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Panchkula News: सीबीएसई स्कूलों में कंपोजिट स्किल लैब अनिवार्य

Thu, 09 Apr 2026 01:30 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:30 AM IST
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Composite Skill Labs Mandatory in CBSE Schools
थ्योरी के साथ व्यावहारिक कौशल पर जोर
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नए स्कूलों के लिए जरूरी शर्त; पुराने स्कूलों को तीन साल का समय
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में अब पढ़ाई केवल थ्योरी तक सीमित नहीं रहेगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत सभी स्कूलों में कंपोजिट स्किल लैब स्थापित करना अनिवार्य कर दिया है। इस पहल के तहत छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जाएंगे।
सीबीएसई के क्षेत्रीय अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि कंपोजिट स्किल लैब को आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां विद्यार्थियों को विभिन्न व्यावसायिक कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे सीखी गई बातों को व्यवहार में भी लागू कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि पंचकूला जिले के करीब 50 स्कूलों में यह लैब बनाई जाएगी।
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उन्होंने कहा कि इस पहल से छात्रों की अकादमिक समझ मजबूत होगी और उनमें रोजगारपरक दक्षता विकसित होगी, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयार हो सकेंगे।
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कौशल और व्यावसायिक गतिविधियां सीखेंगे छात्र
नई व्यवस्था के तहत छात्र कंप्यूटर, तकनीकी कार्य, डिजाइन, संचार कौशल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां सीख सकेंगे। इससे उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

सीबीएसई के अनुसार, नए संबद्धता लेने वाले स्कूलों के लिए स्किल लैब बनाना अनिवार्य होगा, जबकि पहले से जुड़े स्कूलों को यह सुविधा अगले तीन वर्षों में विकसित करनी होगी। इसके लिए 22 अगस्त 2027 तक की समय सीमा तय की गई है। बोर्ड ने उपकरणों की सूची, लैब की संरचना, सुरक्षा मानक और संचालन से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की है।

छठी से 12वीं तक के लिए अलग लैब
जिन स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ाई होती है, वहां दो अलग-अलग स्किल लैब बनाई जाएंगी। एक लैब कक्षा 6 से 10 और दूसरी 11-12 के छात्रों के लिए होगी। प्रत्येक लैब का क्षेत्रफल लगभग 400 वर्गफुट निर्धारित किया गया है, जिसमें आधुनिक उपकरण और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य होगा।


कोट
छात्र अब केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन में उपयोगी कौशल भी सिखाए जाएंगे। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश को कुशल कार्यबल मिलेगा।
- राजेश गुप्ता, क्षेत्रीय अधिकारी, सीबीएसई, पंचकूला
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