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कोरोना से लगातार दूसरे दिन भी मौत, पीयू के असिस्टेंट प्रोफेसर ने तोड़ा दम
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चंडीगढ़। कोरोना से मौतों का सिलसिला एक बार फिर बढ़ने लगा है। रविवार को कोरोना संक्रमित पीयू के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ठाकुर की मौत हो गई। वह पीजीआई में भर्ती थे। इससे पहले शनिवार को बापूधाम में एक कोरोना संक्रमित महिला ने दम तोड़ दिया था। लगातार दो दिन में दो मौतों से स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
वहीं, शहर में रविवार को कोरोना के आठ नए मरीज मिले। इसके साथ ही संक्रमण दर 0.66 प्रतिशत पर पहुंच गई है। उधर, 10 दिन की क्वारंटीन अवधि पूरी कर चुके तीन मरीजों को छुट्टी दे दी गई। बता दें कि इस समय शहर में कोरोना के 89 सक्रिय केस हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे के दौरान 1211 मरीजों की कोरोना जांच की। वहीं, शहर में अब कोरोना मृतकों का आंकड़ा 1078 पर पहुंच गया है।
स्वास्थ्य निदेशक सुमन सिंह के अनुसार, पीयू के कानून विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ठाकुर का पीजीआई में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉ. अनिल में बीते 21 नवंबर को कोरोना की पुष्टि हुई थी। उनकी पत्नी भी कोरोना संक्रमित पाई गईं थीं, लेकिन वो इलाज के बाद ठीक हो गई थीं लेकिन डॉ. अनिल की तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था। डॉ. अनिल पंजाब विश्वविद्यालय के कैंपस में ही परिवार के साथ रहते थे। बता दें कि पांच अक्तूबर के बाद अब लगातार दो दिन में दो कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है।
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लापरवाही : यूके से लौटे संक्रमित युवक को दो दिन बाद किया भर्ती
चंडीगढ़। यूके से 15 दिसंबर को लौटे 26 वर्षीय युवक में कोरोना की पुष्टि हुई है। हैरान करने वाली बात यह है कि युवक की रिपोर्ट दो दिन पहले पॉजिटिव आने के बावजूद उसे शनिवार शाम को जीएमसीएच-32 में भर्ती किया गया। वहीं, उसके परिवार के तीन सदस्यों को भी अस्पताल में क्वारंटीन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के इस लापरवाही से संक्रमण फैलने का खतरा मंडराने लगा है। उधर, स्वास्थ्य निदेशक इसके लिए जीएमसीएच-32 प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।
युवक के परिजनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। ऐसे में युवक को परिजनों से अलग भर्ती किया गया है। उधर, ओमिक्रॉन की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए युवक के जांच का नमूना दिल्ली भेजा है। बता दें कि युवक अपने माता-पिता और दादी के साथ 15 दिसंबर को चंडीगढ़ आया था। एयरपोर्ट पर जांच में उसमें कोरोना की पुष्टि हुई, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले तक वह अपने परिजनों के साथ सेक्टर-35 स्थित जेडब्ल्यू मैरियट होटल में ठहरा था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमण की पुष्टि के बाद नगर निगम की क्वारंटीन टीम ने सभी को अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। वहीं, होटल के 14 कर्मचारियों की आरटीपीसीआर जांच के लिए नमूना लिया गया है। इसमें रिशेप्सनिस्ट, सुरक्षाकर्मी, हाउसकीपिंग के कर्मचारी शामिल हैं।
जीएमसीएच-32 में शनिवार की रात युवक व परिजनों के भर्ती होने के बाद रविवार की सुबह मोहाली में रह रही उसकी बहन मिलने के लिए अस्पताल पहुंची। बहन का कहना है कि उसके घर में पर्याप्त जगह है। वह अपने परिजनों को घर ले जाना चाहती है, लेकिन उसे इसकी अनुमति नहीं मिली।
कोट
कोविड का मीडिया बुलेटिन मेरी देखरेख में अपडेट किया जाता है। जीएमसीएच-32 में संक्रमित युवक और उसके परिजन दो दिनों से भर्ती थे। इसकी जानकारी जीएमसीएच-32 प्रशासन को अपडेट करानी चाहिए थी।
-डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक
टीके की दोनों खुराक लगवाने के बाद भी खतरा बरकरार, सतर्कता जरूरी
चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर की भयावहता को देखते हुए सरकार ने बचाव की नई गाइडलाइन जारी की है। नए मानक के अनुसार, टीके की दोनों खुराक लगवाने के बावजूद लोग संक्रमण के खतरे की जद में हैं। इतना ही नहीं टीका लगवा चुका व्यक्ति भी संक्रमण का कारण बन सकता है, इसलिए बचाव के मानकों का पालन दोगुनी कड़ाई से किया जाना जरूरी है।
स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग का कहना कि तीसरी लहर की आशंका के बीच ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए कड़ाई बेहद जरूरी हो गई है। जहां तक बचाव की तैयारियों की बात है तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन इसमें जब तक जनता का सहयोग नहीं मिलेगा तब तक सफलता नहीं मिलेगी, इसलिए खुद सचेत रहने के साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का प्रयास कीजिए।
डेल्टा से भी 70 गुना ज्यादा तीव्र होगी ये लहर
