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साइबर सेल ने धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
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चंडीगढ़। ऑनलाइन कास्मेेटिक प्रोडक्ट बेचने के नाम पर दो बिजनेसमैन से 9 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को साइबर सेल ने गाजियाबाद और पलवल से गिरफ्तार किया है। शातिर आरोपियों ने मोबाइल लिंक और एनी डेस्क एप के जरिए दोनों से धोखाधड़ी की। सेक्टर-19 थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की पहचान गाजियाबाद निवासी राहुल सेवाइवर और हरियाणा के पलवल निवासी विक्रम सिंह के रूप में हुई है। बुधवार आरोपियों को जिला अदालत में पेश कर पुलिस ने तीन-तीन दिन का रिमांड हासिल किया है।
बीते दिनों सेक्टर-20 निवासी कास्मेटिक प्रोडक्ट के ऑथराइज्ड डीलर विजयपाल को आरोपियों ने कॉल कर कहा गया कि वे ऑनलाइन प्रोडक्ट्स बेचते हैं। उनके प्रोडक्ट को भी अपनी वेबसाइट पर लिस्ट करवाकर बेचेंगे। शिकायतकर्ता उनके झांसे में आ गया और उनसे डील तय कर ली। इसके बाद शातिरों ने उसे एक वेबसाइट का लिंक भेजा और उसमें 9.75 लाख रुपये की पेमेंट करने की बात कही। अगले दिन आरोपी ने दोबारा फोन कर एक और छोटी पेमेंट करने को कहा। जैसे ही उसने अपनी बैंक डिटेल भरी तो सारा डाटा हैक कर लिया गया। इसके बाद शातिरों ने ओटीपी पूछ खाते से सात लाख रुपये निकाल लिए।
वहीं, आर्टिफिशयल ज्वैलरी बिजनेसमैन रनजीश वर्मा को उक्त शातिरों ने कॉल कर प्रोडक्ट ऑनलाइन बेचने का लालच दिया। इस बार आरोपियों ने उसे लैपटॉप पर एनी डेस्क एप डाउनलोड कर उसमें कोड डालने को कहा। कोड डालते ही लैपटॉप हैक हो गया। इसमें भी आरोपियों ने लिंक भेजकर डिटेल डालने को कहा। इसके बाद ओटीपी आया और उसकी मदद से दो लाख रुपये उड़ा दिए गए।
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मिले फर्जी सिम और बैंक अकाउंट
शिकायत पर साइबर सेल डीएसपी रश्मि यादव ने इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह की अगुवाई में टीम का गठन कर आरोपियों को दबोचा गया। गिरफ्त में आने के बाद पुलिस ने आरोपी राहुल से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप बरामद कर लिय। विक्रम के नाम तीन बैंक अकाउंट थे जिनका इस्तेमाल वह लोगों को ऑनलाइन ठगने के लिए करता था।
आरोपियों से हो सकते हैं अहम खुलासे
पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में और शातिर होने की सूचना है। पकड़े गए आरोपी से कुछ और अहम खुलासे हो सकते हैं।
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बीते दिनों सेक्टर-20 निवासी कास्मेटिक प्रोडक्ट के ऑथराइज्ड डीलर विजयपाल को आरोपियों ने कॉल कर कहा गया कि वे ऑनलाइन प्रोडक्ट्स बेचते हैं। उनके प्रोडक्ट को भी अपनी वेबसाइट पर लिस्ट करवाकर बेचेंगे। शिकायतकर्ता उनके झांसे में आ गया और उनसे डील तय कर ली। इसके बाद शातिरों ने उसे एक वेबसाइट का लिंक भेजा और उसमें 9.75 लाख रुपये की पेमेंट करने की बात कही। अगले दिन आरोपी ने दोबारा फोन कर एक और छोटी पेमेंट करने को कहा। जैसे ही उसने अपनी बैंक डिटेल भरी तो सारा डाटा हैक कर लिया गया। इसके बाद शातिरों ने ओटीपी पूछ खाते से सात लाख रुपये निकाल लिए।
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वहीं, आर्टिफिशयल ज्वैलरी बिजनेसमैन रनजीश वर्मा को उक्त शातिरों ने कॉल कर प्रोडक्ट ऑनलाइन बेचने का लालच दिया। इस बार आरोपियों ने उसे लैपटॉप पर एनी डेस्क एप डाउनलोड कर उसमें कोड डालने को कहा। कोड डालते ही लैपटॉप हैक हो गया। इसमें भी आरोपियों ने लिंक भेजकर डिटेल डालने को कहा। इसके बाद ओटीपी आया और उसकी मदद से दो लाख रुपये उड़ा दिए गए।
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मिले फर्जी सिम और बैंक अकाउंट
शिकायत पर साइबर सेल डीएसपी रश्मि यादव ने इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह की अगुवाई में टीम का गठन कर आरोपियों को दबोचा गया। गिरफ्त में आने के बाद पुलिस ने आरोपी राहुल से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप बरामद कर लिय। विक्रम के नाम तीन बैंक अकाउंट थे जिनका इस्तेमाल वह लोगों को ऑनलाइन ठगने के लिए करता था।
आरोपियों से हो सकते हैं अहम खुलासे
पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में और शातिर होने की सूचना है। पकड़े गए आरोपी से कुछ और अहम खुलासे हो सकते हैं।