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तीसरी लहर में दूसरी से ज्यादा हो सकती है संक्रमणता दर : यशपाल गर्ग
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चंडीगढ़। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर शहर के सभी निजी अस्पतालों को चेताया है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर में संक्रमणता दर दूसरी लहर से भी कई गुना ज्यादा हो सकती है, इसलिए अगले 3 महीने बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। इसके लिए सभी को पूरी तरह से सतर्क रहना चाहिए।
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन को लेकर हुई मारामारी को देखते हुए विभाग इस बार पहले से ही तैयार रहना चाहता है, इसलिए स्वास्थ्य सचिव ने सभी अस्पतालों को आदेश दिए हैं कि उनके पास ऑक्सीजन के प्लांट लगे होने चाहिए। आदेश में कहा गया है कि जिन अस्पतालों में 50 बेड से ज्यादा की क्षमता है, उनके यहां अनिवार्य रूप से ऑक्सीजन प्लांट लगे होने चाहिए। यशपाल गर्ग ने बताया कि बीते दिनों उनकी अध्यक्षता में एक बैठक भी हुई है, जिसमें बताया गया है कि ऑक्सीजन प्लांट को कैसे स्थापित किया जा सकता है। कुछ निजी अस्पतालों ने रूफटॉप ऑक्सीजन प्लांट लगाने के बारे में पूछा था, जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन के चीफ आर्किटेक्ट से चर्चा की और उन्होंने रूफटॉप ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए मंजूरी दे दी है।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि सभी अस्पतालों के पास खाली डी-टाइप और बी-टाइप सिलिंडर की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। आपात स्थिति में अगर 48 से 72 घंटे तक इन सिलिंडरों को रिफिल नहीं किया जा सके, तो भी अस्पताल के पास कम से कम दो से तीन दिन का बैकअप होना चाहिए। सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ऑक्सीजन की सभी पाइपलाइन की अच्छे से जांच कर लें और अगर कहीं पर किसी तरह की समस्या है तो उसे तुरंत ठीक किया जाए। उन्होंने अस्पतालों को एक ऑक्सीजन ऑडिट टीम भी बनाने के निर्देश दिए हैं जो कि ऑक्सीजन की सप्लाई की मात्रा की निरंतर जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट बनाएगी। ऑक्सीजन सिलिंडर पर निर्भरता को कम करने के लिए विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी निजी अस्पताल बेड की क्षमता के अनुसार ऑक्सीजन कन्संट्रेटर का भी बंदोबस्त करके रखें, ताकि आपात स्थिति में इनका उपयोग किया जा सके। विभाग ने कहा है कि ऑक्सीजन की खपत बढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाओं में भी वृद्धि होती है, इसलिए सभी अस्पताल अग्निशमन यंत्रों की अच्छे से जांच करें। अगले 15 दिनों के अंदर सभी अस्पतालों को सलाह दी गई है कि वह एक फायर ऑडिट करवाएं, ताकि आग लगने की खतरों को कम किया जा सके।
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दवाइयों का स्टॉक रखने और एंबुलेंस तैयार रखने के निर्देश
स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने सभी निजी अस्पताल को दिए आदेश में कहा है कि वह महत्वपूर्ण दवाइयों का बफर स्टॉक रखें। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य निदेशक के दफ्तर से सभी निजी अस्पताल दवाइयों की एक सूची भी प्राप्त कर सकते हैं, जो आगामी तीसरी लहर को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण दवाइयां है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सभी अस्पताल अपने एंबुलेंस को भी तैयार रखें। एंबुलेंस में ऑक्सीजन की भी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में मरीज की जान बचाई जा सके। साथ ही एंबुलेंस में तैनात कर्मी भी पूरी तरह से प्रशिक्षित होने चाहिए। स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि अस्पताल अपने यहां कर्मचारियों की क्षमता भी पूरी रखें। इसके लिए वह किसी निजी एजेंसी की भी मदद ले सकते हैं। उन्होंने इन आदेशों की एक प्रति स्वास्थ्य विभाग के सभी महत्वपूर्ण अधिकारियों के साथ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल को भी भेजी है।
