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आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकालने पर उठाए सवाल
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चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग में कोरोना काल में आउटसोर्स पर रखे गए कर्मचारियों में से 81 को नौकरी से निकाले जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। विरोध प्रदर्शन के बीच स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने स्वास्थ्य निदेशक समेत जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक से कर्मचारियों के ही बिंदुओं पर सवाल पूछे हैं।
स्वास्थ्य सचिव ने पूछा है कि अगर स्वास्थ्य विभाग ने 15 सितंबर के बाद आउटसोर्स पर कर्मचारियों की भर्ती की है तो इन कर्मचारियों को समायोजित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने 15 से 30 सितंबर के बीच विभिन्न पदों पर आउटसोर्स से की गई भर्तियों का ब्योरा मांगा है।
गौरतलब है कि पूर्व स्वास्थ्य निदेशक ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में मानक को दरकिनार कर आउटसोर्स पर कई भर्तियां की हैं। इस पर कोरोना काल में आउटसोर्स पर भर्ती के बाद हटाए गए कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उच्च अधिकारियों ने अपने नजदीकियों को भर्ती करने के लिए हमारे बारे में नहीं सोचा। अगर उन्हें निकाले जाने से पहले इस बारे में ध्यान दिया गया होता तो 81 कर्मचारियों में से कुछ अभी नौकरी कर रहे होतेे।
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बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में पिछले कुछ दिनों से भर्ती के नाम पर चल रही धांधली का मामला अमर उजाला ने बीते 16 और 17 सितंबर के अंक में प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया गया था कि किस तरह से उच्च अधिकारियों ने कुछ मलाईदार पदों पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नियुक्ति कर युवाओं को रोजगार के अवसर से वंचित कर दिया।
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स्वास्थ्य सचिव ने पूछा है कि अगर स्वास्थ्य विभाग ने 15 सितंबर के बाद आउटसोर्स पर कर्मचारियों की भर्ती की है तो इन कर्मचारियों को समायोजित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने 15 से 30 सितंबर के बीच विभिन्न पदों पर आउटसोर्स से की गई भर्तियों का ब्योरा मांगा है।
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गौरतलब है कि पूर्व स्वास्थ्य निदेशक ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में मानक को दरकिनार कर आउटसोर्स पर कई भर्तियां की हैं। इस पर कोरोना काल में आउटसोर्स पर भर्ती के बाद हटाए गए कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उच्च अधिकारियों ने अपने नजदीकियों को भर्ती करने के लिए हमारे बारे में नहीं सोचा। अगर उन्हें निकाले जाने से पहले इस बारे में ध्यान दिया गया होता तो 81 कर्मचारियों में से कुछ अभी नौकरी कर रहे होतेे।
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बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में पिछले कुछ दिनों से भर्ती के नाम पर चल रही धांधली का मामला अमर उजाला ने बीते 16 और 17 सितंबर के अंक में प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया गया था कि किस तरह से उच्च अधिकारियों ने कुछ मलाईदार पदों पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की नियुक्ति कर युवाओं को रोजगार के अवसर से वंचित कर दिया।