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पंजाब के वित्तीय हक के लिए दिल्ली में प्रदर्शन करें सीएम: बाजवा
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा, केजरीवाल के लिए भी मान ने किया था प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान से आग्रह किया कि सूबे के वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए वह केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करें।
बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री मान ने अपनी पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मिलकर इसी साल अप्रैल में, दिल्ली की शराब नीति की जांच कर रही सीबीआई द्वारा आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से पूछताछ किए जाने के खिलाफ धरना दिया था। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान भारत की शीर्ष जांच एजेंसियों में से एक द्वारा किसी से पूछताछ के खिलाफ धरने पर बैठ सकते हैं, तो वह राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध क्यों नहीं कर सकते? भगवंत मान को इस पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।
रविवार को जारी बयान में बाजवा ने कहा कि धन की कमी से जूझ रहे पंजाब को हाल ही में केंद्र से कुछ बड़े वित्तीय झटके लगे हैं और उनमें से कुछ आप सरकार की अपनी नीतियों का परिणाम हैं। केंद्र सरकार ने पंजाब की उधार सीमा को 18,000 करोड़ घटाते हुए 39,000 करोड़ से 21,000 करोड़ रुपये कर दिया है। बाजवा ने कहा कि अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य में पुरानी पेंशन योजना बहाल होने के कारण ऐसा हुआ है। इसके अलावा केंद्र ने 2,600 करोड़ रुपये का अनुदान (पूंजीगत परिसंपत्तियों के विकास के लिए विशेष सहायता अनुदान) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 800 करोड़ रुपये के अनुदान पर भी रोक लगा दी है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने पंजाब की आप सरकार को केंद्र द्वारा वित्त पोषित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) को आम आदमी क्लीनिक में बदलने को लेकर चेतावनी दी थी।
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास फीस (आरडीएफ) को पूरी तरह से हटा दिया है और बाजार विकास फीस (एमडीएफ) को 3 से घटाकर 2 फीसदी कर दिया है। इस कदम से राज्य को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। केंद्र ने अभी तक 4,000 करोड़ रुपये का आरडीएफ जारी नहीं किया है, जो सड़कों के निर्माण सहित पंजाब के ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण निधि है। बाजवा ने सवाल किया कि क्या इससे पंजाब के मुख्यमंत्री निराश नहीं होते? वे दिल्ली में धरना-प्रदर्शन क्यों नहीं करते?
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान से आग्रह किया कि सूबे के वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए वह केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करें।
बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री मान ने अपनी पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मिलकर इसी साल अप्रैल में, दिल्ली की शराब नीति की जांच कर रही सीबीआई द्वारा आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से पूछताछ किए जाने के खिलाफ धरना दिया था। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान भारत की शीर्ष जांच एजेंसियों में से एक द्वारा किसी से पूछताछ के खिलाफ धरने पर बैठ सकते हैं, तो वह राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए विरोध क्यों नहीं कर सकते? भगवंत मान को इस पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।
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रविवार को जारी बयान में बाजवा ने कहा कि धन की कमी से जूझ रहे पंजाब को हाल ही में केंद्र से कुछ बड़े वित्तीय झटके लगे हैं और उनमें से कुछ आप सरकार की अपनी नीतियों का परिणाम हैं। केंद्र सरकार ने पंजाब की उधार सीमा को 18,000 करोड़ घटाते हुए 39,000 करोड़ से 21,000 करोड़ रुपये कर दिया है। बाजवा ने कहा कि अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य में पुरानी पेंशन योजना बहाल होने के कारण ऐसा हुआ है। इसके अलावा केंद्र ने 2,600 करोड़ रुपये का अनुदान (पूंजीगत परिसंपत्तियों के विकास के लिए विशेष सहायता अनुदान) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 800 करोड़ रुपये के अनुदान पर भी रोक लगा दी है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने पंजाब की आप सरकार को केंद्र द्वारा वित्त पोषित स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) को आम आदमी क्लीनिक में बदलने को लेकर चेतावनी दी थी।
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास फीस (आरडीएफ) को पूरी तरह से हटा दिया है और बाजार विकास फीस (एमडीएफ) को 3 से घटाकर 2 फीसदी कर दिया है। इस कदम से राज्य को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। केंद्र ने अभी तक 4,000 करोड़ रुपये का आरडीएफ जारी नहीं किया है, जो सड़कों के निर्माण सहित पंजाब के ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण निधि है। बाजवा ने सवाल किया कि क्या इससे पंजाब के मुख्यमंत्री निराश नहीं होते? वे दिल्ली में धरना-प्रदर्शन क्यों नहीं करते?