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कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन को लेकर हुई मारामारी को देखते हुए विभाग इस बार पहले से ही तैयार रहना चाहता है, इसलिए स्वास्थ्य सचिव ने सभी अस्पतालों को आदेश दिए हैं कि उनके पास ऑक्सीजन के प्लांट लगे होने चाहिए। आदेश में कहा गया है कि जिन अस्पतालों में 50 बेड से ज्यादा की क्षमता है, उनके यहां अनिवार्य रूप से ऑक्सीजन प्लांट लगे होने चाहिए। यशपाल गर्ग ने बताया कि बीते दिनों उनकी अध्यक्षता में एक बैठक भी हुई है, जिसमें बताया गया है कि ऑक्सीजन प्लांट को कैसे स्थापित किया जा सकता है। कुछ निजी अस्पतालों ने रूफटॉप ऑक्सीजन प्लांट लगाने के बारे में पूछा था, जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासन के चीफ आर्किटेक्ट से चर्चा की और उन्होंने रूफटॉप ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए मंजूरी दे दी है।
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स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि सभी अस्पतालों के पास खाली डी-टाइप और बी-टाइप सिलिंडर की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। आपात स्थिति में अगर 48 से 72 घंटे तक इन सिलिंडरों को रिफिल नहीं किया जा सके, तो भी अस्पताल के पास कम से कम दो से तीन दिन का बैकअप होना चाहिए। सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ऑक्सीजन की सभी पाइपलाइन की अच्छे से जांच कर लें और अगर कहीं पर किसी तरह की समस्या है तो उसे तुरंत ठीक किया जाए। उन्होंने अस्पतालों को एक ऑक्सीजन ऑडिट टीम भी बनाने के निर्देश दिए हैं जो कि ऑक्सीजन की सप्लाई की मात्रा की निरंतर जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट बनाएगी। ऑक्सीजन सिलिंडर पर निर्भरता को कम करने के लिए विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सभी निजी अस्पताल बेड की क्षमता के अनुसार ऑक्सीजन कन्संट्रेटर का भी बंदोबस्त करके रखें, ताकि आपात स्थिति में इनका उपयोग किया जा सके। विभाग ने कहा है कि ऑक्सीजन की खपत बढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाओं में भी वृद्धि होती है, इसलिए सभी अस्पताल अग्निशमन यंत्रों की अच्छे से जांच करें। अगले 15 दिनों के अंदर सभी अस्पतालों को सलाह दी गई है कि वह एक फायर ऑडिट करवाएं, ताकि आग लगने की खतरों को कम किया जा सके।
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दवाइयों का स्टॉक रखने और एंबुलेंस तैयार रखने के निर्देश
स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने सभी निजी अस्पताल को दिए आदेश में कहा है कि वह महत्वपूर्ण दवाइयों का बफर स्टॉक रखें। उन्होंने कहा है कि स्वास्थ्य निदेशक के दफ्तर से सभी निजी अस्पताल दवाइयों की एक सूची भी प्राप्त कर सकते हैं, जो आगामी तीसरी लहर को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण दवाइयां है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सभी अस्पताल अपने एंबुलेंस को भी तैयार रखें। एंबुलेंस में ऑक्सीजन की भी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में मरीज की जान बचाई जा सके। साथ ही एंबुलेंस में तैनात कर्मी भी पूरी तरह से प्रशिक्षित होने चाहिए। स्वास्थ्य सचिव ने कहा है कि अस्पताल अपने यहां कर्मचारियों की क्षमता भी पूरी रखें। इसके लिए वह किसी निजी एजेंसी की भी मदद ले सकते हैं। उन्होंने इन आदेशों की एक प्रति स्वास्थ्य विभाग के सभी महत्वपूर्ण अधिकारियों के साथ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल को भी भेजी है।