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Panchkula News: अदालतों की इमारतें जर्जर, कैसे होगा दिव्यांगों के लिए लिफ्ट की सुविधाओं का इंतजाम
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चंडीगढ़। न्यायिक परिसरों में दिव्यांगों के लिए उचित व्यवस्था न होने के मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की वकील तनु बेदी ने बताया कि हरियाणा व पंजाब की कई अदालतों की इमारतें ही जर्जर स्थिति में हैं। इनमें कैसे लिफ्ट जैसी सुविधाएं दी जा सकती हैं। इस दौरान चंडीगढ़ की अदालत के बारे में उन्होंने बताया कि एक्ट के अनुसार यहां दिव्यांगों के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इस जानकारी पर अब हाईकोर्ट ने हरियाणा व पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मालेरकोटला बार एसोसिएशन को भी पक्ष बना लिया है।
सिंगल बेंच ने मालेरकोटला की महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठाया था और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था। अब इस मामले का संज्ञान लेते हुए इस पर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई आरंभ हुई है। हाईकोर्ट में सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए अमरीक कौर ने मालेरकोटला की निचली अदालत में लंबित अपने मामलों की सुनवाई मालेरकोटला की ही दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश देने की मांग की थी।
याची नेे बताया कि वह 60 वर्षीय वृद्ध दिव्यांग महिला है जो चलने में असमर्थ है। उसका दाहिना पैर कट गया है जबकि उसका बायां पैर संक्रमित है। उसका केस मालेरकोटला की अदालत में प्रथम तल पर है और वहां पर किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को अदालती कार्यवाही में भाग लेने के लिए रैंप या एस्केलेटर का कोई प्रावधान नहीं है। वह भी प्रथम तल पर मौजूद अदालत में केस होने के कारण वहां पहुंच नहीं पा रही है जो केस में शामिल होने के अधिकार को छीन रहा है।
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संगरूर के जिला जज ने याची के आवेदन को मेडिकल रिकॉर्ड संलग्न न करने के चलते खारिज कर दिया था। सिंगल बेंच के आदेश पर बताया गया कि मालेरकोटला में भूतल पर दो, पहली मंजिल पर दो और शीर्ष मंजिल पर एक अदालत कक्ष है। न्यायिक परिसर में रैंप या एस्केलेटर भी मौजूद नहीं है। हाईकोर्ट ने अब याची का केस भूतल पर मौजूद अदालत में भेजने का जिला जज को आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा उदासीनता के साथ अपनाए गए मूक-बधिर दृष्टिकोण को माफ नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया था जिन्होंने इस पर जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई आरंभ की है।
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सिंगल बेंच ने मालेरकोटला की महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठाया था और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया था। अब इस मामले का संज्ञान लेते हुए इस पर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई आरंभ हुई है। हाईकोर्ट में सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए अमरीक कौर ने मालेरकोटला की निचली अदालत में लंबित अपने मामलों की सुनवाई मालेरकोटला की ही दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश देने की मांग की थी।
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याची नेे बताया कि वह 60 वर्षीय वृद्ध दिव्यांग महिला है जो चलने में असमर्थ है। उसका दाहिना पैर कट गया है जबकि उसका बायां पैर संक्रमित है। उसका केस मालेरकोटला की अदालत में प्रथम तल पर है और वहां पर किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को अदालती कार्यवाही में भाग लेने के लिए रैंप या एस्केलेटर का कोई प्रावधान नहीं है। वह भी प्रथम तल पर मौजूद अदालत में केस होने के कारण वहां पहुंच नहीं पा रही है जो केस में शामिल होने के अधिकार को छीन रहा है।
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संगरूर के जिला जज ने याची के आवेदन को मेडिकल रिकॉर्ड संलग्न न करने के चलते खारिज कर दिया था। सिंगल बेंच के आदेश पर बताया गया कि मालेरकोटला में भूतल पर दो, पहली मंजिल पर दो और शीर्ष मंजिल पर एक अदालत कक्ष है। न्यायिक परिसर में रैंप या एस्केलेटर भी मौजूद नहीं है। हाईकोर्ट ने अब याची का केस भूतल पर मौजूद अदालत में भेजने का जिला जज को आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा उदासीनता के साथ अपनाए गए मूक-बधिर दृष्टिकोण को माफ नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया था जिन्होंने इस पर जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई आरंभ की है।