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बारिश की भेंट चढ़ीं फसलें, अब किसानों को सताने लगी रोटी की चिंता
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बरवाला। बारिश बंद होने के बाद भी किसानों की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। खेतों में भरे बारिश के पानी से किसानों की फसल तबाह हो गई है। किसानों कहना है कि इस बार हर फसल बर्बाद होने के कारण अब अनाज का संकट पैदा होना तय है। उन्हें अब अपने परिवार का पेट भरने की चिंता सता रही है। उनकी खून, पसीने की कमाई एक महीने के अंदर बारिश की भेंट चढ़ गई।
इलाके के किसान हुकुमचंद, विकास कुमार, बलकार सिंह, बलजीत सिंह, बचनाराम, गुरजंट सिंह आदि ने बताया कि दो-तीन दिन लगातार हुई बारिश से उनके खेतों में पानी भर चुका है। इस कारण खेतों में खड़ी आलू सरसों, चना, आदि की फसल बर्बाद हो गई। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने बताया कि कुछ फसलें तो उनकी 6 जनवरी के दौरान लगातार हुई 3 दिन की बारिश में खराब हो गई थीं। थोड़ी बहुत जो बची थीं वह अब 21, 22 और 23 जनवरी को हुई बारिश से तबाह हो गईं। कई एकड़ आलू व सरसों की फसल जो पककर तैयार हो चुकी थी पूरी तरह से नष्ट हो गई।
खर्चे की भरपाई करना बड़ी चुनौती
किसानों ने फसल की बुआई में काफी खर्च किया है। बड़े किसानों के पास तो अपने ट्रैक्टर हैं, वह उनसे बुआई कर लेते हैं, लेकिन छोटे किसानों का बुआई का खर्च निकल पाना भी इस बार मुश्किल है। उन्होंने बड़े लोगों से कर्ज लेकर फसल बोई है। बारिश के कारण इस बार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। अब उनके सामने फसलों पर किए खर्च की भरपाई ही बड़ी चुनौती है।
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प्रशासन से मुआवजा देने की मांग
इलाके के किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से गिरदावरी करवाकर मुआवजा दिए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो लावारिस पशु फसल को तबाह कर रहे हैं। प्रशासन इस ओर कोई कदम नहीं उठा रहा है। वहीं, दूसरी ओर कुदरत की मार ने उन्हें बेबस कर दिया है। अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्हें केवल सरकार से ही मुआवजे की उम्मीद है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके दर्द को समझकर एक निश्चित मुआवजा प्रदान करेगी।
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इलाके के किसान हुकुमचंद, विकास कुमार, बलकार सिंह, बलजीत सिंह, बचनाराम, गुरजंट सिंह आदि ने बताया कि दो-तीन दिन लगातार हुई बारिश से उनके खेतों में पानी भर चुका है। इस कारण खेतों में खड़ी आलू सरसों, चना, आदि की फसल बर्बाद हो गई। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने बताया कि कुछ फसलें तो उनकी 6 जनवरी के दौरान लगातार हुई 3 दिन की बारिश में खराब हो गई थीं। थोड़ी बहुत जो बची थीं वह अब 21, 22 और 23 जनवरी को हुई बारिश से तबाह हो गईं। कई एकड़ आलू व सरसों की फसल जो पककर तैयार हो चुकी थी पूरी तरह से नष्ट हो गई।
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खर्चे की भरपाई करना बड़ी चुनौती
किसानों ने फसल की बुआई में काफी खर्च किया है। बड़े किसानों के पास तो अपने ट्रैक्टर हैं, वह उनसे बुआई कर लेते हैं, लेकिन छोटे किसानों का बुआई का खर्च निकल पाना भी इस बार मुश्किल है। उन्होंने बड़े लोगों से कर्ज लेकर फसल बोई है। बारिश के कारण इस बार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। अब उनके सामने फसलों पर किए खर्च की भरपाई ही बड़ी चुनौती है।
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प्रशासन से मुआवजा देने की मांग
इलाके के किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से गिरदावरी करवाकर मुआवजा दिए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो लावारिस पशु फसल को तबाह कर रहे हैं। प्रशासन इस ओर कोई कदम नहीं उठा रहा है। वहीं, दूसरी ओर कुदरत की मार ने उन्हें बेबस कर दिया है। अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्हें केवल सरकार से ही मुआवजे की उम्मीद है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके दर्द को समझकर एक निश्चित मुआवजा प्रदान करेगी।