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कोविड की बंदिशें घटते ही बासमती धान को लगे पंख
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चंडीगढ़। इस बार बासमती धान का उत्पादन किसानों की उम्मीदों को पंख लगा सकती है। सीजन की शुरुआत में ही इसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। बासमती की किस्म 1509 को इस बार पिछले साल के मुकाबले 1000 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिक रेट मिल रहे हैं। इस समय हरियाणा की मंडियों में 1509 किस्म के धान को हाथों हाथ खरीदा जा रहा है। इस समय रेट 3000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जबकि पिछले साल इसका रेट 1700 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल मिला था। चावल कारोबारियों का कहना है कि कोविड की बंदिशें घटने के चलते रेट में तेजी आई है।
इस बार विदेशों में बासमती की अधिक मांग भी इसका कारण है। हरियाणा के चावल निर्यातकों के पास विदेशों से अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं। इसी का असर मंडियों में दिख रहा है। पीआर धान (मोटा चावल) की खरीद केंद्र सरकार करती है, जबकि बारीक धान (बासमती चावल) खुले रूप से बेचा जाता है। इसको राइस मिलर्स या फिर निर्यातक खरीदते हैं। 1509 बासमती की अगेती किस्म है। इसके बाद 1121 और सबसे बाद में प्योर बासमती आती है। चावल कारोबारी विनोद गोयल ने बताया कि पिछली बार 1121 किस्म के रेट 3500 से 3700 रुपए प्रति क्विंटल और प्योर बासमती के 4200 रुपए से 4500 रुपए तक मिले थे। अभी ये दोनों किस्में मंडियों में आनी शेष हैं, लेकिन उम्मीद है कि इस बार इनको अच्छे रेट मिलेंगे। वहीं, किसानों को आस है कि इस बार बासमती की ये दोनों किस्में 4 हजार का रेट पार करेंगी।
13 लाख हेक्टेयर में धान, 7 लाख में बासमती
हरियाणा में इस बार 13 लाख हेक्टेयर में धान रोपाई हुई है। इसमें करीब 7 लाख हेक्टेयर में बासमती है। हरियाणा में करनाल, तरावड़ी, पानीपत, कैथल, अंबाला, सिरसा, कुरुक्षेत्र, रानिया प्रमुख बासमती चावल उत्पादक क्षेत्र हैं। भारत से हर साल करीब 40 लाख टन बासमती चावल का निर्यात होता है। इसमें से हरियाणा से 20 लाख टन बासमती चावल निर्यात होता है। हरियाणा से अरब के देशों समेत, अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप आदि देशों में चावल निर्यात होता है।
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कोविड-19 महामारी के चलते पिछले डेढ़ साल से कारोबार पर काफी असर पड़ा है। अब स्थानीय और विदेशों में कोविड की बंदिशें कम हुई हैं, इसलिए चावल के रेटों में उछाल देखने को मिल रहा है। विदेशों से बासमती की मांग भी अधिक आ रही है। उम्मीद है कि प्योर बासमती और 1121 के भाव भी किसानों को ठीक मिलेंगे। - विजय सेतिया, चावल निर्यातक।
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इस बार विदेशों में बासमती की अधिक मांग भी इसका कारण है। हरियाणा के चावल निर्यातकों के पास विदेशों से अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं। इसी का असर मंडियों में दिख रहा है। पीआर धान (मोटा चावल) की खरीद केंद्र सरकार करती है, जबकि बारीक धान (बासमती चावल) खुले रूप से बेचा जाता है। इसको राइस मिलर्स या फिर निर्यातक खरीदते हैं। 1509 बासमती की अगेती किस्म है। इसके बाद 1121 और सबसे बाद में प्योर बासमती आती है। चावल कारोबारी विनोद गोयल ने बताया कि पिछली बार 1121 किस्म के रेट 3500 से 3700 रुपए प्रति क्विंटल और प्योर बासमती के 4200 रुपए से 4500 रुपए तक मिले थे। अभी ये दोनों किस्में मंडियों में आनी शेष हैं, लेकिन उम्मीद है कि इस बार इनको अच्छे रेट मिलेंगे। वहीं, किसानों को आस है कि इस बार बासमती की ये दोनों किस्में 4 हजार का रेट पार करेंगी।
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13 लाख हेक्टेयर में धान, 7 लाख में बासमती
हरियाणा में इस बार 13 लाख हेक्टेयर में धान रोपाई हुई है। इसमें करीब 7 लाख हेक्टेयर में बासमती है। हरियाणा में करनाल, तरावड़ी, पानीपत, कैथल, अंबाला, सिरसा, कुरुक्षेत्र, रानिया प्रमुख बासमती चावल उत्पादक क्षेत्र हैं। भारत से हर साल करीब 40 लाख टन बासमती चावल का निर्यात होता है। इसमें से हरियाणा से 20 लाख टन बासमती चावल निर्यात होता है। हरियाणा से अरब के देशों समेत, अमेरिका, इंग्लैंड, यूरोप आदि देशों में चावल निर्यात होता है।
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कोविड-19 महामारी के चलते पिछले डेढ़ साल से कारोबार पर काफी असर पड़ा है। अब स्थानीय और विदेशों में कोविड की बंदिशें कम हुई हैं, इसलिए चावल के रेटों में उछाल देखने को मिल रहा है। विदेशों से बासमती की मांग भी अधिक आ रही है। उम्मीद है कि प्योर बासमती और 1121 के भाव भी किसानों को ठीक मिलेंगे। - विजय सेतिया, चावल निर्यातक।