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खुलासाः हाथ जुड़ने के बाद भी हरजीत सिंह की नसों में आई थी ब्लॉकेज, 6 घंटे लगे थे दोबारा सर्जरी में

Fri, 01 May 2020 01:38 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो आशीष वर्मा, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 01 May 2020 01:38 PM IST
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PGI Chandigarh, SI Harjeet Singh Veins Was Blocked, six hours surgery to undergo again
पीजीआई से बाहर आते हुए हरजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
पंजाब पुलिस के एसआई हरजीत सिंह के हाथ को जोड़ने के लिए पीजीआई को एक नहीं बल्कि दो सर्जरी करनी पड़ी थी। 12 अप्रैल को जब उनका हाथ जोड़ा गया था तो 48 घंटे बाद खून की नसों में ब्लॉकेज आ गई थी। उसके बाद तुरंत उन्हें ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। करीब छह घंटे की सर्जरी कर ब्लॉकेज खोली गई।
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ऑपरेशन टीम में शामिल प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुनील गाबा ने बताया कि शरीर के कटे अंग को जोड़ने में सबसे महत्वपूर्ण काम खून की नसों को जोड़ना होता है। जब खून की नसें जुड़ती हैं तो उसमें अक्सर ब्लॉकेज आती हैं। हरजीत सिंह की दो नसें ब्लॉक हुई थीं। ऐसे पेशेंट को चार से पांच दिन तक लगातार हर एक घंटे में चेक करना होता है, ताकि ब्लॉकेज आने पर उसका इलाज किया जा सके।
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ज्वाइंट से कटा है हाथ, इसलिए 70 फीसदी हो सकेगी रिकवरी
एसआई हरजीत सिंह का हाथ कलाई से कटा हुआ था। उस कलाई को फिक्स तो कर दिया है, लेकिन कलाई में मूवमेंट नहीं आ पाएगी। यदि सबकुछ ठीक रहा तो 70 फीसदी रिकवरी हो जाएगी। अभी पहली स्टेज पार हुई है। खून का प्रवाह शुरू होने के साथ जख्म भी भर गया है। दूसरी स्टेज अंगुलियों की मूवमेंट होगी। थोड़ी बहुत आ गई है। अब फिजियोथैरेपी की मदद लेनी पड़ेगी।
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तनाव में आ गए थे डॉक्टर, हौसला एसआई से मिला
जिस तरह से एसआई का हाथ कटा था, उससे इस केस पर पूरे देश की नजरें टिक गईं थीं। डॉक्टरों पर भी सफल सर्जरी करने का दबाव और कोरोना का डर सता रहा था। इससे डॉक्टर थोड़े तनाव में आ गए थे। 48 घंटे बाद जब ब्लॉकेज आई तो तनाव और बढ़ गया था, लेकिन उन्हें एसआई हरजीत सिंह के हौसले से एनर्जी मिलती रही। डॉक्टरों ने बताया कि जब पेशेंट हौसले वाला हो तो उन्हें सर्जरी करने में मदद मिलती है। कुछ दबाव को डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. रमेश शर्मा व डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने अच्छी तरह से नियंत्रित किया। मीडिया को समय-समय पर ब्रीफ करते रहे।


कटे अंग को ऐसे लाएं
कटे अंग को धोकर काटन के कपड़े में लपेटे। उसके बाद उसे पॉलिथिन में लपेट कर आइस बाक्स में रख लें। कभी भी अंग को सीधे बर्फ व पानी में डुबोकर नहीं लाना चाहिए। आपरेशन करने वाली टीम में डॉ. गाबा के अलावा डॉ. जैरी जॉन, डॉ. सूरज, चंद्रा, मयंक, एनेस्थीसिया के डॉ. अंकुर व डॉ. आशीष शामिल रहे। डॉ. गाबा ने बताया कि लोगों में अब भी भ्रम है कि प्लास्टिक सर्जन सिर्फ कॉस्टमेटिक सर्जरी करता है। जबकि प्लास्टिक सर्जन का काम कटे अंग को जोड़ना और कैंसर सर्जरी में अहम है।
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