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अमेरिका से पकड़ा गया साइबर ठग: सीबीआई को मिली बड़ी सफलता, साल 2013 से था फरार; लाया गया भारत

Thu, 10 Sep 2026 04:47 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 10 Sep 2026 04:47 PM IST
सार

हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से फरार हो गया था और बाद में अवैध रूप से अमेरिका पहुंच गया, जहां वह एक दशक से अधिक समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा।

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Cyber fraudster arrested in Singapore
गिरफ्तार आरोपी - फोटो : संवाद

विस्तार

सिंगापुर में भारतीय नागरिकों को ठगी का शिकार बनाने के मामले में वर्ष 2013 से फरार चल रहे आरोपी हरनेक सिंह को सीबीआई ने अमेरिका से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। आरोपी के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस और लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी था। अमेरिका से निर्वासित किए जाने के बाद सीबीआई अधिकारियों ने उसे 9 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया। 

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आरोपी को गुरुवार को पंचकूला की सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया जहां से उसे न्यायिक रियासत में भेज दिया गया है। मामले में सीबीआई दिल्ली ने वर्ष 2016 में साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने सहित आईटी एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 में भारत से संचालित साइबर ठगों ने सिंगापुर में रहने और काम करने वाले भारतीय नागरिकों को स्पूफ कॉल किए। ठग खुद को सिंगापुर इमिग्रेशन विभाग का अधिकारी बताते थे और पीड़ितों से कहते थे कि एयरपोर्ट पर डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारी दी गई है, जिसके कारण उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और निर्वासन हो सकता है। 
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इसके बाद पीड़ितों को कथित जुर्माने और समझौता शुल्क के नाम पर वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए भारत में रकम भेजने के लिए मजबूर किया जाता था। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम हरनेक सिंह द्वारा सह-आरोपियों आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के साथ मिलकर संचालित मनी ट्रांसफर आउटलेट के माध्यम से प्राप्त की जाती थी। 

हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से फरार हो गया था और बाद में अवैध रूप से अमेरिका पहुंच गया, जहां वह एक दशक से अधिक समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा। सीबीआई के मुताबिक, अमेरिका में उसे समन और जमानती वारंट तामील कराए जाने के बावजूद वह अदालत में पेश नहीं हुआ। 

इसके बाद 22 अप्रैल 2024 को पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उसके खिलाफ ओपन डेटेड गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया। सीबीआई ने इंटरपोल के माध्यम से कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी कराया और उसके पासपोर्ट पर एलओसी भी खुलवाई। इस मामले में सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के खिलाफ केस की सुनवाई पूरी हो चुकी है और दोनों को 26 मई 2025 को अदालत ने दोषी करार दिया था। सीबीआई ने कहा कि लंबे समय से फरार आरोपियों को विदेश से वापस लाने की कार्रवाई इंटरपोल, एलओसी और विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय के जरिए जारी रहेगी।
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