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वैवाहिक विवाद में कैंसिलेशन रिपोर्ट पर निर्णय लेते हुए अदालतें सहानुभूति दिखाएं: हाईकोर्ट

Fri, 06 Sep 2024 04:29 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2024 04:29 AM IST
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Courts should show sympathy while taking decision on cancellation report in marital dispute: High Court
चंडीगढ़। पति व ससुर पर महिला की ओर से दर्ज करवाई गई एफआईआर को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद से संबंधित मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट पर फैसला लेते हुए न्यायालयों को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। ऐसा दृष्टिकोण तब और अहम हो जाता है जब शिकायतकर्ता स्वयं उसे स्वीकार कर ले।इस मामले में पायल निवासी पत्नी ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ क्रूरता का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी। पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपों में दम नहीं है और कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी। कैंसिलेशन रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। कैंसिलेशन रिपोर्ट को पायल की अदालत ने स्वीकार करने से इन्कार करते हुए कहा कि यह मामला समझौते योग्य नहीं है और आगे जांच का आदेश दिया।
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इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले में दायर कैंसिलेशन रिपोर्ट पर फैसला लेते हुए सहानुभूतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ना चाहिए, न कि पांडित्यपूर्ण दृष्टिकोण से। कोर्ट ने कहा कि आधुनिक समाज में समझौता सद्भाव और व्यवस्थित व्यवहार की अनिवार्य शर्त है। समझौता न्याय की आत्मा है और यदि कोर्ट इस प्रक्रिया का उपयोग करता है तो सौहार्दपूर्ण माहौल को आगे बढ़ा सकते हैं। यह निश्चित रूप से पक्षों के बीच सौहार्द को बढ़ावा देगा और एक व्यवस्थित और शांत समाज का निर्माण करेगा।
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हाईकोर्ट ने सभी तथ्याें को देखने के बाद पाया कि एफआईआर दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक कलह का परिणाम थी। पूरी एफआईआर में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दहेज की मांग या किसी भी तरह की क्रूरता करने का कोई भी आरोप नहीं है। हाईकोर्ट ने माना कि एफआईआर को रद्द करने के लिए उपयुक्त मामला है। हाईकोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को दोषपूर्ण मानते हुए इसे खारिज कर दिया और एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है।
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