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शहर में 209 बस शेल्टर को बनाने के लिए टेंडर करने के दिए आदेश
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चंडीगढ़। पिछले कई साल से शहर के बस क्यू शेल्टर टूटे पड़े हैं। अमर उजाला ने लगातार इस मुद्दे को उठाया है। वीरवार को वित्त सचिव विजय नामदेवराव जड़े ने इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर जल्द ही 209 बस शेल्टर बनाने के लिए टेंडर जारी करने के आदेश दिए।
बैठक में फैसला लिया गया है कि यूटी का इंजीनियरिंग विभाग इन बस शेल्टरों को अपने खर्चे पर बनाएगा और फिर उन पर विज्ञापन लगाने के लिए बस क्यू शेल्टर परिवहन विभाग को सौंप दिए जाएंगे। पहले प्रशासन का इंजीनियरिंग विभाग एक ऐसी कंपनी की तलाश कर रहा था, जो शेल्टरों का निर्माण भी करे और फिर उन पर विज्ञापन लगाए। इसे लेकर प्रशासन ने कई बार टेंडर किए, लेकिन एक बार भी सफल नहीं हुआ।
इसके बाद नए वित्त सचिव ने इस मुद्दे पर कई बैठके कीं और फैसला किया कि बस शेल्टर का निर्माण और फिर विज्ञापन का काम अलग-अलग करना होगा। विज्ञापन का काम किस विभाग को दिया जाए, यह तय करने केलिए वीरवार को वित्त सचिव ने बैठक की।
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एक साल के अंदर होगा काम पूरा
चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि इंजीनियरिंग विभाग 209 बस क्यू शेल्टर का निर्माण करेगा और करीब 200 बस क्यू शेल्टर की मरम्मत करेगा। इस पर 12 से 14 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। 200 में से करीब 80 बस शेल्टर की मरम्मत के लिए विभाग ने एक कंपनी को टेंडर भी अलॉट कर दिया है और काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि नए शेल्टर बनाने के लिए कुछ दिनों में टेंडर किया जाएगा और 9 महीने से एक साल के अंदर काम पूरा कर लिया जाएगा।
2017 में अत्याधुनिक बस शेल्टर बनाने की शुरुआत हुई थी
साल 2017 में शहर में अत्याधुनिक बस क्यू शेल्टर बनाने की कवायद हुई थी, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन बसों को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों खर्च कर रहा है, लेकिन जब बस शेल्टर ही नहीं होंगे तो बसों को स्मार्ट बनाने से क्या फायदा होगा। बस क्यू शेल्टर नहीं होने से यात्रियों को सिर ढकने तक की जगह नहीं मिल रही। बस या ऑटो का इंतजार करने के लिए खुले में ही खड़े होना पड़ता है। बारिश और गर्मियों में सबसे अधिक दिक्कत आती है।
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बैठक में फैसला लिया गया है कि यूटी का इंजीनियरिंग विभाग इन बस शेल्टरों को अपने खर्चे पर बनाएगा और फिर उन पर विज्ञापन लगाने के लिए बस क्यू शेल्टर परिवहन विभाग को सौंप दिए जाएंगे। पहले प्रशासन का इंजीनियरिंग विभाग एक ऐसी कंपनी की तलाश कर रहा था, जो शेल्टरों का निर्माण भी करे और फिर उन पर विज्ञापन लगाए। इसे लेकर प्रशासन ने कई बार टेंडर किए, लेकिन एक बार भी सफल नहीं हुआ।
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इसके बाद नए वित्त सचिव ने इस मुद्दे पर कई बैठके कीं और फैसला किया कि बस शेल्टर का निर्माण और फिर विज्ञापन का काम अलग-अलग करना होगा। विज्ञापन का काम किस विभाग को दिया जाए, यह तय करने केलिए वीरवार को वित्त सचिव ने बैठक की।
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एक साल के अंदर होगा काम पूरा
चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि इंजीनियरिंग विभाग 209 बस क्यू शेल्टर का निर्माण करेगा और करीब 200 बस क्यू शेल्टर की मरम्मत करेगा। इस पर 12 से 14 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। 200 में से करीब 80 बस शेल्टर की मरम्मत के लिए विभाग ने एक कंपनी को टेंडर भी अलॉट कर दिया है और काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि नए शेल्टर बनाने के लिए कुछ दिनों में टेंडर किया जाएगा और 9 महीने से एक साल के अंदर काम पूरा कर लिया जाएगा।
2017 में अत्याधुनिक बस शेल्टर बनाने की शुरुआत हुई थी
साल 2017 में शहर में अत्याधुनिक बस क्यू शेल्टर बनाने की कवायद हुई थी, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन बसों को स्मार्ट बनाने के लिए करोड़ों खर्च कर रहा है, लेकिन जब बस शेल्टर ही नहीं होंगे तो बसों को स्मार्ट बनाने से क्या फायदा होगा। बस क्यू शेल्टर नहीं होने से यात्रियों को सिर ढकने तक की जगह नहीं मिल रही। बस या ऑटो का इंतजार करने के लिए खुले में ही खड़े होना पड़ता है। बारिश और गर्मियों में सबसे अधिक दिक्कत आती है।