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साइबर ठगों ने भू अभिलेख विभाग की बेबसाइट को बनाया निशाना
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चंडीगढ़। साइबर ठगों ने अब राज्य के भू अभिलेख विभाग की वेबसाइट को निशाना बनाया है। बदमाश यहां से सेल डीड, जमाबंदी आदि से लोगों के अगूंठे के निशानों के क्लोन तैयार करके बैंकों से पैसे निकाल रहे हैं। फरीदाबाद में इस प्रकार के कई मामले सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस ने विभाग को चेताया है। साथ ही विभाग की वेबसाइट के ऑडिट कराने के साथ साथ कमियों को चिन्हित कर उनको दूर करने की सिफारिश की है।
भूमि अभिलेख विभाग के निदेशक को लिखे पत्र में पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि कुछ लोग जमाबंदी वेबसाइट से बिक्री विलेखों को डाउनलोड कर रहे हैं। साथ ही जिले की तहसीलों में तिथि के अनुसार सेल डीड से संबंधित लोगों की पूरी जानकारी का ब्योरा एकत्रित करते हैं। इसके बाद वह बटर पेपर पर इन अंगूठों के निशान लेते हैं और बाद में इनके क्लोन तैयार करते हैं। इन क्लोन के आधार पर ही बदमाश लोगों के आधार युक्त बैंक खातों से पैसे निकालते हैं।
हरियाणा पुलिस का कहना है कि इस प्रकार कई धोखाधड़ी हो चुके हैं, इसलिए हो रही हैं क्योंकि वेबसाइट पर अंगूठे के निशानों की उपलब्धता आसानी से है। विभाग को सलाह दी गई है कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि पब्लिक को सेल डीड का पहला पृष्ट ही दिख पाए, शेष जानकारियां नहीं। पिछले साल भी हरियाणा पुलिस ने इस प्रकार के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था। गौर हो कि एईपीएस एक एनपीसीआई के नेतृत्व वाला मॉडल है, जो ऑनलाइन इंटरऑपरेबल वित्तीय की अनुमति देता है। एईपीएस के तहत लेन देन के लिए ग्राहक के बैंक की पहचान, आधार संख्या और फिंगरप्रिंट जरूरी होती है।
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भूमि अभिलेख विभाग के निदेशक को लिखे पत्र में पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि कुछ लोग जमाबंदी वेबसाइट से बिक्री विलेखों को डाउनलोड कर रहे हैं। साथ ही जिले की तहसीलों में तिथि के अनुसार सेल डीड से संबंधित लोगों की पूरी जानकारी का ब्योरा एकत्रित करते हैं। इसके बाद वह बटर पेपर पर इन अंगूठों के निशान लेते हैं और बाद में इनके क्लोन तैयार करते हैं। इन क्लोन के आधार पर ही बदमाश लोगों के आधार युक्त बैंक खातों से पैसे निकालते हैं।
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हरियाणा पुलिस का कहना है कि इस प्रकार कई धोखाधड़ी हो चुके हैं, इसलिए हो रही हैं क्योंकि वेबसाइट पर अंगूठे के निशानों की उपलब्धता आसानी से है। विभाग को सलाह दी गई है कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि पब्लिक को सेल डीड का पहला पृष्ट ही दिख पाए, शेष जानकारियां नहीं। पिछले साल भी हरियाणा पुलिस ने इस प्रकार के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था। गौर हो कि एईपीएस एक एनपीसीआई के नेतृत्व वाला मॉडल है, जो ऑनलाइन इंटरऑपरेबल वित्तीय की अनुमति देता है। एईपीएस के तहत लेन देन के लिए ग्राहक के बैंक की पहचान, आधार संख्या और फिंगरप्रिंट जरूरी होती है।
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