगढ़ हवाई अड्डे का नामकरण शहीद भगत सिंह सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मोहाली रखा जाए। वहीं, हरियाणा सरकार चाहती है कि शहीद ए आजम भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चंडीगढ़ रखा जाए। ऐसे में मोहाली और चंडीगढ़ शहरों के नाम के बीच नामकरण फंसा हुआ है। हरपाल सिंह राणा ने कहा कि शहीदों को सम्मान दिलाने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। क्योंकि आज शहीदी दिवस है, इसलिए पंजाब और हरियाणा सरकार को विवाद खत्म करके अड्डे का नाम भगत सिंह रखना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो आगे वे पैदल मार्च करेंगे।
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हरपाल सिंह राणा ने बताया कि उनकी संस्था कई साल शहीदों के लिए काम कर रही है। चंडीगढ़ हवाई अड्डे के नामकरण का मामला पिछले कई साल से फंसा हुआ है। हरियाणा और पंजाब सरकार विधानसभा में अलग अलग प्रस्ताव पारित कर चुकी है। लेकिन मामला अभी भी उलझा हुआ है। राणा ने बताया कि साल 2019 से इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। दिल्ली से स्वाभिमान यात्रा और हस्ताक्षर अभियान चलाया। विमानन मंत्रालय भारत सरकार की ओर से अपील की गई थी कि दोनों राज्यों से बात की जाए। वे पंजाब के राज्यपाल, सीएम और हरियाणा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन शहीदों को आज भी सम्मान की दरकार है।
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