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पदोन्नति के लिए दावे पर विचार का कर्मी को मौलिक अधिकार, पदोन्नति का नहीं : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पटियाला निवासी एक महिला की सीनियर टाउन प्लानर के पद पर प्रमोशन की याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि कर्मचारी को प्रमोशन के लिए विचार का मौलिक अधिकार है लेकिन यह अधिकार पदोन्नति मिले यह सुनिश्चित नहीं करता।
स्थापित कानून के अनुसार प्रमोशन न तो कोई पक्का अधिकार है और न ही मौलिक अधिकार। केवल प्रमोशन के लिए विचार किया जाना ही एक मौलिक अधिकार है और ऐसे में याची को सीनियर टाउन प्लानर के पद पर प्रमोट न करने में कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने उसकी उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें उसने सीनियर टाउन प्लानर के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वेतन और भत्ते मांगे थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस तारीख को मौजूदा ड्यूटी का चार्ज दिया गया था उससे लेकर उसकी रिटायरमेंट की तारीख तक सीनियर टाउन प्लानर के पद के लिए वेतनमान की हकदार है।
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याचिकाकर्ता 1990 में पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में जूनियर ड्राफ्ट्समैन के पद पर रेगुलर आधार पर शामिल हुई थी और 2008 में उसे प्लानिंग ड्राफ्ट्समैन के पद पर प्रमोट किया गया था। उसने 2023 में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर के रूप में अपनी 5 साल की सेवा पूरी की और सीनियर टाउन प्लानर के पद पर प्रमोशन के लिए योग्य हो गई।
रिटायरमेंट से पहले सीनियर टाउन प्लानर के पद पर आगे प्रमोशन के लिए उस पर विचार करने के उसके आवेदन पर विचार नहीं किया गया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक ने बताया कि याचिकाकर्ता के पास दो दिव्यांगता सर्टिफिकेट थे इसलिए शक पैदा हुआ। मेडिकल बोर्ड ने उसकी सुनने की दिव्यांगता को स्थायी घोषित नहीं किया और इसके परिणामस्वरूप उसे दिव्यांग मानने का उसका दावा सक्षम अथॉरिटी ने खारिज कर दिया और उसे रिटायर करने का फैसला किया क्योंकि वह 58 साल की हो गई थी।
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स्थापित कानून के अनुसार प्रमोशन न तो कोई पक्का अधिकार है और न ही मौलिक अधिकार। केवल प्रमोशन के लिए विचार किया जाना ही एक मौलिक अधिकार है और ऐसे में याची को सीनियर टाउन प्लानर के पद पर प्रमोट न करने में कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने उसकी उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें उसने सीनियर टाउन प्लानर के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वेतन और भत्ते मांगे थे।
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हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस तारीख को मौजूदा ड्यूटी का चार्ज दिया गया था उससे लेकर उसकी रिटायरमेंट की तारीख तक सीनियर टाउन प्लानर के पद के लिए वेतनमान की हकदार है।
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याचिकाकर्ता 1990 में पंजाब के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में जूनियर ड्राफ्ट्समैन के पद पर रेगुलर आधार पर शामिल हुई थी और 2008 में उसे प्लानिंग ड्राफ्ट्समैन के पद पर प्रमोट किया गया था। उसने 2023 में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर के रूप में अपनी 5 साल की सेवा पूरी की और सीनियर टाउन प्लानर के पद पर प्रमोशन के लिए योग्य हो गई।
रिटायरमेंट से पहले सीनियर टाउन प्लानर के पद पर आगे प्रमोशन के लिए उस पर विचार करने के उसके आवेदन पर विचार नहीं किया गया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक ने बताया कि याचिकाकर्ता के पास दो दिव्यांगता सर्टिफिकेट थे इसलिए शक पैदा हुआ। मेडिकल बोर्ड ने उसकी सुनने की दिव्यांगता को स्थायी घोषित नहीं किया और इसके परिणामस्वरूप उसे दिव्यांग मानने का उसका दावा सक्षम अथॉरिटी ने खारिज कर दिया और उसे रिटायर करने का फैसला किया क्योंकि वह 58 साल की हो गई थी।