डब्ल्यूएचओ के पूर्व परामर्शदाता डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि अब तक जो रिपोर्ट सामने आ रही है, उससे यह पता चलता है कि तीसरी लहर की आक्रामकता डेल्टा से 70 गुना ज्यादा होगी, यानी जब तक हम संभलने के बारे में सोचेंगे तब तक सब तहस नहस हो चुका होगा। इसलिए इस खतरे को गंभीरता से लेने की जरूरत है, अन्यथा दूसरी लहर से भी भयानक स्थिति सामने आते देर नहीं लगेगी।
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वहीं, शहर में रविवार को कोरोना के आठ नए मरीज मिले। इसके साथ ही संक्रमण दर 0.66 प्रतिशत पर पहुंच गई है। उधर, 10 दिन की क्वारंटीन अवधि पूरी कर चुके तीन मरीजों को छुट्टी दे दी गई। बता दें कि इस समय शहर में कोरोना के 89 सक्रिय केस हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 24 घंटे के दौरान 1211 मरीजों की कोरोना जांच की। वहीं, शहर में अब कोरोना मृतकों का आंकड़ा 1078 पर पहुंच गया है।
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स्वास्थ्य निदेशक सुमन सिंह के अनुसार, पीयू के कानून विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ठाकुर का पीजीआई में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉ. अनिल में बीते 21 नवंबर को कोरोना की पुष्टि हुई थी। उनकी पत्नी भी कोरोना संक्रमित पाई गईं थीं, लेकिन वो इलाज के बाद ठीक हो गई थीं लेकिन डॉ. अनिल की तबीयत में सुधार नहीं हो रहा था। डॉ. अनिल पंजाब विश्वविद्यालय के कैंपस में ही परिवार के साथ रहते थे। बता दें कि पांच अक्तूबर के बाद अब लगातार दो दिन में दो कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है।
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लापरवाही : यूके से लौटे संक्रमित युवक को दो दिन बाद किया भर्ती
चंडीगढ़। यूके से 15 दिसंबर को लौटे 26 वर्षीय युवक में कोरोना की पुष्टि हुई है। हैरान करने वाली बात यह है कि युवक की रिपोर्ट दो दिन पहले पॉजिटिव आने के बावजूद उसे शनिवार शाम को जीएमसीएच-32 में भर्ती किया गया। वहीं, उसके परिवार के तीन सदस्यों को भी अस्पताल में क्वारंटीन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के इस लापरवाही से संक्रमण फैलने का खतरा मंडराने लगा है। उधर, स्वास्थ्य निदेशक इसके लिए जीएमसीएच-32 प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।
युवक के परिजनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। ऐसे में युवक को परिजनों से अलग भर्ती किया गया है। उधर, ओमिक्रॉन की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए युवक के जांच का नमूना दिल्ली भेजा है। बता दें कि युवक अपने माता-पिता और दादी के साथ 15 दिसंबर को चंडीगढ़ आया था। एयरपोर्ट पर जांच में उसमें कोरोना की पुष्टि हुई, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले तक वह अपने परिजनों के साथ सेक्टर-35 स्थित जेडब्ल्यू मैरियट होटल में ठहरा था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संक्रमण की पुष्टि के बाद नगर निगम की क्वारंटीन टीम ने सभी को अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। वहीं, होटल के 14 कर्मचारियों की आरटीपीसीआर जांच के लिए नमूना लिया गया है। इसमें रिशेप्सनिस्ट, सुरक्षाकर्मी, हाउसकीपिंग के कर्मचारी शामिल हैं।
जीएमसीएच-32 में शनिवार की रात युवक व परिजनों के भर्ती होने के बाद रविवार की सुबह मोहाली में रह रही उसकी बहन मिलने के लिए अस्पताल पहुंची। बहन का कहना है कि उसके घर में पर्याप्त जगह है। वह अपने परिजनों को घर ले जाना चाहती है, लेकिन उसे इसकी अनुमति नहीं मिली।
कोट
कोविड का मीडिया बुलेटिन मेरी देखरेख में अपडेट किया जाता है। जीएमसीएच-32 में संक्रमित युवक और उसके परिजन दो दिनों से भर्ती थे। इसकी जानकारी जीएमसीएच-32 प्रशासन को अपडेट करानी चाहिए थी।
-डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक
टीके की दोनों खुराक लगवाने के बाद भी खतरा बरकरार, सतर्कता जरूरी
चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर की भयावहता को देखते हुए सरकार ने बचाव की नई गाइडलाइन जारी की है। नए मानक के अनुसार, टीके की दोनों खुराक लगवाने के बावजूद लोग संक्रमण के खतरे की जद में हैं। इतना ही नहीं टीका लगवा चुका व्यक्ति भी संक्रमण का कारण बन सकता है, इसलिए बचाव के मानकों का पालन दोगुनी कड़ाई से किया जाना जरूरी है।
स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग का कहना कि तीसरी लहर की आशंका के बीच ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए कड़ाई बेहद जरूरी हो गई है। जहां तक बचाव की तैयारियों की बात है तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन इसमें जब तक जनता का सहयोग नहीं मिलेगा तब तक सफलता नहीं मिलेगी, इसलिए खुद सचेत रहने के साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का प्रयास कीजिए।
डेल्टा से भी 70 गुना ज्यादा तीव्र होगी ये लहर
डब्ल्यूएचओ के पूर्व परामर्शदाता डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि अब तक जो रिपोर्ट सामने आ रही है, उससे यह पता चलता है कि तीसरी लहर की आक्रामकता डेल्टा से 70 गुना ज्यादा होगी, यानी जब तक हम संभलने के बारे में सोचेंगे तब तक सब तहस नहस हो चुका होगा। इसलिए इस खतरे को गंभीरता से लेने की जरूरत है, अन्यथा दूसरी लहर से भी भयानक स्थिति सामने आते देर नहीं लगेगी।