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दलित-मजदूरों को किसानों के साथ लाने का खाका तैयार करने में जुटे चढूनी

Thu, 22 Jul 2021 01:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 22 Jul 2021 01:33 AM IST
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Chadhuni engaged in preparing a blueprint to bring Dalit laborers with farmers
चंडीगढ़। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूूनी ने कहा कि उनका मिशन पंजाब जारी रहेगा, किसान मोर्चा उनको कल निकालता चाहे आज निकाल दे। मिशन पंजाब केवल राजनीतिक नहीं बल्कि बदलाव का मिशन है। पंजाब के दलितों, मजदूरों और बुद्धीजिवी लोगों को एक मंच पर आना चाहिए। जरूरत पड़े तो नई राजनीतिक पार्टी का भी गठन करें, ताकि पंजाब को बचाया जा सके। इस समय पंजाब की जनता तीनों दलों से तंग है। भाकियू नेता ने यह भी दावा किया कि वे मिशन पंजाब के बाद किसान आंदोलन भी जारी रखेेंगे। मोर्च से दूर रहकर भी वे मोर्चे के लिए काम करते रहेंगे।
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चढ़ूूनी बुधवार को चंडीगढ़ सेक्टर-29 स्थित देश सेवक भवन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने मनरेगा मजदूरों और दलितों के सम्मेलन को संबोधित कर साफ कर दिया कि वे लोगों के बीच जाकर और भी सम्मेलन करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके मन में राजनीति नहीं बल्कि बदलाव है और यह पंजाब से शुरू होगा। चढूनी ने कहा कि राजनीति में हिस्सा लिए बिना बदलाव नहीं हो सकता। चौधरी छोटूराम से लेकर बाबा साहब ने भी राजनीति में हिस्सा लेकर ही दबे कुचले लोगों के लिए कानून बनवाए। एक अन्य सवाल के जवाब में चढ़ूूनी ने कहा कि किसान मोर्चा राजनीति के मुद्दे पर उनसे इतना नाराज नहीं है, क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा में 11 कामरेड संगठन हैं। उनके नुमाइंदे अक्सर चुनाव लड़ते हैं और संयुक्त मोर्चा में शामिल हन्नमुल्ला कई बार सांसद रह चुके हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह पंजाब के लोगों को जागरूक करने आया है कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ें, लेकिन यदि कोई जिम्मेदारी दी जाएगी तो वे पंजाब के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं।
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राकेश टिकैत पर फिर साधा निशाना
चढू़नी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा एक है, लेकिन विचारधारा अलग-अलग है। मोर्चा यूपी में भाजपा को हराना चाहता है, हम भी चाहते हैं, लेकिन वहां हम सरकार बनाने की बात नहीं कर सकते। टिकैत का नाम लिए बगैर चढ़ूूनी ने कहा कि ना तो उत्तर प्रदेश में कोई टोल बंद हुआ ना कोई सड़क जाम हुई और ना ही किसी नेता का घेराव हुआ। हराने का जो तरीका मोर्चा अपना रहा है, वह हरियाणा में कई साल पहले हो चुका है। पहले बंसीलाल, फिर भजन लाल और फिर ओमप्रकाश चौटाला की सरकार किसानों ने हराई, लेकिन समस्याएं भी वैसी हैं।
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यूटी प्रशासन हटाएं धारा 144, नहीं तो करेंगे विरोध
गुरनाम सिंह ने चंडीगढ़ प्रशासन को भी सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि किसान आंदोलन के समर्थन में चौक चौराहों पर झंडे लेकर खड़े होने वाले लोगों के खिलाफ अगर धारा 144 के तहत कार्यवाही की गई तो किसान संगठन विरोध में चंडीगढ़ आकर डट जाएंगे। धारा 144 को तुरंत हटाया जाए। वहीं, वीरवार को संसद कूच को लेकर भाकियू नेता ने कहा कि कुल 200 लोगों को बुलाया है, हमसे 5 लोगों के नाम मांगे गए थे, जो दे दिए गए हैं। वे शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करते हैं।
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