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मालखाने से लाइसेंसी विदेशी 32 रिवाल्वर गुम ’पुलिस फंसी कसूती
Updated Wed, 24 Jan 2018 10:41 PM IST
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मालखाने से विदेशी रिवाल्वर गुम
अठारह वर्ष पहले लिया था कब्जे में, हाईकोर्ट ने दिया मालिक को 4 लाख अदा करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा।
सीआईए स्टाफ की ओर से 18 वर्ष पहले कब्जे में लिया लाइसेंसी विदेशी 32 बोर रिवाल्वर मालखाने से गुम होने हो गया है। मामले में थाना सिटी पुलिस फंस गई है। हाईकोर्ट ने मालिक को 4 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
सीआईए स्टाफ पुलिस ने तकरीबन 5 मार्च 2000 को धनवंत सिंह गांव माहला कलां को विदेशी 32 बोर रिवाल्वर समेत गिरफ्तार करके उस खिलाफ थाना सिटी में आर्म्स एक्ट तहत केस दर्ज कर लिया था। यह लाइसेंसी रिवाल्वर आरोपी के पिता निर्भय सिंह का था। इस केस में अदालत ने 21 सिंतबर 2002 को आरोपी को दोषी करार दे दिया। मामले में पहले 20 जनवरी 2010 को हाईकोर्ट ने आरोपी की नेक चलनी जमानत (प्रोबेशन) मंजूर कर ली गई। निर्भय सिंह गने रिवाल्वर लेने के लिए जिला अदालत में अर्जी दी। लाइसेंस रेन्यू न होने के कारण जिला अदालत ने 20 सितंबर 2011 को उसकी यह अर्जी रद्द कर दी। पुलिस सूत्रों अनुसार किसी अधिकारी की मिलीभगत से यह विदेशी रिवाल्वर खुर्द बुर्द कर दिया गया और पीपीए फिलौर फायर आर्म्स विभाग के पास इस विदेशी रिवाल्वर 32 बोर की जगह38 बोर रिवाल्वर बिना नंबर वाला जमा करवा दिया गया।
इस दौरान निर्भय सिंह ने 2014 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह रिवाल्वर लेने के लिए रिट दायर की। इस मामले में डीएसपी सिटी और एसपी डी की पड़ताल में कहा गया कि मालखाना इंचार्ज हवलदार जगमोहन सिंह ने यह 32 बोर रिवाल्वर जमा करवाने के लिए हवलदार सुखदेव सिंह मोगा जरिये पीपीए फिलौर फायर आर्म्स इंचार्ज के पास जमा करवाने के लिए भेजा था। पुलिस ने हाईकोर्ट की लताड़ के डर से थाना सिटी में 17 जनवरी 2015 को पीपीए फिलौर में फायर आर्म्स इंचार्ज अमरनाथ और हवलदार सुखदेव सिंह, जिसकी 7 जनवरी 2011 को मौत हो चुकी थी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इस के बाद पीपीए फिलौर में फायर आर्म्स इंचार्ज अमर नाथ ने कहा कि वह बेकसूर है। अदालत ने 24 अक्तूबर 2015 को यह केस रद्द की रिपोर्ट मंजूर कर ली। जस्टिस कुलदीप सिंह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 28 नवंबर 2017 को दो माह में पीड़ित को 4 लाख रुपये हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है। एक सीनियर अधिकारी मुताबिक पुलिस अब फैसले खिलाफ हाईकोर्ट में डबल बेंच के पास दुबारा पिटीशन दायर कर रही है।
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अठारह वर्ष पहले लिया था कब्जे में, हाईकोर्ट ने दिया मालिक को 4 लाख अदा करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
मोगा।
सीआईए स्टाफ की ओर से 18 वर्ष पहले कब्जे में लिया लाइसेंसी विदेशी 32 बोर रिवाल्वर मालखाने से गुम होने हो गया है। मामले में थाना सिटी पुलिस फंस गई है। हाईकोर्ट ने मालिक को 4 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
सीआईए स्टाफ पुलिस ने तकरीबन 5 मार्च 2000 को धनवंत सिंह गांव माहला कलां को विदेशी 32 बोर रिवाल्वर समेत गिरफ्तार करके उस खिलाफ थाना सिटी में आर्म्स एक्ट तहत केस दर्ज कर लिया था। यह लाइसेंसी रिवाल्वर आरोपी के पिता निर्भय सिंह का था। इस केस में अदालत ने 21 सिंतबर 2002 को आरोपी को दोषी करार दे दिया। मामले में पहले 20 जनवरी 2010 को हाईकोर्ट ने आरोपी की नेक चलनी जमानत (प्रोबेशन) मंजूर कर ली गई। निर्भय सिंह गने रिवाल्वर लेने के लिए जिला अदालत में अर्जी दी। लाइसेंस रेन्यू न होने के कारण जिला अदालत ने 20 सितंबर 2011 को उसकी यह अर्जी रद्द कर दी। पुलिस सूत्रों अनुसार किसी अधिकारी की मिलीभगत से यह विदेशी रिवाल्वर खुर्द बुर्द कर दिया गया और पीपीए फिलौर फायर आर्म्स विभाग के पास इस विदेशी रिवाल्वर 32 बोर की जगह38 बोर रिवाल्वर बिना नंबर वाला जमा करवा दिया गया।
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इस दौरान निर्भय सिंह ने 2014 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह रिवाल्वर लेने के लिए रिट दायर की। इस मामले में डीएसपी सिटी और एसपी डी की पड़ताल में कहा गया कि मालखाना इंचार्ज हवलदार जगमोहन सिंह ने यह 32 बोर रिवाल्वर जमा करवाने के लिए हवलदार सुखदेव सिंह मोगा जरिये पीपीए फिलौर फायर आर्म्स इंचार्ज के पास जमा करवाने के लिए भेजा था। पुलिस ने हाईकोर्ट की लताड़ के डर से थाना सिटी में 17 जनवरी 2015 को पीपीए फिलौर में फायर आर्म्स इंचार्ज अमरनाथ और हवलदार सुखदेव सिंह, जिसकी 7 जनवरी 2011 को मौत हो चुकी थी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इस के बाद पीपीए फिलौर में फायर आर्म्स इंचार्ज अमर नाथ ने कहा कि वह बेकसूर है। अदालत ने 24 अक्तूबर 2015 को यह केस रद्द की रिपोर्ट मंजूर कर ली। जस्टिस कुलदीप सिंह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 28 नवंबर 2017 को दो माह में पीड़ित को 4 लाख रुपये हर्जाना अदा करने का आदेश दिया है। एक सीनियर अधिकारी मुताबिक पुलिस अब फैसले खिलाफ हाईकोर्ट में डबल बेंच के पास दुबारा पिटीशन दायर कर रही है।
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