{"_id":"617c542e169e6f71185bc979","slug":"controversy-sector-20-parking-case-stuck-between-2-23-and-2-74-crores-pkl-office-news-pkl431572416","type":"story","status":"publish","title_hn":"विवाद : सेक्टर-20 की पार्किंग का मामला 2.23 और 2.74 करोड़ के बीच फंसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विवाद : सेक्टर-20 की पार्किंग का मामला 2.23 और 2.74 करोड़ के बीच फंसा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचकूला। सेक्टर-20 की पार्किंग का टेंडर अलॉट करने को लेकर निगम आयुक्त धर्मवीर सिंह असमंजस में फंस गए हैं। निगम द्वारा अभी तक इस पेड़ पार्किंग का टेंडर अलॉट नहीं किया गया है। जिसे सफल बोलीदाता नगर निगम मान रहा है उसका रेट दूसरी कंपनी से 51 लाख रुपये कम है। ऐसे में निगम को इतना घाटा उठाने के लिए अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि भी तैयार नहीं हैं। इस पार्किंग का टेंडर दो साल के लिए अलॉट किया जाना है। टेंडर की शर्तों के मुताबिक दो पहिया वाहन के टैक्स सहित छह रुपये, चार पहिया वाहन के 12 रुपये, कामर्शियल वाहन के 48 रुपये लिए जाने हैं।
जानकारी के मुताबिक, दो कंपनियों के बीच इस टेंडर को लेने के लिए काफी घमासान चल रहा है। निगम द्वारा जिस बोली दाता को सफल माना जा रहा है उसने दो साल के 2.23 करोड़ रुपये देने की बात कही गई। जबकि, दूसरी कंपनी रामसुंदर प्रसाद सिंह ने भी टेंडर भरा था। इस कंपनी ने टेंडर में स्पष्ट लिखा था कि वह एक वर्ष के हिसाब से एक करोड़ 37 लाख 37 हजार 637 रुपये भरे थे, जिस हिसाब से कंपनी नगर निगम को 2 साल के 2.74 करोड़ 75,274 रुपये देने को तैयार है। कंपनी के प्रबंधकों का दावा है कि निगम द्वारा जिस कंपनी को सफल बोली दाता बताया जा रहा है वह टेंडर की मुख्य शर्त को भी पूरा नहीं करती।
टेंडर में शर्त थी कि सफल बोली दाता की सालाना टर्नओवर एक करोड़ रुपये होनी चाहिए, लेकिन कंपनी द्वारा जिन सेक्टर-8, 9 और 10 की पार्किंग का हवाला दिया है, उसका पैसा जिला बाल कल्याण परिषद को केवल 40 से 50 प्रतिशत ही दिया जा रहा है। केवल एक सीए का ही पत्र लगाकर टर्नओवर की बात कही है। उन्होंने कहा कि निगम को उनकी कंपनी 51 लाख रुपये अतिरिक्त आमदनी दे रही है। कंपनी का दावा है कि प्रतिवर्ष के हिसाब से रकम टेंडर भरकर लिखी है, इसलिए उसे किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
रामसुंदर प्रसाद सिंह कंपनी के प्रबंधकों के मुताबिक यदि नगर निगम के प्रशासक सहित अन्य अधिकारियों ने गलत तरीके से इस कंपनी को टेंडर अलॉट किया तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। कंपनी ने हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता और मेयर कुलभूषण गोयल को इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि पार्किंग से एकत्रित होने वाले करोड़ों रुपये को शहर की डेवलपमेंट पर लगाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे टेंडर अलॉट नहीं किया जाना, तो इसे रिकॉल किया जाए।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, दो कंपनियों के बीच इस टेंडर को लेने के लिए काफी घमासान चल रहा है। निगम द्वारा जिस बोली दाता को सफल माना जा रहा है उसने दो साल के 2.23 करोड़ रुपये देने की बात कही गई। जबकि, दूसरी कंपनी रामसुंदर प्रसाद सिंह ने भी टेंडर भरा था। इस कंपनी ने टेंडर में स्पष्ट लिखा था कि वह एक वर्ष के हिसाब से एक करोड़ 37 लाख 37 हजार 637 रुपये भरे थे, जिस हिसाब से कंपनी नगर निगम को 2 साल के 2.74 करोड़ 75,274 रुपये देने को तैयार है। कंपनी के प्रबंधकों का दावा है कि निगम द्वारा जिस कंपनी को सफल बोली दाता बताया जा रहा है वह टेंडर की मुख्य शर्त को भी पूरा नहीं करती।
विज्ञापन
टेंडर में शर्त थी कि सफल बोली दाता की सालाना टर्नओवर एक करोड़ रुपये होनी चाहिए, लेकिन कंपनी द्वारा जिन सेक्टर-8, 9 और 10 की पार्किंग का हवाला दिया है, उसका पैसा जिला बाल कल्याण परिषद को केवल 40 से 50 प्रतिशत ही दिया जा रहा है। केवल एक सीए का ही पत्र लगाकर टर्नओवर की बात कही है। उन्होंने कहा कि निगम को उनकी कंपनी 51 लाख रुपये अतिरिक्त आमदनी दे रही है। कंपनी का दावा है कि प्रतिवर्ष के हिसाब से रकम टेंडर भरकर लिखी है, इसलिए उसे किसी भी हालत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
रामसुंदर प्रसाद सिंह कंपनी के प्रबंधकों के मुताबिक यदि नगर निगम के प्रशासक सहित अन्य अधिकारियों ने गलत तरीके से इस कंपनी को टेंडर अलॉट किया तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। कंपनी ने हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता और मेयर कुलभूषण गोयल को इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि पार्किंग से एकत्रित होने वाले करोड़ों रुपये को शहर की डेवलपमेंट पर लगाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे टेंडर अलॉट नहीं किया जाना, तो इसे रिकॉल किया जाए।