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चावला सुसाइड केस : 09 पेज का सुसाइड नोट बरामद, एचपीसीएल के तीन अधिकारियों समेत 6 पर केस दर्ज
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उद्योगपति गुरु कृपा सिंह चावला का पोस्टमार्टम सेक्टर 6 सिविल हॉस्पिटल में हुआ, इस दौरान पारिवारि?
- फोटो : PKL OFFICE
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पंचकूला। ट्राइसिटी के प्रसिद्ध उद्योगपति गुरकृपाल सिंह चावला ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अधिकारियों और कुछ अन्य लोगों से तंग आकर आत्महत्या की थी। इसका खुलासा वीरवार को पुलिस और फोरेंसिक टीम को जांच के दौरान सेक्टर-1 स्थित होटल रेड बिशप के रूम से बरामद नौ पेज के सुसाइड नोट से हुआ है। जांच टीम के हाथ इसके अलावा एक पेन ड्राइव और कुछ जरूरी सामान भी लगे हैं। उधर, पुलिस ने वीरवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग से मौत की पुष्टि हुई है।
सेक्टर-5 थाना पुलिस ने मृतक गुरकृपाल सिंह चावला के बेटे हरमीत सिंह चावला की शिकायत पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम के तीन अधिकारियों समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उद्योगपति गुरकृपाल सिंह ने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए एचपीसीएल के तीन अधिकारियों शलभ राज गुप्ता, राजीव बंसल, निखिल सूद के अलावा विजय कुमार कामरा और उसके भाई राकेश कुमार और भतीजे ईशान कामरा को जिम्मेदार ठहराया है।
76 वर्षीय द्योगपति गुरकृपाल सिंह चावला ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि आरोपियों नेधोखाधड़ी एवं साजिश रचकर मेरी संपत्ति लूटने की कोशिश की। पत्नी जगजीत कौर चावला के नाम पर दून चंडीगढ़-खरड़ रोड पर जो पेट्रोल पंप था, उसे आरोपियों ने पंजाब पुलिस एवं शलभ राज गुप्ता के साथ मिलकर जबरदस्ती डीलरशिप स्थानांतरित करवा ली। उन्होंनेे इस संबंध एचपीसीएल के सीएमडी से शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। क्योंकि यह लोग उन्हें बर्बाद करने पर उतारू थे। एचपीसीएल के जोनल मैनेजर एमएस यादव ने शलभ राज गुप्ता को बचाने के लिए मुख्यालय के अधिकारियों को प्रभावित किया, ताकि कोई साक्ष्य न रहे।
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पिछले साल मांगी थी आत्महत्या की अनुमति
सुसाइड नोट में गुरकृपाल चावला ने लिखा है कि पेट्रोल एवं डीजल के वैट की विसंगतियों के चलते मैं बैंक करप्ट हो गया। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को आईओसी के डीलर्स हर महीने 35 लाख रुपये इकट्ठा करके देते थे। इसी कारण पिछलेे वर्ष आत्महत्या करने के लिए मैंने अनुमति मांगी थी। सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों और ईंधन माफिया के कारण 80 लाख रुपये मासिक का नुकसान उठाना पड़ा, जोकि सेल मोहाली एवं दून के पेट्रोल पंप पर अक्टूबर 2017 तक थी। उन्होंने अपनी संपत्ति बेचने की कोशिश की, लेकिन एचपीसी के अधिकारी चाहते थे कि संपत्ति वह विजय कुमार कामरा को दे दें, जोकि पेट्रोल तस्करी के कारोबार में संलिप्त है। उन्होंने एचपीसी के मुख्यालय पर कई बार रिमांइडर दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
सुसाइड नोट में पेट्रोल माफिया पर साधा निशाना
