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कोरोना की तीसरी लहर को लेकर सहमे जिले के कारोबारी
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पंचकूला। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के बाद पंचकूला के कारोबारी तीसरी लहर की दस्तक सहम गए हैं। रोजाना कोरोना के सैकड़ों मामले सामने आने लगे हैं, ऐसे में फर्नीचर, कपड़ा, दवा, स्टील, टाइल्स, बैक्स के कारोबार पर कोविड का असर दिखने लगा है। महज 20 से 25 दिनों के भीतर डिमांड घटने से 30-40 फीसदी सामानों की बिक्री कम हो गई है। स्थानीय ग्राहक भी 25 फीसदी भी नहीं रहे। उधर 15 जनवरी से खरमास खत्म हो रहा है। शादी का सीजन शुरू हो रहा है। ऐसे में कपड़ा, फर्नीचर व्यापारियों ने इसकी काफी तैयारी कर रखी है, विगत दो वर्षों की भांति एक बार फिर कोरोना सिर पर मंडराने लगा है। इसे देखकर व्यापारियों को फिर से एक बार कारोबार प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। दुकानदारों की मानें तो ग्राहक काफी कम हो गए हैं। उनका कहना है कि इस बार अगर कोरोना का असर रहा और व्यापार बंद हुआ तो उनके कारोबार की कमर टूट जाएगी।
हर माह 2 से 3 लाख रुपये का नुकसान
श्रीराम ग्लास एंड प्वाईवुड के मालिक राकेश गर्ग ने बताया कि ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट का खतरा बढ़ने लगा है। ट्राइसिटी में कोरोना के सैकड़ों केस रोजाना आ रहे हैं, जिसका असर उद्योग जगत पर भी पड़ने लगा है। गर्ग ने बताया कि डिमांड कम होने की वजह से 30 से 40 फीसदी फर्नीचर की सेल कम हो गई है। जिसके चलते हर माह उनका 2 से 3 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। अगर कोरोना की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में पूरा कारोबार चौपट हो जाएगा।
लोकल कस्टमर 25 फीसदी भी नहीं रहे
ओसवाल फर्नीचर इंडस्ट्री के मालिक विशाल ओसवाल ने बताया कि लोकल कस्टमर 25 फीसदी भी नहीं रहे। कोविड की पाबंदियों को लेकर 50 फीसदी स्टाफ वर्क फ्राम होम हैं, जितना कच्चा माल चाहिए, उतना मिल नहीं रहा है। पहले जहां लोहा 50 रुपये किलो मिल रहा था, अब करीब 75 रुपये किलो हो गया है। इसका खामियाजा उद्यमियों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया एक से डेढ़ लाख रुपये का हर साल नुकसान हो रहा है।
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ट्राइसिटी एक तो नियम भी एक जैसा हो
साल 2020 व 2021 में कोरोना का काफी असर रहा। वर्ष 2021 में कारोबार ठीकठाक रहा। साल 2022 में शादी का सीजन 15 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। इस बार कारोबारी अच्छे कारोबार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनके द्वारा इसे लेकर काफी तैयारियों की गई हैं, लेकिन एक विगत दो वर्षों की भांति एक बार फिर कोरोना सिर पर मंडराने लगा है। इसे देखकर व्यापारियों को फिर से एक बार कारोबार प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। यह कहना है सेक्टर-14 स्थित रेमंड्स कपड़ा कारोबारी इंद्रजीत सिंह का। उनका कहना है कि पूरे ट्राइसिटी में कोविड को लेकर नियम एक जैसा होना चाहिए। पंचकूला में शाम को दुकानें बंद होने की वजह से लोग खरीदारी के लिए चंडीगढ़ चले जाते हैं, जिसका नुकसान पंचकूला के दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है। अभी कोरोना पाबंदियों को लेकर वर्तमान में 50 फीसदी व्यापार खत्म हो गया है, अगर ऐसे ही रहा तो पूरा कारोबार खतम हो जाएगा।
रॉ मैटेरियल का रेट बढ़ा
