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प्रिंस की हत्या के आरोपी की जमानत का सीबीआई ने किया विरोध
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चंडीगढ़। गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में प्रिंस की हत्या के आरोपी भोलू की जमानत याचिका का सीबीआई ने विरोध किया। सीबीआई ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाने के साथ ही यह भी कहा कि केवल परीक्षा टालने के लिए भोलू ने एक बच्चे की पानी की बोतल में जहर मिलाने की साजिश कर रखी थी।
मामला गुरुग्राम का है जहां पर 7 साल के प्रिंस की स्कूल में हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद स्कूल बस के कंडक्टर को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद जांच सीबीआई के पास आई और सीबीआई ने भोलू को आरोपी बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका पर व्यस्क के तौर पर सुनवाई करने के आदेश दिए थे। फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को भोलू की जमानत पर जल्द से जल्द फैसला लेने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने भोलू की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। तब शिकायतकर्ता पक्ष और सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि यदि जमानत का लाभ दिया गया तो कुछ गवाह जो अभी बच्चे हैं उन पर दबाव बनाया जा सकता है।
तब हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद दोबारा भोलू ने जमानत की मांग करते हुए याचिका दाखिल कर दी। अब सीबीआई ने भोलू की जमानत की मांग पर कहा कि भोलू की यह याचिका वैध ही नहीं है क्योंकि इससे पहले जो याचिका खारिज की गई थी तब भी यही परिस्थितियां थीं और अभी भी यही परिस्थितियां हैं। ऐसे में इस याचिका को भी खारिज किया जाना चाहिए।
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कोर्ट के आदेश पर आरोपी और मृतक के बदले गए नाम
आरोपी के परिजनों ने कोर्ट में ये भी गुहार लगाई थी कि मीडिया में आरोपी और मृतक का असली नाम प्रकाशित किया जा रहा है। इससे आरोपी की पहचान जाहिर होती है। कोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए मृतक को प्रिंस और आरोपी को भोलू नाम दिया था। साथ ही सीबीआई हाईकोर्ट को पहले भी बता चुकी है कि आरोपी भोलू किस मनोवृत्ति का था। वह अश्लील फिल्में देखता था और जहर को लेकर भोलू ने कई तरह की सर्च की थी और सबूत मिटाने को लेकर नेट पर भी सर्च की थी।
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मामला गुरुग्राम का है जहां पर 7 साल के प्रिंस की स्कूल में हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद स्कूल बस के कंडक्टर को आरोपी बनाया गया था। इसके बाद जांच सीबीआई के पास आई और सीबीआई ने भोलू को आरोपी बनाया। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका पर व्यस्क के तौर पर सुनवाई करने के आदेश दिए थे। फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को भोलू की जमानत पर जल्द से जल्द फैसला लेने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने भोलू की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। तब शिकायतकर्ता पक्ष और सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि यदि जमानत का लाभ दिया गया तो कुछ गवाह जो अभी बच्चे हैं उन पर दबाव बनाया जा सकता है।
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तब हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद दोबारा भोलू ने जमानत की मांग करते हुए याचिका दाखिल कर दी। अब सीबीआई ने भोलू की जमानत की मांग पर कहा कि भोलू की यह याचिका वैध ही नहीं है क्योंकि इससे पहले जो याचिका खारिज की गई थी तब भी यही परिस्थितियां थीं और अभी भी यही परिस्थितियां हैं। ऐसे में इस याचिका को भी खारिज किया जाना चाहिए।
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कोर्ट के आदेश पर आरोपी और मृतक के बदले गए नाम
आरोपी के परिजनों ने कोर्ट में ये भी गुहार लगाई थी कि मीडिया में आरोपी और मृतक का असली नाम प्रकाशित किया जा रहा है। इससे आरोपी की पहचान जाहिर होती है। कोर्ट ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए मृतक को प्रिंस और आरोपी को भोलू नाम दिया था। साथ ही सीबीआई हाईकोर्ट को पहले भी बता चुकी है कि आरोपी भोलू किस मनोवृत्ति का था। वह अश्लील फिल्में देखता था और जहर को लेकर भोलू ने कई तरह की सर्च की थी और सबूत मिटाने को लेकर नेट पर भी सर्च की थी।