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Panchkula News: 400 ग्राम अफीम के साथ पकड़े गए कैंटर चालक को साढ़े तीन साल की सजा
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वर्ष 2020 के मामले में अदालत का फैसला, सह आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी
माई सिटी रिेपोर्टर
पंचकूला। जिला अदालत ने वर्ष 2020 के अफीम तस्करी मामले में एक कैंटर चालक को दोषी करार देते हुए साढ़े तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर जुर्माना भी लगाया है। वहीं, मामले में नामजद दूसरे आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 3 अक्तूबर 2020 को क्राइम ब्रांच सेक्टर-26 की टीम बरवाला-पंचकूला हाईवे पर गांव अलीपुर के पास वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने एक टाटा कैंटर को रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक वाहन लेकर भाग निकला। पुलिस टीम ने पीछा कर उसे कुछ दूरी पर पकड़ लिया।
तलाशी के दौरान कैंटर चालक की सीट के नीचे रखी एक पॉलिथीन से 400 ग्राम अफीम बरामद हुई। वाहन में कपास की गांठें भी लदी हुई थीं। पूछताछ के दौरान आरोपी अफीम रखने संबंधी कोई वैध दस्तावेज या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका।
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दूसरे आरोपी को मिला संदेह का लाभ
जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी के बयान के आधार पर एक अन्य व्यक्ति को भी मामले में शामिल किया और दावा किया कि उसने आरोपी को अफीम उपलब्ध कराई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने कहा कि न तो कॉल डिटेल रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए और न ही कोई स्वतंत्र गवाह सामने लाया गया। ऐसे में दूसरे आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके और उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
नरमी की मांग अदालत ने की खारिज
सजा सुनाए जाने के दौरान दोषी ने अदालत से मानवीय आधार पर नरमी बरतने की अपील की। उसने पत्नी की बीमारी, परिवार की आर्थिक स्थिति और अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी गंभीर अपराध है और केवल व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर सजा में राहत नहीं दी जा सकती। इसके बाद अदालत ने आरोपी को साढ़े तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
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माई सिटी रिेपोर्टर
पंचकूला। जिला अदालत ने वर्ष 2020 के अफीम तस्करी मामले में एक कैंटर चालक को दोषी करार देते हुए साढ़े तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर जुर्माना भी लगाया है। वहीं, मामले में नामजद दूसरे आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, 3 अक्तूबर 2020 को क्राइम ब्रांच सेक्टर-26 की टीम बरवाला-पंचकूला हाईवे पर गांव अलीपुर के पास वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने एक टाटा कैंटर को रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक वाहन लेकर भाग निकला। पुलिस टीम ने पीछा कर उसे कुछ दूरी पर पकड़ लिया।
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तलाशी के दौरान कैंटर चालक की सीट के नीचे रखी एक पॉलिथीन से 400 ग्राम अफीम बरामद हुई। वाहन में कपास की गांठें भी लदी हुई थीं। पूछताछ के दौरान आरोपी अफीम रखने संबंधी कोई वैध दस्तावेज या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका।
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दूसरे आरोपी को मिला संदेह का लाभ
जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी के बयान के आधार पर एक अन्य व्यक्ति को भी मामले में शामिल किया और दावा किया कि उसने आरोपी को अफीम उपलब्ध कराई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए गए। अदालत ने कहा कि न तो कॉल डिटेल रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए और न ही कोई स्वतंत्र गवाह सामने लाया गया। ऐसे में दूसरे आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके और उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
नरमी की मांग अदालत ने की खारिज
सजा सुनाए जाने के दौरान दोषी ने अदालत से मानवीय आधार पर नरमी बरतने की अपील की। उसने पत्नी की बीमारी, परिवार की आर्थिक स्थिति और अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी गंभीर अपराध है और केवल व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर सजा में राहत नहीं दी जा सकती। इसके बाद अदालत ने आरोपी को साढ़े तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।