अशोका इंडस्ट्री के मालिक राजीव अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर के चलते महज 15-20 दिनों में कच्चा माल का रेट 12 से 15 फीसदी बढ़ गया है। इसके चलते फ्लोरिंग टाइलों की डिमांड कम हो गई है। जैसे-जैसे कोरोना के तीसरी लहर का खतरा बढ़ रहा है, उसका बिजनेस पर असर पड़ने लगा है। वहीं एमसन पैकेजिंग के मालिक संजीव मोंगा ने बताया कि उनके यहां पीपी बैग बनता है, जिसका कच्चा माल 10 से 15 फीसदी महंगा हो गया है, पेमेंट स्लो हो गई है। जिसका असर बिजनेस पर पड़ने लगा है।
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हर माह 2 से 3 लाख रुपये का नुकसान
श्रीराम ग्लास एंड प्वाईवुड के मालिक राकेश गर्ग ने बताया कि ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट का खतरा बढ़ने लगा है। ट्राइसिटी में कोरोना के सैकड़ों केस रोजाना आ रहे हैं, जिसका असर उद्योग जगत पर भी पड़ने लगा है। गर्ग ने बताया कि डिमांड कम होने की वजह से 30 से 40 फीसदी फर्नीचर की सेल कम हो गई है। जिसके चलते हर माह उनका 2 से 3 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। अगर कोरोना की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में पूरा कारोबार चौपट हो जाएगा।
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लोकल कस्टमर 25 फीसदी भी नहीं रहे
ओसवाल फर्नीचर इंडस्ट्री के मालिक विशाल ओसवाल ने बताया कि लोकल कस्टमर 25 फीसदी भी नहीं रहे। कोविड की पाबंदियों को लेकर 50 फीसदी स्टाफ वर्क फ्राम होम हैं, जितना कच्चा माल चाहिए, उतना मिल नहीं रहा है। पहले जहां लोहा 50 रुपये किलो मिल रहा था, अब करीब 75 रुपये किलो हो गया है। इसका खामियाजा उद्यमियों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया एक से डेढ़ लाख रुपये का हर साल नुकसान हो रहा है।
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ट्राइसिटी एक तो नियम भी एक जैसा हो
साल 2020 व 2021 में कोरोना का काफी असर रहा। वर्ष 2021 में कारोबार ठीकठाक रहा। साल 2022 में शादी का सीजन 15 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। इस बार कारोबारी अच्छे कारोबार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनके द्वारा इसे लेकर काफी तैयारियों की गई हैं, लेकिन एक विगत दो वर्षों की भांति एक बार फिर कोरोना सिर पर मंडराने लगा है। इसे देखकर व्यापारियों को फिर से एक बार कारोबार प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। यह कहना है सेक्टर-14 स्थित रेमंड्स कपड़ा कारोबारी इंद्रजीत सिंह का। उनका कहना है कि पूरे ट्राइसिटी में कोविड को लेकर नियम एक जैसा होना चाहिए। पंचकूला में शाम को दुकानें बंद होने की वजह से लोग खरीदारी के लिए चंडीगढ़ चले जाते हैं, जिसका नुकसान पंचकूला के दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है। अभी कोरोना पाबंदियों को लेकर वर्तमान में 50 फीसदी व्यापार खत्म हो गया है, अगर ऐसे ही रहा तो पूरा कारोबार खतम हो जाएगा।
रॉ मैटेरियल का रेट बढ़ा
अशोका इंडस्ट्री के मालिक राजीव अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर के चलते महज 15-20 दिनों में कच्चा माल का रेट 12 से 15 फीसदी बढ़ गया है। इसके चलते फ्लोरिंग टाइलों की डिमांड कम हो गई है। जैसे-जैसे कोरोना के तीसरी लहर का खतरा बढ़ रहा है, उसका बिजनेस पर असर पड़ने लगा है। वहीं एमसन पैकेजिंग के मालिक संजीव मोंगा ने बताया कि उनके यहां पीपी बैग बनता है, जिसका कच्चा माल 10 से 15 फीसदी महंगा हो गया है, पेमेंट स्लो हो गई है। जिसका असर बिजनेस पर पड़ने लगा है।