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Panchkula News: पंजाब सरकार को डीए बकाया मामले में अवमानना नोटिस, अगली सुनवाई 27 सितंबर को
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तय समय सीमा में आदेश का पालन न होने के चलते दाखिल की गई है याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान का मामला शुक्रवार को एक बार फिर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने डीए मामले में पहले दिए गए आदेश के पालन से जुड़ी अवमानना याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस ऑफ मोशन जारी किया है। अंतरिम आदेश के अनुसार, अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी जिससे सरकार पर कानूनी दबाव बढ़ गया है।
यह अवमानना याचिका निर्मल सिंह धनौआ ने दायर की है। इसमें केएपी सिन्हा को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका डीए मामले में पारित आदेश के पालन से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह मामला उठाया कि पहले दिए गए आदेश को लागू किया जाना जरूरी है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया।
अब सरकार को अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखना होगा। इस सुनवाई में डीए से जुड़े पहले के आदेश के पालन की स्थिति पर आगे सुनवाई होगी। कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर अब इस मामले की अगली सुनवाई पर रहेगी।
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सरकार को स्पष्ट करना होगा रुख
अदालत की ओर से नोटिस जारी होने के बाद पंजाब सरकार को डीए मामले में अपना रुख स्पष्ट करना होगा। उसे पूर्व आदेश के पालन की स्थिति भी बतानी होगी। 27 सितंबर की सुनवाई इस लिहाज से अहम होगी। इसमें अदालत के सामने सरकार का जवाब और लंबित डीए के भुगतान की दिशा तय होगी।
हाईकोर्ट का 3 अगस्त का आदेश
3 अगस्त को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ा झटका दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सरकार कर्मचारियों का वैधानिक बकाया चुकाने से पहले बड़े स्तर पर विज्ञापन अभियान नहीं चला सकेगी। अदालत ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के वैध अधिकारों का भुगतान टालकर सार्वजनिक धन को प्रचार पर खर्च नहीं कर सकती। राज्य सरकार ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) के भुगतान का मामला शुक्रवार को एक बार फिर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने डीए मामले में पहले दिए गए आदेश के पालन से जुड़ी अवमानना याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस ऑफ मोशन जारी किया है। अंतरिम आदेश के अनुसार, अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी जिससे सरकार पर कानूनी दबाव बढ़ गया है।
यह अवमानना याचिका निर्मल सिंह धनौआ ने दायर की है। इसमें केएपी सिन्हा को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका डीए मामले में पारित आदेश के पालन से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह मामला उठाया कि पहले दिए गए आदेश को लागू किया जाना जरूरी है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया।
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अब सरकार को अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखना होगा। इस सुनवाई में डीए से जुड़े पहले के आदेश के पालन की स्थिति पर आगे सुनवाई होगी। कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर अब इस मामले की अगली सुनवाई पर रहेगी।
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सरकार को स्पष्ट करना होगा रुख
अदालत की ओर से नोटिस जारी होने के बाद पंजाब सरकार को डीए मामले में अपना रुख स्पष्ट करना होगा। उसे पूर्व आदेश के पालन की स्थिति भी बतानी होगी। 27 सितंबर की सुनवाई इस लिहाज से अहम होगी। इसमें अदालत के सामने सरकार का जवाब और लंबित डीए के भुगतान की दिशा तय होगी।
हाईकोर्ट का 3 अगस्त का आदेश
3 अगस्त को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ा झटका दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सरकार कर्मचारियों का वैधानिक बकाया चुकाने से पहले बड़े स्तर पर विज्ञापन अभियान नहीं चला सकेगी। अदालत ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के वैध अधिकारों का भुगतान टालकर सार्वजनिक धन को प्रचार पर खर्च नहीं कर सकती। राज्य सरकार ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला दिया था लेकिन हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करने से इन्कार कर दिया।