{"_id":"60ad48d28ebc3e43a10cf59d","slug":"colonel-punjab-singh-who-defeated-all-the-enemies-also-won-from-corona-later-lost-the-battle-of-life-panchkula-news-pkl4145207161","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुश्मनों को हराने वाले कर्नल पंजाब सिंह कोरोना से भी जीते, बाद में हार गए जिंदगी की जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुश्मनों को हराने वाले कर्नल पंजाब सिंह कोरोना से भी जीते, बाद में हार गए जिंदगी की जंग
विज्ञापन
चंडीगढ़। वर्ष 1971 में दुश्मनों का बहादुरी से मुकाबला कर विजय हासिल करने वाले 79 वर्षीय कर्नल पंजाब सिंह ने अंतिम समय तक हौसला नहीं हारा। कोरोना संक्रमित होने के बाद वे स्वस्थ हो गए थे, लेकिन बाद में उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा। उन्हें यहां कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार को वे जिदंगी की जंग हार गए। पांच दिन पहले 21 मई को बड़े बेटे अनिल कुमार की कोरोना से मौत होने के बाद वे कुछ टूट से गए थे।
पंजाब सिंह का जन्म 15 फरवरी, 1942 को हिमाचल के हमीरपुर में हुआ था। 16 दिसंबर, 1967 को सिख रेजीमेंट की 6 बटालियन में भर्ती हुए थे। 12 अक्तूूबर, 1986 से 29 जुलाई, 1990 तक बटालियन की कमान संभाली। सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल पंजाब सिंह हिमाचल में सैनिक कल्याण बोर्ड के निदेशक भी रहे। वे इंडियन एक्स सर्विस लीग, दक्षिणी क्षेत्र के हिमाचल प्रदेश के उपाध्यक्ष भी रह चुके। उनके परिवार में पत्नी विद्या देवी, बेटी उषा, पुत्र अजय कुमार, दामाद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे, बहू स्मृति, सुमन और पोते-पोतियां हैं।
..................
आपरेशन कैक्टस लिली में बहादुरी पर मिला वीरचक्र
वर्ष 1971 के युद्ध में ऑपरेशन कैक्टस लिली के दौरान 6 सिख बटालियन ने पुंछ के ऊपर की ऊंचाई पर 13 किमी के अग्रभाग पर कब्जा कर लिया था। मेजर पंजाब सिंह टुंड में तैनात एक कंपनी की कमान संभाल रहे थे। दुश्मन ने 3 दिसंबर, 1971 को हमला किया। अगले 72 घंटे पंजाब सिंह के नेतृत्व में 6 सिख बटालियन के सैनिकों ने बहादुरी से दुश्मनों का सामना किया। दुश्मन ने दो रातों में नौ बार हमला किया, जिसे उन्होंने बहादुरी के साथ नाकाम कर दिया था। इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें वीरचक्र से सम्मानित किया गया। आपरेशन लिली बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराने के लिए था। इसके तहत भारतीय सेना ने बांग्लादेश की मदद की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब सिंह का जन्म 15 फरवरी, 1942 को हिमाचल के हमीरपुर में हुआ था। 16 दिसंबर, 1967 को सिख रेजीमेंट की 6 बटालियन में भर्ती हुए थे। 12 अक्तूूबर, 1986 से 29 जुलाई, 1990 तक बटालियन की कमान संभाली। सेवानिवृत्ति के बाद कर्नल पंजाब सिंह हिमाचल में सैनिक कल्याण बोर्ड के निदेशक भी रहे। वे इंडियन एक्स सर्विस लीग, दक्षिणी क्षेत्र के हिमाचल प्रदेश के उपाध्यक्ष भी रह चुके। उनके परिवार में पत्नी विद्या देवी, बेटी उषा, पुत्र अजय कुमार, दामाद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे, बहू स्मृति, सुमन और पोते-पोतियां हैं।
विज्ञापन
..................
आपरेशन कैक्टस लिली में बहादुरी पर मिला वीरचक्र
वर्ष 1971 के युद्ध में ऑपरेशन कैक्टस लिली के दौरान 6 सिख बटालियन ने पुंछ के ऊपर की ऊंचाई पर 13 किमी के अग्रभाग पर कब्जा कर लिया था। मेजर पंजाब सिंह टुंड में तैनात एक कंपनी की कमान संभाल रहे थे। दुश्मन ने 3 दिसंबर, 1971 को हमला किया। अगले 72 घंटे पंजाब सिंह के नेतृत्व में 6 सिख बटालियन के सैनिकों ने बहादुरी से दुश्मनों का सामना किया। दुश्मन ने दो रातों में नौ बार हमला किया, जिसे उन्होंने बहादुरी के साथ नाकाम कर दिया था। इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें वीरचक्र से सम्मानित किया गया। आपरेशन लिली बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराने के लिए था। इसके तहत भारतीय सेना ने बांग्लादेश की मदद की थी।
विज्ञापन