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अनुबंधित बिजली कर्मचारी 22-23 को कुरुक्षेत्र में करेंगे प्रदेश स्तरीय बैठक
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चंडीगढ़। अनुबंधित विद्युत कर्मचारी संघ हरियाणा (भारतीय मजदूर संघ) मांगों की बार-बार लागू नहीं होने से नाखुश है। संघ से जुड़े कर्मचारियों ने 22-23 जनवरी को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय बैठक करने का निर्णय लिया है।
संघ के प्रदेश महासचिव विक्रम श्योराण ने कहा कि बिजली विभाग में कार्यरत अनुबंधित कर्मचारी कोरोना महामारी में भी जान जोखिम में डालकर लगातार आपूर्ति सुचारु रूप से चलाए हुए हैं। बावजूद इसके उनकी मांगों और समस्याओं को लेकर सरकार और विभाग अनसुना कर रहे हैं। मांगें मानने के बावजूद लागू न करने से संघ में रोष है। कुरुक्षेत्र में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में राज्य स्तरीय आंदोलन का बिगुल बजाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
अनुबंधित विद्युत कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश बालू ने बताया कि 26 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री की भारतीय मजदूर संघ के साथ बैठक हुई थी। उसमें फैसला लिया गया था कि कौशल विकास निगम को शुरू कर जल्द बिजली विभाग से ठेकेदारों को बाहर किया जाएगा और जुलाई से निगम रेट लागू होंगे। 6 महीने बीतने के बाद भी स्थिति वही है।
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वेतन की सूची जारी होने से नाराजगी
जिस प्रकार के वेतन की सूची जारी हुई है उससे कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि वेतन 2018-19 के डीसी रेट को देखकर बनाया गया है। इसके बाद 2019-20 और 2020-21 के रेट जारी हो चुके हैं। संगठन की मांग है कि इन रेट को 2020-21 के रेट को देखते हुए संशोधन किया जाए। विद्युत निगम में कार्यरत अनुबंधित कर्मचारियों को मार्च में ठेकेदारों के नए टेंडर होने से पहले कौशल विकास निगम में शामिल कर ठेकेदारी प्रथा से मुक्ति दिलाएं। उन्हें कैशलेस मेडिकल, जोखिम भत्ता और सभी प्रकार के सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जाएं।
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संघ के प्रदेश महासचिव विक्रम श्योराण ने कहा कि बिजली विभाग में कार्यरत अनुबंधित कर्मचारी कोरोना महामारी में भी जान जोखिम में डालकर लगातार आपूर्ति सुचारु रूप से चलाए हुए हैं। बावजूद इसके उनकी मांगों और समस्याओं को लेकर सरकार और विभाग अनसुना कर रहे हैं। मांगें मानने के बावजूद लागू न करने से संघ में रोष है। कुरुक्षेत्र में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में राज्य स्तरीय आंदोलन का बिगुल बजाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
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अनुबंधित विद्युत कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश बालू ने बताया कि 26 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री की भारतीय मजदूर संघ के साथ बैठक हुई थी। उसमें फैसला लिया गया था कि कौशल विकास निगम को शुरू कर जल्द बिजली विभाग से ठेकेदारों को बाहर किया जाएगा और जुलाई से निगम रेट लागू होंगे। 6 महीने बीतने के बाद भी स्थिति वही है।
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वेतन की सूची जारी होने से नाराजगी
जिस प्रकार के वेतन की सूची जारी हुई है उससे कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि वेतन 2018-19 के डीसी रेट को देखकर बनाया गया है। इसके बाद 2019-20 और 2020-21 के रेट जारी हो चुके हैं। संगठन की मांग है कि इन रेट को 2020-21 के रेट को देखते हुए संशोधन किया जाए। विद्युत निगम में कार्यरत अनुबंधित कर्मचारियों को मार्च में ठेकेदारों के नए टेंडर होने से पहले कौशल विकास निगम में शामिल कर ठेकेदारी प्रथा से मुक्ति दिलाएं। उन्हें कैशलेस मेडिकल, जोखिम भत्ता और सभी प्रकार के सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जाएं।