सुसाइड नोट में उद्योगपति गुरकृपाल सिंह चावला ने लिखा है कि वह नार्थ इंडिया में सबसे ज्यादा पेट्रोल बेचते थे जो पेट्रोल माफिया को बर्दाश्त नहीं था। उन्होंने सेक्टर-9 में एक घर को खरीदने के लिए समझौता किया, लेकिन उन्होंने उनसे धोखा किया क्योंकि उन्हें 2005-06 से बेचने की अनुमति नहीं थी। उनकी छोटी बेटी की शादी मुंबई में हुई थी। उन्होंने उसके ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दी थी। उन्होंने पंजाब पुलिस के साथ हाथ मिला लिया और उनके साथ चंडीगढ़ पुलिस भी मिल गई। मेरे खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए। समझौते के लिए रिश्वत मांगी गई। उन्होंने लिखा कि वह एक साधारण बिजनेसमैन थे। चावला ने सीधे तौर पर पेट्रोलियम माफिया को टारगेट किया है, जिसके कारण उन्हें घाटा उठाना पड़ा।
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सेक्टर-5 थाना पुलिस ने मृतक गुरकृपाल सिंह चावला के बेटे हरमीत सिंह चावला की शिकायत पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम के तीन अधिकारियों समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उद्योगपति गुरकृपाल सिंह ने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए एचपीसीएल के तीन अधिकारियों शलभ राज गुप्ता, राजीव बंसल, निखिल सूद के अलावा विजय कुमार कामरा और उसके भाई राकेश कुमार और भतीजे ईशान कामरा को जिम्मेदार ठहराया है।
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76 वर्षीय द्योगपति गुरकृपाल सिंह चावला ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि आरोपियों नेधोखाधड़ी एवं साजिश रचकर मेरी संपत्ति लूटने की कोशिश की। पत्नी जगजीत कौर चावला के नाम पर दून चंडीगढ़-खरड़ रोड पर जो पेट्रोल पंप था, उसे आरोपियों ने पंजाब पुलिस एवं शलभ राज गुप्ता के साथ मिलकर जबरदस्ती डीलरशिप स्थानांतरित करवा ली। उन्होंनेे इस संबंध एचपीसीएल के सीएमडी से शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। क्योंकि यह लोग उन्हें बर्बाद करने पर उतारू थे। एचपीसीएल के जोनल मैनेजर एमएस यादव ने शलभ राज गुप्ता को बचाने के लिए मुख्यालय के अधिकारियों को प्रभावित किया, ताकि कोई साक्ष्य न रहे।
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पिछले साल मांगी थी आत्महत्या की अनुमति
सुसाइड नोट में गुरकृपाल चावला ने लिखा है कि पेट्रोल एवं डीजल के वैट की विसंगतियों के चलते मैं बैंक करप्ट हो गया। चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को आईओसी के डीलर्स हर महीने 35 लाख रुपये इकट्ठा करके देते थे। इसी कारण पिछलेे वर्ष आत्महत्या करने के लिए मैंने अनुमति मांगी थी। सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों और ईंधन माफिया के कारण 80 लाख रुपये मासिक का नुकसान उठाना पड़ा, जोकि सेल मोहाली एवं दून के पेट्रोल पंप पर अक्टूबर 2017 तक थी। उन्होंने अपनी संपत्ति बेचने की कोशिश की, लेकिन एचपीसी के अधिकारी चाहते थे कि संपत्ति वह विजय कुमार कामरा को दे दें, जोकि पेट्रोल तस्करी के कारोबार में संलिप्त है। उन्होंने एचपीसी के मुख्यालय पर कई बार रिमांइडर दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
सुसाइड नोट में पेट्रोल माफिया पर साधा निशाना
सुसाइड नोट में उद्योगपति गुरकृपाल सिंह चावला ने लिखा है कि वह नार्थ इंडिया में सबसे ज्यादा पेट्रोल बेचते थे जो पेट्रोल माफिया को बर्दाश्त नहीं था। उन्होंने सेक्टर-9 में एक घर को खरीदने के लिए समझौता किया, लेकिन उन्होंने उनसे धोखा किया क्योंकि उन्हें 2005-06 से बेचने की अनुमति नहीं थी। उनकी छोटी बेटी की शादी मुंबई में हुई थी। उन्होंने उसके ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दी थी। उन्होंने पंजाब पुलिस के साथ हाथ मिला लिया और उनके साथ चंडीगढ़ पुलिस भी मिल गई। मेरे खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए। समझौते के लिए रिश्वत मांगी गई। उन्होंने लिखा कि वह एक साधारण बिजनेसमैन थे। चावला ने सीधे तौर पर पेट्रोलियम माफिया को टारगेट किया है, जिसके कारण उन्हें घाटा उठाना पड़ा।