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Panchkula News: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्र में हाहाकार, 30 घंटे ठप रही बिजली आपूर्ति
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पंचकूला। बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर ग्रामीण क्षेत्र में देखने को मिला। टपरियां फीडर से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के कारण आसपास के कई गांवों में करीब 30 घंटे तक बिजली गुल रही। बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे से बंद हुई बिजली शुक्रवार शाम पांच बजे बहाल हो सकी। लंबे समय तक बिजली आपूर्ति ठप रहने से ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बिजली नहीं होने से गांवों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित रही। लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया।
ग्रामीण क्षेत्र के टपरियां, त्रिलोकपुर, गणेशपुर, दुल्लोपुर, खेतपराली, दुधगढ़, सबीलपुर, टिब्बी, बु्ंगा, बेलवाली, आसरेवाली, बलौटी,गणेशपुर, भूड सहित अन्य गांवों में बिजली कटौती का असर देखने को मिला। इन गांवों में करीब 40 से 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई। बिजली न होने के कारण घरों में लगे पानी के मोटर नहीं चल सके, जिससे लोगों को रोजमर्रा के काम निपटाने में भी दिक्कतें आईं।
-पशुओं के लिए चारा काटने में भी आई परेशानी
बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों को पशुओं के लिए हरा चारा काटने में भी परेशानी हुई। बिजली से चलने वाली टोक्का मशीनें बंद रहने के कारण पशुपालकों को चारा तैयार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पानी और चारे की व्यवस्था प्रभावित होने से पशुओं की देखभाल करना भी मुश्किल हो गया। ग्रामीणों गुरदीप,सोमपाल, दीप कुमर, राजवीर, सोहन,नरेश कुमार, कृष्ण कुमार,बलबीर सिंह, दिनेश, गोलू, बिल्ला, प्रेम कुमार, जरनैल सिंह सहित अन्य लोगों ने बताया कि बिजली नहीं होने से मोबाइल फोन भी चार्ज नहीं हो सके। इससे लोगों को एक-दूसरे से संपर्क करने में परेशानी हुई और जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान भी प्रभावित हुआ।
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-30 घंटे बाद बहाल हुई बिजली
ग्रामीणों के लिए करीब 30 घंटे का बिजली कट परेशानी का कारण बना रहा। बृहस्पतिवार सुबह से शुक्रवार शाम तक लोगों को बिजली का इंतजार करना पड़ा। शुक्रवार शाम पांच बजे बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लंबे समय तक बिजली गुल रहने से स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पेयजल, पशुपालन और दैनिक जरूरतों पर भी पड़ता है।
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ग्रामीण क्षेत्र के टपरियां, त्रिलोकपुर, गणेशपुर, दुल्लोपुर, खेतपराली, दुधगढ़, सबीलपुर, टिब्बी, बु्ंगा, बेलवाली, आसरेवाली, बलौटी,गणेशपुर, भूड सहित अन्य गांवों में बिजली कटौती का असर देखने को मिला। इन गांवों में करीब 40 से 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई। बिजली न होने के कारण घरों में लगे पानी के मोटर नहीं चल सके, जिससे लोगों को रोजमर्रा के काम निपटाने में भी दिक्कतें आईं।
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-पशुओं के लिए चारा काटने में भी आई परेशानी
बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों को पशुओं के लिए हरा चारा काटने में भी परेशानी हुई। बिजली से चलने वाली टोक्का मशीनें बंद रहने के कारण पशुपालकों को चारा तैयार करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पानी और चारे की व्यवस्था प्रभावित होने से पशुओं की देखभाल करना भी मुश्किल हो गया। ग्रामीणों गुरदीप,सोमपाल, दीप कुमर, राजवीर, सोहन,नरेश कुमार, कृष्ण कुमार,बलबीर सिंह, दिनेश, गोलू, बिल्ला, प्रेम कुमार, जरनैल सिंह सहित अन्य लोगों ने बताया कि बिजली नहीं होने से मोबाइल फोन भी चार्ज नहीं हो सके। इससे लोगों को एक-दूसरे से संपर्क करने में परेशानी हुई और जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान भी प्रभावित हुआ।
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-30 घंटे बाद बहाल हुई बिजली
ग्रामीणों के लिए करीब 30 घंटे का बिजली कट परेशानी का कारण बना रहा। बृहस्पतिवार सुबह से शुक्रवार शाम तक लोगों को बिजली का इंतजार करना पड़ा। शुक्रवार शाम पांच बजे बिजली आपूर्ति बहाल होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। लंबे समय तक बिजली गुल रहने से स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पेयजल, पशुपालन और दैनिक जरूरतों पर भी पड़ता है।