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Panchkula News: बड़ा सवाल...कौशल्या नदी पर कब्जा करने लिए क्यों जारी की गई एनओसी
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पंचकूला। कौशल्या नदी के पास पिंजौर-कालका अर्बन कांप्लेक्स सेक्टर-5 विकसित करने के लिए सिंचाई विभाग ने एनओसी जारी नहीं की। विभाग के अधिकारियों ने तीन बार काम रुकवाया। करीब 20 दिनों तक काम बंद रहा, लेकिन सिंचाई विभाग ने अनुमति नहीं दी। वहीं, कौशल्या नदी में चल रहे अवैध निर्माणों के लिए एनओसी जारी की गई है। इसकी आड़ में कंस्ट्रक्शन कंपनियां कौशल्या नदी पर कब्जा कर रही हैं। रिटेनिंग वाॅल का झांसा देकर लोगों को ठगा जा रहा है। लोगों को यह पता नहीं है कि कौशल्या और झजरा नदी का जल स्तर बढ़ने पर डूबना पड़ सकता है। पंचकूला के लोगों का कहना है कि कौशल्या नदी पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
एचएसवीपी के अधिकारियों ने उठाए सवाल, बोले-सिंचाई विभाग से क्यों ले अनुमति
हरियाणा शहरी विकास प्राद्यिकरण (एचएसवीपी) के इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों का कहना है कि विभाग की यहां 20 एकड़ जमीन है। यहां सेक्टर विकसित करने की योजना है। तीन बड़ी कंस्ट्रशन कंपनियों ने सेक्टर विकसित कर लिया, सरकारी महकमा क्यों नहीं? एचएसवीपी अपनी जमीन पर सेक्टर विकसित कर रहा है तो सिंचाई विभाग से अनुमति क्यों लें। कौशल्या डैम से चार मीटर ऊंचाई पर सेक्टर विकसित किया जा रहा है। विभाग को लोगों की सुरक्षा का ध्यान है। यहां प्राइवेट कंपनियों के दो बड़े आवासीय प्रोजेक्ट पहले ही मौजूद हैं। उसमें सैकड़ों लोग रह रहे हैं। तब लोगों को खतरा नहीं है। सरकारी सेक्टर विकसित हो जाएंगे तो खतरा हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन की अवहेलना
कौशल्या नदी के अवैध निर्माण नहीं रुके तो शिकायत डालूंगा। यह सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन की अवहेलना है। जिसने भी नदी के अंदर निर्माण के लिए एनओसी जारी की है, उसके खिलाफ करवाई होनी चाहिए। -विजय बंसल, एडवोकेट
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कोट
कौशल्या नदी के अंदर जो भी निर्माण कार्य चल रहे हैं। उनके एनओसी पुरानी एनओसी है। यह एनओसी पहले की जारी की गई है। -एक्सईएन सिंचाई विभाग
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एचएसवीपी के अधिकारियों ने उठाए सवाल, बोले-सिंचाई विभाग से क्यों ले अनुमति
हरियाणा शहरी विकास प्राद्यिकरण (एचएसवीपी) के इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों का कहना है कि विभाग की यहां 20 एकड़ जमीन है। यहां सेक्टर विकसित करने की योजना है। तीन बड़ी कंस्ट्रशन कंपनियों ने सेक्टर विकसित कर लिया, सरकारी महकमा क्यों नहीं? एचएसवीपी अपनी जमीन पर सेक्टर विकसित कर रहा है तो सिंचाई विभाग से अनुमति क्यों लें। कौशल्या डैम से चार मीटर ऊंचाई पर सेक्टर विकसित किया जा रहा है। विभाग को लोगों की सुरक्षा का ध्यान है। यहां प्राइवेट कंपनियों के दो बड़े आवासीय प्रोजेक्ट पहले ही मौजूद हैं। उसमें सैकड़ों लोग रह रहे हैं। तब लोगों को खतरा नहीं है। सरकारी सेक्टर विकसित हो जाएंगे तो खतरा हो जाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन की अवहेलना
कौशल्या नदी के अवैध निर्माण नहीं रुके तो शिकायत डालूंगा। यह सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन की अवहेलना है। जिसने भी नदी के अंदर निर्माण के लिए एनओसी जारी की है, उसके खिलाफ करवाई होनी चाहिए। -विजय बंसल, एडवोकेट
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कोट
कौशल्या नदी के अंदर जो भी निर्माण कार्य चल रहे हैं। उनके एनओसी पुरानी एनओसी है। यह एनओसी पहले की जारी की गई है। -एक्सईएन सिंचाई विभाग